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CM मोहन यादव का निर्देश; अब MP के हर जिले में होगी साइबर तहसील, जान लें फायदे

साइबर तहसीलों में औसत 15 से 17 दिनों का समय लग रहा है, जो पुरानी मैन्युअल प्रक्रिया में लगने वाले 60 दिनों की तुलना में बेहद कम है। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आइये जानते हैं इसके फायदे...

CM मोहन यादव का निर्देश; अब MP के हर जिले में होगी साइबर तहसील, जान लें फायदे
Mohammad Azamवार्ता,भोपालSat, 30 Dec 2023 08:01 PM
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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश पर साइबर तहसील की व्यवस्था अब जिलों में एक जनवरी 2024 से लागू हो रही है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश के राजस्व प्रशासन सुधार में साइबर तहसील व्यवस्था से नागरिकों के हित में अभूतपूर्व परिवर्तन होने जा रहा है। इसकी शुरुआत खरगोन जिले से होगी। अब प्रदेश में राजस्व प्रकरणों का निराकरण अत्यंत कम समय में हो जाएगा। भू-अभिलेखों में अमल के बाद सभी भू-अभिलेखों और आदेशों की सत्यापित प्रतिलिपि सम्बंधित पक्षकार को मिल सकेगी। अब अनावश्यक रूप से लंबित रहने वाले प्रकरणों का कम से कम समय में निपटारा हो सकेगा। 

बता दें कि साइबर तहसीलों में औसत 15 से 17 दिनों का समय लग रहा है, जो पुरानी मैन्युअल प्रक्रिया में लगने वाले 60 दिनों की तुलना में बेहद कम है। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रदेश में हर साल नामांतरण के लगभग 14 लाख प्रकरण पंजीबद्ध होते हैं। इनमें से वक्रिय विलेखों के नष्पिादन के बाद नामांतरण के लिए दर्ज होने वाले प्रकरणों की संख्या 8 लाख होती है। इसमें संपूर्ण खसरा के क्रय-वक्रिय से संबंधित लगभग 2 लाख अविवादित नामांतरण प्रकरण पंजीबद्ध किये जाते हैं। इस प्रकार के प्रकरणों में 15 दिन की समय-सीमा में बिना आवेदन दिए, पेपरलेस, फ़ेसलेस, ऑनलाइन नामांतरण और भू अभिलेखों को अपडेट करने के लिए साइबर तहसील स्थापित की गई है।

इस प्रकार खसरा के खरीदी-बिक्री से संबंधित 2 लाख नामांतरण मामलों का निपटारा साइबर तहसीलों से किया जा सकता है। इस प्रकार के प्रकरणों में त्वरित निराकरण के अलावा भू-अभिलेख फौरन अपडेट होगा। क्षेत्रीय तहसील स्तर पर अविवादित प्रकरणों के निराकरण का भार कम होगा। साइबर तहसील की व्यवस्था के लिए राजस्व विभाग द्वारा मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 में संशोधन कर धारा 13-क में साइबर तहसील स्थापना के प्रावधान किए गए हैं। साइबर तहसील परियोजना फिलहाल 12 जिलों - सीहोर, दतिया, इंदौर, सागर, डण्डिौरी, हरदा, ग्वालियर, आगर-मालवा, श्योपुर, बैतूल, विदिशा और उमरिया में चल रही है।

साइबर तहसील में पंजीयन से नामांतरण तक की सभी प्रकिया लागू कर दी गई हैं। साइबर तहसील को 4 अलग-अलग प्लेटफार्मों जैसे संपदा पोर्टल, भूलेख पोर्टल, स्मार्ट एप्लीकेशन फार रेवेन्यू एप्लीकेशन (सारा) पोर्टल और रेवेन्यू केस मैनेजमेंट सस्टिम (आरसीएमएस) पोर्टल से जोड़ दिया गया है। सायबर तहसील में ऐसे सभी प्रकरणों का निराकरण होगा जो संपूर्ण खसरा से संबंधित हो। जिसे विभाजित नहीं किया गया एवं ऐसी जमीन, जो किसी प्रकार से गिरवी या बंधक न रखी गई हो। पोर्टल पर पंजीयन करने और रज्ट्रिरी के बाद रेवेन्यू पोर्टल पर स्वत: केस दर्ज हो जाएगा।

इसके बाद सायबर तहसीलदार द्वारा जाँच की जाएगी। सूचना के बाद इश्तेहार और पटवारी रिपोर्ट के लिए मेमो जारी किया जाएगा। इसके बाद आदेश पारित कर भू-अभिलेख को अपडेट किया जाएगा। दस दिन बाद दावा-आपत्ति प्राप्त नही होने पर ई-मेल एवं वाट्सअप से आदेश दिए जएंगे। रज्ट्रिरार कार्यालय में वक्रिय-पत्र (रज्ट्रिरी) नष्पिादन के दौरान आवेदक को आवश्यक प्रकिया शुल्क एवं नर्धिारित प्रारूप में सामान्य जानकारी देनी होगी। ऐसे पंजीयन जिसमें संपूर्ण खसरा नंबर या संपूर्ण प्लॉट समाहित है और किसी भी खसरा या प्लॉट का कोई विभाजन नहीं है, तब ऐसे प्रकरण में पंजीकृत वक्रिय विलेख का स्वचालित प्रक्रिया के माध्यम से आरसीएमएस पोर्टल पर साइबर तहसील को भेज दिया जाता है।

साइबर तहसीलदार पंजीकृत दस्तावेज की राजस्व भू-अभिलेख से मिलान कर क्रेता, वक्रिेता और सम्बंधित ग्राम के सभी निवासियों को एसएमएस के माध्यम से नोटिस जारी करता है। इस नोटिस में आपत्ति प्रस्तुत करने के लिए लिंक भी होता है। साथ ही एक सार्वजनिक इश्तेहार तहसील के बोर्ड पर भी लगा रहता है। एक ऑनलाइन मेमो पटवारी प्रतिवेदन के लिए भी जारी होता है।

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