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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट क्या 6 महिला जजों की सेवा समाप्त करने पर पुनर्विचार कर सकता है, SC ने पूछा

बेंच ने कहा कि यह अभी कोई लिखित आदेश पारित नहीं कर रही, लेकिन मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के वकील से कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के विचार से हाईकोर्ट को अवगत कराएं और उपयुक्त निर्देश प्राप्त करें।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट क्या 6 महिला जजों की सेवा समाप्त करने पर पुनर्विचार कर सकता है, SC ने पूछा
Praveen Sharmaनई दिल्ली। भाषाSat, 03 Feb 2024 09:52 AM
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को इस बारे में तीन हफ्तों के अंदर फैसला करने को कहा कि क्या यह छह महिला न्यायाधीशों के असंतोषजनक कामकाज को लेकर सेवाएं समाप्त करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार कर सकता है।

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस संजय करोल की बेंच एक स्वत: संज्ञान वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है। अपनी सेवाएं समाप्त किए जाने के खिलाफ छह पूर्व न्यायिक अधिकारियों में से तीन के सुप्रीम कोर्ट का रुख करने के बाद इस याचिका की पहल की गई थी।

बेंच ने कहा कि यह अभी कोई लिखित आदेश पारित नहीं कर रही, लेकिन मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के वकील से कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के विचार से हाईकोर्ट को अवगत कराएं और उपयुक्त निर्देश प्राप्त करें।

जस्टिस करोल ने वकील से कहा, ''हमारे इरादों से हाईकोर्ट को अवगत कराएं।''

जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि यदि हाईकोर्ट अपने फैसले पर पुनर्विचार करता है तो इस सुप्रीम कोर्ट इस विषय में कोई आदेश पारित नहीं करेगा।

विषय में अदालत की सहायता के लिए न्याय मित्र नियुक्त किए गए वरिष्ठ वकील गौरव अग्रवाल ने कहा कि हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति द्वारा इन पूर्व न्यायिक अधिकारियों के कामकाज के बारे में कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई है।

बेंच ने कहा कि वह फिलहाल कुछ नहीं कह रही है और वकील से सेवा समाप्त करने पर केवल पुनर्विचार करने के बारे में हाईकोर्ट को अपना विचार बताने के लिए कह रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी को छह महिला सिविल (दीवानी) न्यायाधीशों की सेवाएं समाप्त करने का संज्ञान लिया था और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

हाईकोर्ट की एक प्रशासनिक समिति और एक पूर्ण अदालत की बैठक में प्रोबेशन पीरियड के दौरान उनके प्रदर्शन को असंतोषजनक पाए जाने के बाद राज्य के कानून विभाग द्वारा जून 2023 में सेवा समाप्ति के आदेश पारित किए गए थे।

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