MP में आदिवासी महिला-पुरुषों ने शुरू किया ‘फांसी सत्याग्रह’, किस बात का कर रहे विरोध?
मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने गुरुवार को राहत एवं पुनर्वास पैकेज में वृद्धि की है, लेकिन अब प्रदर्शनकारी इससे अधिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं। केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से पन्ना जिले के आदिवासी भी प्रभावित हुए हैं।

मध्यप्रदेश में 44,605 करोड़ रुपए की केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के विरोध में आदिवासी महिला-पुरुषों ने शुक्रवार को गले में फांसी का फंदा डालकर प्रतीकात्मक 'फांसी सत्याग्रह' शुरू किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से समुचित पुनर्वास नहीं किए जाने पर उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति देने की मांग की। इस दौरान ग्रामीण छतरपुर जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर कूपी गांव के पास बराना नदी के किनारे जारी यह आंदोलन शुक्रवार को आठवें दिन में प्रवेश कर गया। इससे पहले विस्थापित परिवार 'चिता सत्याग्रह' और 'जल सत्याग्रह' भी कर चुके हैं।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें अवैध रूप से बेदखल किया गया, उनकी आजीविका छिन ली गई और परियोजना प्रभावितों की सूची तैयार करने में भी अनियमितताएं हुई हैं। छतरपुर के कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि अधिकारियों की प्रदर्शनकारियों से बातचीत जारी है, ताकि उनकी समस्याओं को समझकर उनका समाधान किया जा सके।
प्रोजेक्ट की लागत 44,605 करोड़ रुपए
केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की पहली प्रमुख नदी जोड़ो परियोजना है, जिसका उद्देश्य केन नदी बेसिन से बेतवा नदी बेसिन तक पानी पहुंचाना है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 44,605 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना से 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई, 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने और 130 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है।
प्रदर्शनकारी बोले- अप्रैल के आश्वासन अबतक अधूरे
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर पिछले पांच दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने अप्रैल में दिए गए आश्वासनों को अब तक पूरा नहीं किया है। भटनागर ने दावा किया कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना तथा मझगांव और रुनझ सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित लोगों को अब तक न्याय नहीं मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि विस्थापित परिवार अपनी जमीन, जंगल, जल स्रोत, आजीविका और सांस्कृतिक पहचान खो चुके हैं।
अवैध रूप से बेदखल करने का आरोप लगाया
भटनागर ने कहा कि साथ ही कई लोगों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए, उन्हें अवैध रूप से बेदखल किया गया और बिजली कनेक्शन भी काट दिए गए। उन्होंने प्रशासन के इस दावे को भी खारिज किया कि पहले परियोजना प्रभावितों की सूची से बाहर रहे 638 परिवारों को अब उसमें शामिल कर लिया गया है।
114 लोगों के नाम अब भी सूची से बाहर
अमित भटनागर का कहना है कि मैनारी गांव के 114 लोगों के नाम अब भी सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से ग्रामीणों को डराना-धमकाना बंद करने और प्रभावित परिवारों की सूची गांवों में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की मांग की। उनका कहना है कि विस्थापन और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी किए बिना बांध निर्माण शुरू नहीं किया जा सकता।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं आदिवासी महिलाओं ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिलता तो उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए। हालांकि, छतरपुर जिला प्रशासन का कहना है कि अप्रैल में आंदोलन के दौरान उठाई गई मांगों को पूरा कर दिया गया है।
कलेक्टर ने कहा कि प्रदर्शनकारी पड़ोसी पन्ना जिले के निवासी हैं और दोनों जिलों के अधिकारी उनसे लगातार बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने गुरुवार को राहत एवं पुनर्वास पैकेज में वृद्धि की है, लेकिन अब प्रदर्शनकारी इससे अधिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं।' केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से पन्ना जिले के आदिवासी भी प्रभावित हुए हैं।
लेखक के बारे में
Sourabh Jainसौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।
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