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Hindi News मध्य प्रदेशमोबाइल पर गेम खेलने से मना किया, इकलौती बेटी ने उठाया ऐसा कदम; मां की दुनिया ही उजड़ गई  

मोबाइल पर गेम खेलने से मना किया, इकलौती बेटी ने उठाया ऐसा कदम; मां की दुनिया ही उजड़ गई  

जबलपुर में मोबाइल पर गेम खेल रही छात्रा को मां ने डाटा तो उसने फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। वह 14 साल की थी और 9वीं में पढ़ती थी। बताया जा रहा है कि छात्रा की मां मेडिकल कॉलेज में स्टाफ नर्स हैं।

मोबाइल पर गेम खेलने से मना किया, इकलौती बेटी ने उठाया ऐसा कदम; मां की दुनिया ही उजड़ गई  
Subodh Mishraलाइव हिन्दुस्तान,जबलपुरThu, 20 Jun 2024 08:56 PM
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मध्य प्रदेश में मासूम बच्चों के सुसाइड करने के मामला लगातार बढ़ रहा है। छोटी-छोटी बातों पर मासूम बच्चे आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं। पिछले दिनों इंदौर की एक नाबालिग लड़की ने ऐसा ही खौफनाक कदम उठाया था और अब जबलपुर में मोबाइल पर गेम खेल रही छात्रा को मां ने डाटा तो उसने फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। वह 14 साल की थी और 9वीं कक्षा में पढ़ती थी।

बताया जा रहा है कि छात्रा की मां मेडिकल कॉलेज में स्टाफ नर्स हैं। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को फंदे से उतारकर पंचनामा बनाया और लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया। बेटी के इस कदम से मां का रो रोकर बुरा हाल है।   

जबलपुर जिले के गढ़ा थाना क्षेत्र के गुप्ता नगर में गुरुवार को एक नाबालिग लड़की ने फंदे पर लटककर जान दे दी। पुलिस जांच में बताया जा रहा है कि बच्ची को उसकी मां ने मोबाइल पर गेम खेलने से मना कर डांट लगाई थी। 14 वर्षीय आरुषि अपनी मां की इकलौती बेटी थी। पिता का कोरोना काल में निधन हो गया था। बताया जा रहा है कि बच्ची की मां सुनंदा सिंह जबलपुर मेडिकल कॉलेज में स्टाफ नर्स हैं।

बच्ची की मां बुधवार रात 9 बजे नाइट ड्यूटी पर जा रही थीं। उन्होंने देखा कि आरुषि मोबाइल पर गेम खेल रही है। उन्होंने नाराजगी जताई और मोबाइल छीनते हुए पढ़ाई के लिए कहा। इसके बाद वह घर लॉक कर ड्यूटी पर चली गईं।

गुरुवार सुबह 10 बजे जब वह घर पहुंची और ताला खोला तो अंदर आरुषि फंदे पर लटकी थी। उनका शोर सुनकर आसपास के लोग भी आ गए। लोगों ने पुलिस को सूचना दी। सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने बताया कि बच्ची को फंदे से उतारकर मर्ग कायम किया गया है। लाश का पंचनामा बनाकर पोस्टमर्टम के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया है। मामले में पूछताछ की जा रही है।

सोशल मीडिया, पारिवारिक वजह और कॉम्पिटिशन भी कारण
 
उज्जैन के मनोचिकित्सक डॉक्टर नीत राज गौर बताते हैं कि आज कल के दौर में बच्चों  में सोशल मिडिया का बड़ा इफेक्ट पड़ता है। वह जो सोशल मिडिया पर देखते हैं उससे अपने जीवन की तुलना करने लगते हैं। डॉक्टर गौर ऐसी घटनाओं के पीछे पारवारिक वजह को भी कारण बताते हैं। परिवार में माता पिता के बीच किया चल रहा है, उससे भी बच्चे अवसाद में चले जाते हैं और डिप्रेशन का शिकार होने लगते हैं। पढ़ाई और दूसरों से तुलना भी इसकी एक वजह है। परिवार के लोग अन्य बच्चों से तुलना करते हैं कि वह तुमसे अच्छा है। यह भी एक कारण है जो बच्चो में इस प्रकार की विकृति को पैदा करता है। कॉम्पिटिशन भी एक बड़ी वजह है। आज कल के दौर में पढ़ाई को लेकर बड़ा कॉम्पिटिशन हो गया है, जिसको लेकर बच्चे दबाव में रहते हैं। इससे बचने के लिए पारवारिक माहौल अच्छा रहना चाहिए।

रिपोर्ट: विजेन्द्र यादव

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