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17 सितम्बर, 2020|4:55|IST

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यहां मरने के बाद दूर नहीं हो रही परेशानियां, अंतिम संस्कार के लिए करना पड़ रहा लंबा इंतजार

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में छोटे-बड़े कुल मिलाकर 14 श्मशान घाट हैं। कोरोना के कारण श्मशान घाटों पर भी सोशल डिस्टेंस मेंटेन है, इसलिए जबलपुर के श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार भी एक साथ न करके एक-एक करके किये जा रहे हैं। लाशों को अपने अंतिम संस्कार के लिए इंतज़ार करना पड़ रहा है।

कहते हैं जीवित इंसान परेशानियों में हो लेकिन मरने के बाद इंसान की सारी परेशानियां दूर हो जाती है। कोरोना के इस कठिन दौर में लाशों को भी अपने अंतिम संस्कार के लिए इंतज़ार करना पड़ रहा है। मामला जबलपुर की है जहां अंतिम संस्कार में दिक्कतें आ रही हैं। यहां अचानक मौत का आंकड़ा बढ़ गया है। ऊपर से कोरोना के कारण श्मशान घाटों पर भी सोशल डिस्टेंस मेंटेन है। इसलिए अंतिम संस्कार भी एक साथ न करके एक-एक करके किये जा रहे हैं. लाशों को अपने अंतिम संस्कार के लिए इंतज़ार करना पड़ रहा है. लाशों की तादाद ज़्यादा होने के कारण अंतिम संस्कार के लिए जगह कम पड़ रही है।

कोरोना संक्रमण काल में श्मशान घाट चिताओं से सजे हुए हैं। हर प्रमुख श्मशान घाट में पलक झपकते ही मानो एक अर्थी आ रही है। बेशक ये मौतें कोरोना से तो नहीं है लेकिन अचानक मरने वालों की तादाद बढ़ने से हर कोई चिंतित है। एक आंकलन के मुताबिक शहर में इन दिनों रोजाना 300 से 350 लोगों की मौत हो रही है।

अंतिम संस्कार में छाँव भी नहीं हो रहा नसीब

कोरोना संक्रमण का साया इस कदर कहर बरपा रहा है कि अब अंतिम संस्कार के लिए भी इंतजार करना पड़ रहा है. कुछ बदनसीबों को तो अंतिम संस्कार के लिए छांव भी नसीब नहीं हो रही। पिछले 15 दिन से शहर के हालात कुछ ऐसे ही हैं। हम बात जबलपुर जिले की कर रहे हैं जहां रोजाना मौत का इतना बड़ा आंकड़ा दर्ज हो रहा है कि श्मशान घाटों में शव जलाने के लिए जगह तक नहीं बच पा रही है।

जबलपुर के 14 श्मशान घाट पर 1 से 16 तक इतने शवों का हुआ अंतिम संस्कार

जबलपुर जिले में छोटे-बड़े कुल मिलाकर 14 श्मशान घाट हैं। इनमें चार बड़े घाट हैं. इनमें पिछले 15 दिन में कुल इतने शवों का अंतिम संस्कार किया गया है।

● ग्वारीघाट मुक्तिधाम में 1 सितंबर से 16 सितंबर तक कुल 245 शवों का अंतिम संस्कार.

● करिया पाथर मुक्तिधाम में 1 सितंबर से 16 सितंबर तक 175 शवों का अंतिम संस्कार.

● गुप्तेश्वर मुक्तिधाम में 1 सितंबर से 16 सितंबर तक शवों का अंतिम संस्कार.

● रानीताल मुक्तिधाम में 1 सितंबर से 16 सितंबर तक 216 शवों का अंतिम संस्कार.

इन आंकड़ों से 15 दिन में जबलपुर शहर के स्वास्थ्य हालात कैसे रहे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रायः सभी अस्पताल कोरोना रोगियों से भरे हैं। हालात ये हैं कि अस्पताल वाले अब गंभीर मरीजों को एडमिट करने से मना कर रहे हैं। ऐसे में कोरोना के अलावा अन्य किसी बीमारी से पीड़ित मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। ऑक्सीजन की कमी से भी मरीज दम तोड़ रहे हैं। पूरे मामले में जिले के मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी का चौंकाने वाला बयान सामने आया है। उनका कहना है कि बेशक मौत का आंकड़ा तो बढ़ा है लेकिन श्मशान घाटों में होने वाले अंतिम संस्कार की संख्या बढ़ने की मूल वजह अन्य जिलों के मरीजों की मौत है, जिनके परिवार उनका अंतिम संस्कार जबलपुर में कर रहे हैं।
 

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  • Web Title:Troubles are not going away after dying here waiting for funeral for long