वर्दी उतारकर BJP में चले जाओ; भोजशाला में महा आयोजन से पहले पुलिस अधिकारी पर क्यों भड़के ओवैसी
पिछले शुक्रवार को दिए अपने फैसले में हाई कोर्ट ने भोजशाला को वाग्देवी मां सरस्वती का मंदिर घोषित कर दिया और इसके साथ ही यहां हिंदुओं को 365 दिन निर्बाध पूजा-अर्चना का अधिकार भी मिल गया। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद यह पहला शुक्रवार रहा।

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला को लेकर आए हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद शुक्रवार को पहली बार मां वाग्देवी की महाआरती और विशेष पूजन का आयोजन हो रहा है। हिंदू पक्ष का कहना है कि 721 वर्षों तक चले लंबे संघर्ष के बाद यह पहला अवसर होगा, जब शुक्रवार के दिन भोजशाला परिसर में बिना किसी रुकावट के मां वाग्देवी की पूजा अर्चना होगी। वहीं इस अवसर पर किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन ने भी पूरी तैयारी कर रखी थी। इसी बीच शुक्रवार को AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पर धार में तैनात एक पुलिस अधिकारी का वीडियो शेयर किया और उस अधिकारी द्वारा बोली जा रही बातों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्हें भाजपा में शामिल हो जाने की सलाह दी।
ओवैसी ने जो वीडियो शेयर किया वह गुरुवार का है और उसमें एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एक दिन बाद होने वाली महाआरती की तैयारियों को लेकर साथी पुलिसकर्मियों को निर्देश देते नजर आए, इस दौरान वो वीडियो में वह अधिकारी कहते हैं..'सोशल मीडिया या मीडिया के माध्यम से माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय का गलत अनुवाद कर रहे हैं, गलत व्याख्या कर रहे हैं, मैं उनको आखिरी बार समझाइश देने आया हूं, अबतक का समय उनका था, अबतक मतलब गुरुवार की शाम तक का जो समय उनका था, अब जो है वो कानून का पालन होगा, विधि का शासन होगा, जिसकी हिम्मत है, जिसको लगता है वो ऐसा कर सकता है, वो कल प्रयास कर ले, हम उसके लिए पूरी तरीके से तैयार हैं, और कल वो मानकर चले कि उसके ऊपर जो उसने अबतक नहीं सोचा होगा, वो कार्रवाई होगी। धन्यवाद, भारत माता की जय।'
ओवैसी बोले- वर्दी उतारकर BJP में शामिल हो जाएं
इस वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को टैग करते हुए लिखा, 'DGP सर, अगर यह वीडियो असली है, तो जिस तरह से SP/अधिकारी बात कर रहे हैं, उससे उनकी मानसिकता का पता चलता है कि वे 'कानून के राज' (Rule of Law) में विश्वास नहीं रखते। मैं इसकी निंदा करता हूं, उन्हें अपनी वर्दी उतारकर खुले तौर पर भाजपा (BJP) में शामिल हो जाना चाहिए।
शुक्रवार को धार में उत्सव जैसा माहौल
पिछले शुक्रवार को दिए अपने फैसले में हाई कोर्ट ने भोजशाला को वाग्देवी मां सरस्वती का मंदिर घोषित कर दिया और इसके साथ ही यहां हिंदुओं को 365 दिन निर्बाध पूजा-अर्चना का अधिकार भी मिल गया। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद यह पहला शुक्रवार है। ऐसे में यहां होने वाली आरती को लेकर शहर के लोगों में जबरदस्त उत्साह देखा गया और लोग एक-दूसरे को महाआरती में शामिल होने के निमंत्रण देते हुए देखे गए। पहले जुमे के मद्देनजर प्रशासन ने शहर में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था भी की। भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया तथा पूरे शहर में हाई अलर्ट घोषित किया गया है।
इन्हीं सब कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच शुक्रवार सुबह हिंदू समाज द्वारा भोजशाला में पूजा-अर्चना शुरू की गई। श्रद्धालुओं ने मां वाग्देवी को चुनरी अर्पित कर पूजा की तथा गर्भगृह को सजाया। इसके बाद दोपहर में महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
मस्जिद पक्ष पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
उधर हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी के सदर अब्दुल समद ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय के फैसले से मुस्लिम समाज में मायूसी का माहौल है और समुदाय को यह निर्णय एकतरफा महसूस हुआ। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट के फैसले का पालन किया जाएगा और शुक्रवार को समाजजन अपने-अपने मोहल्लों की मस्जिदों तथा घरों में नमाज अदा करेंगे।
उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद मामले को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष मेंशन करेंगे और फैसले पर जल्द स्थगन आदेश की मांग की जाएगी। अब्दुल समद ने कहा कि कमाल मौला मस्जिद में लगभग 700 वर्षों से जुमे की नमाज अदा की जाती रही है और इस परंपरा के प्रभावित होने से समाज में दुख है।
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