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Hindi News मध्य प्रदेश25 दिन से बाहर घूम रही मादा चीता का हुआ रेस्क्यू, ऐसे कूनो वापस लाई गई वीरा

25 दिन से बाहर घूम रही मादा चीता का हुआ रेस्क्यू, ऐसे कूनो वापस लाई गई वीरा

बीते 25 दिन से जौरा और पहाड़गढ़ के जंगलों में घूम रही कूनो नेशनल पार्क की मादा चीता वीरा को कूनो की टीम ने रेस्क्यू कर लिया है। रेस्क्यू करने के बाद मादा चीता को कूनो के खुले जंगल में छोड़ा गया।

25 दिन से बाहर घूम रही मादा चीता का हुआ रेस्क्यू, ऐसे कूनो वापस लाई गई वीरा
Mohammad Azamलाइव हिन्दुस्तान,श्योपुरSat, 20 Apr 2024 07:37 PM
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बीते 25 दिन से जौरा और पहाड़गढ़ के जंगलों में घूम रही कूनो नेशनल पार्क की मादा चीता वीरा को कूनो की टीम ने रेस्क्यू कर लिया है। कूनो नेशनल पार्क की टीम ने लगभग 2 घंटे की मशक्कत के बाद वीरा को ट्रैंक्युलाइज कर लिया गया। गुरुवार देर रात वापस कूनो नेशनल पार्क लाकर खुले जंगल में छोड़ दिया।

श्योपुर कूनो के खुले जंगल में रह रहे नर चीता पवन और मादा चीता वीरा मार्च के अंतिम सप्ताह में कूनो नेशनल पार्क की सीमा से बाहर निकल गए थे। इस दौरान पवन तो वापस कूनो में लौट आया, लेकिन वीरा आगे बढ़ गई। इस दौरान 27 मार्च को मादा चीता वीरा जिले की सीमा भी क्रॉस कर मुरैना जिले की जौरा और पहाड़गढ़ सीमा में पहुंच गई। जिसके बाद बीते 22 दिनों से वीरा पहाड़गढ़ और जौरा के जंगलों में ही घूम रही थी। यही वजह है कि लंबा समय होने के चलते और सुरक्षा की दृष्टि से चीता स्टीयरिंग कमेटी की अनुशंसा के बाद वीरा को रेस्क्यू करने का निर्णय लिया गया। जिसके बाद गुरुवार की शाम को कूनो की टीम ने वीरा को ट्रैंक्युलाइज किया और वापस कूनो में लाकर छोड़ दिया।

बता दें इसी साल जनवरी में भी मादा चीता कूनो नेशनल पार्क से भागी थी। वीरा कूनो से निकलकर रहवासी इलाके में पहुंच गई थी। लगभग 20 घंटे बाद वह वीरपुर क्षेत्र के सामान्य वनमंडल क्षेत्र में लौट आई थी। वीरा दक्षिण अफ्रीका से लाई गई चीतों की दूसरी खेप में भारत आई थी। दूसरी खेप में 12 चीतों को भारत लाया गया था। 20 दिसंबर 2023 को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद मादा चीता वीरा को बाड़े से निकालकर खुले जंगल में छोड़ा गया था। बता दें कि इस मादा चीता वीरा के साथ चीता लोकेशन ट्रैकर लगातार साथ घूम रहे है और यह ट्रैकर चीता के लगभग 1 किलोमीटर के दायरे में ही रहते हैं। लोकेशन ट्रैकर की सहायता से चीता की लोकेशन देखते रहते हैं इसके अलावा डॉक्टर्स की टीम साथ है और वन मंडल के कर्मचारी भी लगातार इनकी देखभाल कर रहे हैं।

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