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Hindi News मध्य प्रदेशVVIP बंगलों के लिए 27000 पेड़ों पर खतरा! चिपको आंदोलन की राह पर भोपाल

VVIP बंगलों के लिए 27000 पेड़ों पर खतरा! चिपको आंदोलन की राह पर भोपाल

मध्य प्रदेश का भोपाल शहर एक नए चिपको आंदोलन की राह पर बढ़ रहा है। यहां के लोगों ने 27,000 से अधिक पेड़ों को बचाने के लिए हाथ मिलाया है। वीवीआईपी बंगलों बनाने के लिए इन पेड़ों पर खतरा मंडरा रहा है।

VVIP बंगलों के लिए 27000 पेड़ों पर खतरा! चिपको आंदोलन की राह पर भोपाल
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Subodh Mishraपीटीआई,भोपालSat, 15 Jun 2024 06:10 PM
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मध्य प्रदेश का भोपाल शहर एक नए चिपको आंदोलन की राह पर बढ़ रहा है। दरअसल, यहां के सैकड़ों लोगों ने 27,000 से अधिक पेड़ों को बचाने के लिए हाथ मिलाया है। इन पेड़ों को शहर में वीवीआईपी बंगलों के लिए जगह बनाने के लिए काटे जाने का डर है। लोगों का कहना है कि वे 'चिपको आंदोलन' की तरह ही एक विरोध प्रदर्शन शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, मध्य प्रदेश सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने शनिवार को कहा कि ऐसी किसी योजना को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है।

पिछले दस दिनों से शहर के लोग, छात्र और पेड़ बचाओ मुहिम से जुड़े कार्यकर्ता एमपी हाउसिंग बोर्ड द्वारा शिवाजी नगर और तुलसी नगर में पेड़ों को काटकर विधायकों और नौकरशाहों के लिए बंगले बनाने की योजना के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। यह क्षेत्र शहर के सबसे हरे-भरे इलाकों में से एक है। शुक्रवार को महिलाओं और एक भाजपा विधायक ने पेड़ों की पूजा की और उनकी रक्षा करने की कसम खाई।

हालांकि मध्य प्रदेश आवास एवं शहरी विकास प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई ने कहा कि पेड़ों को तुरंत कुछ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह हाउसिंग बोर्ड द्वारा शहरी विकास मंत्री के समक्ष रखा गया एक प्रस्ताव था। यह अंतिम प्रस्ताव नहीं है और न ही सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है। कहा कि सरकार पेड़ों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। अभी तक पेड़ों को काटने का कोई प्रस्ताव नहीं है। 

अभियान का नेतृत्व करने वालों में शामिल पर्यावरण कार्यकर्ता डॉ. सुभाष सी पांडे ने कहा कि वे अपने आंदोलन पर सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार करेंगे। अगर सरकार कार्रवाई नहीं करती है तो हम चिपको आंदोलन की तरह एक बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू करने पर विचार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे संकेत हैं कि आवास परियोजना के लिए 27,000 से अधिक पेड़, जिनमें से सत्तर प्रतिशत विरासत में मिले पेड़ हैं, काटे जाने वाले हैं। पांडे ने कहा कि उनके प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे पर एमपी हाउसिंग बोर्ड के आयुक्त चंद्रमौली शुक्ला और आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि भोपाल में मेट्रो ट्रेन परियोजना, स्मार्ट सिटी और एक निजी कंपनी के विशाल परिसर के लिए पेड़ों की कटाई की भरपाई के लिए लगाया गया एक भी पौधा नहीं बचा है। पांडे ने कहा कि वह पेड़ों को बचाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में भी जाएंगे।

दक्षिण-पश्चिम भोपाल के भाजपा विधायक भगवान दास सबनानी ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में पेड़ों की पूजा की और शुक्रवार को सार्वजनिक रूप से अभियान का समर्थन किया। एक स्थानीय हिंदी दैनिक ने उनके हवाले से कहा कि विकास हरियाली की कीमत पर नहीं होना चाहिए।

इसी तरह का एक अभियान तब शुरू किया गया था जब स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए हरित क्षेत्र के हिस्से को चुना गया था। हालांकि, लोगों के आक्रोश के बाद इसे टीटी नगर में स्थानांतरित कर दिया गया था।
बता दें कि 1970 के दशक में उत्तराखंड (तब उत्तर प्रदेश का एक हिस्सा) में शुरू किया गया चिपको आंदोलन एक ऐसा आंदोलन था, जिसमें लोग पेड़ों को काटे जाने से रोकने के लिए उससे चिपक जाते थे।