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Hindi News मध्य प्रदेशबदलाव की हवा या लाडली बहना का दबदबा; MP में जमीन पर क्या चल रहा? 

बदलाव की हवा या लाडली बहना का दबदबा; MP में जमीन पर क्या चल रहा? 

मध्य प्रदेश में 17 नवंबर को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होने जा रहा है। आखिर जमीन पर कौन से मुद्दे हावी हैं और शिवराज सिंह चौहान के लिए किस तरह की चुनौतियां हैं, आइए एक पड़ताल करते हैं।

बदलाव की हवा या लाडली बहना का दबदबा; MP में जमीन पर क्या चल रहा? 
Sudhir Jhaचेतन चौहान, हिन्दुस्तान टाइम्स,पन्ना, सागर, विदिशाMon, 13 Nov 2023 01:01 PM
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मध्य प्रदेश के रायसेन में किसानों के साथ अपनी कृषि सामग्री दुकान में बैठे बीरेन सिंह गौर कहते हैं, इस बार बदलाव होगा। वहीं, दो युवा किसान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अगुआई वाली भाजपा सरकार की ओर से लाडली बहना जैसी योजना की बात करते हैं, जिसमें हर महिला के खाते में प्रतिमाह 1250 रुपए जमा किए जाते हैं। गौर कहते हैं कि 'बदलाव' अहम मुद्दा है जो सरकारी दफ्तरों में बहुत अधिक भ्रष्टाचार, स्थानीय नेताओं में अहंकार और 2018 में जनादेश को दरकिनार कर सरकार बनाने की वजह से है। युवा किसान सुभाष शर्मा और राहुल शर्मा जो खुद को भाजपा कार्यकर्ता भी कहते हैं, गौर की बात को चुपचाप सुनते हैं।

बीजेपी के गढ़ विदिशा में व्यापारी और आरएसएस-बीजेपी के पुराने कार्यकर्ता विजय शाह कार्यकर्ताओं के मोहभंग के लिए पार्टी में बाहरी लोगों के बढ़ते प्रभाव को जिम्मेदार बताते हैं। वह दूसरी पार्टी से आए नेता को नगर पालिका अध्यक्ष बनाए जाने का उदाहरण देते हैं। अपनी हार्डवेयर दुकान में वह कहते हैं, 'अब बीजेपी कार्यकर्ताओं को चुनाव से ठीक पहले पन्ना प्रमुख बनाने के लिए ही याद करती है, नहीं तो उन्हें भुला दिया जाता है।' विदिशा की इस सीट पर भाजपा 1977 के बाद भाजपा को पहली बार 2018 में हार का सामना करना पड़ा। भाजपा के राज्य नेतृत्व के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए वह कई बार बदलाव शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहते हैं, 'इस बार पार्टी के लिए स्थिति और खराब है।'

विदिशा लोकसभा सीट जिसमें रायसेन जिला भी शामिल है, भाजपा के लिए देश में सबसे सुरक्षित सीटों में से एक है, जहां से प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, शिवराज सिंह चौहान और पूर्व विदेशमंत्री सुषमा स्वराज चुनाव जीत चुकी हैं। शिवराज सिंह चौहान ने यहां आजादी के बाद से विदिशा और जनसंघ के कनेक्शन को दिखाते हुए रोड शो का आयोजन किया। भगवा दल ने एक बार फिर यहां शिवराज सिंह चौहान के करीबी मनोज टंडन को उम्मीदवार बनाया है जो कांग्रेस के शशांक भार्गव से मुकाबले में 2018 में हार गए थे। 

शिवराज सिंह फैक्टर 
मध्य प्रदेश चुनाव में चार बार के मुख्यमंत्री और सबसे लंबे समय तक सरकार चलाने वाले शिवराज सिंह चौहान 17 नवंबर को होने जा रहे मतदान के लिए पार्टी ने सीएम पद का उम्मीदवार नहीं बनाया है। हालांकि, वह अब भी मध्य प्रदेश में बीजेपी के सबसे लोकप्रिय नेता हैं। वह भाजपा के चुनावी पोस्टरों में दिखने वाले करीब एक दर्जन नेताओं में से एक हैं। सागर जिले के सिमरिया गांव में किसान नन्हा भाई ठाकुर करते हैं, 'यदि बीजेपी जीतती है तो शिवराज सिंह चौाहन ही फिर मुख्यमंत्री बनेंगे। कोई दूसरा नहीं है।' वह यह भी कहते हैं कि 2020 में कांग्रेस में बगावत के बाद शिवराज ने कमान संभाली, लेकिन बढ़ते भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगा पाए।

उधर, इंदौर में डेयरी की दुकान चलाने वाले एक शख्स ने भरोसा जताया कि शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर मुख्यमंत्री बनेंगे। उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह ने जिस तरह प्रदेश में विकास किया वैसा कोई और नहीं कर पाया। वह यह भी कहते हैं कि शिवराज के जितना कोई दूसरा नेता लोकप्रिय नहीं है। इस चुनाव में शिवराज सिंह चौहान को 18 साल की एंटी इनकंबेंसी, स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार के लिए सरकार के खिलाफ नाराजगी और दलबदलुओं को अहमियत मिलने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री हर दिन 7-8 चुनावी रैलियां कर रहे हैं।

एक पूर्व आईएएस अधिकारी जो कभी शिवराज सिंह के करीबी थे और अडिशनल चीफ सेक्रेट्री पद से कुछ महीने पहले रिटायर हुए, घटती लोकप्रियता को लेकर कहते हैं कि लोग अब थक चुके हैं। वह यह भी कहते हैं कि उनकी लोकप्रियता अब नौकरशाहों में भी कम हो गई है। ऊपर जिक्र किए गए भाजपा नेता भी अधिकारी के विचार से सहमत हैं और कहते हैं कि यही वजह है कि शिवराज को इस बार मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया। 2008 के बाद पहली बार है जब चौहान ने पार्टी की ओर से आयोजित सभी चार जन आशीर्वाद यात्रा की अगुआई नहीं की।  पार्टी ने 7 सांसद समेत 3 केंद्रीय मंत्रियों को चुनाव में उतारकर मुख्यमंत्री पद के लिए दौड़ पैदा कर दी है। चौहान ने अक्टूबर में रैली के दौरान इशारा किया था वह मुख्यमंत्री की रेस में हैं, लेकिन उसके बाद से इस मुद्दे पर चुप हैं।

भोपाल के पत्रकार दिनेश गुप्ता कहते हैं कि शिवराज के खिलाफ गुस्सा इस बार 2018 से अधिक है और पीएम सबसे लोकप्रिय राष्ट्रीय नेता हैं। उन्होंने कहा, 'हमने शिवराज के खिलाफ कभी ऐसा गुस्सा नहीं देखा, 2008 चुनाव में भी नहीं, जब उनके खिलाफ मजबूत एंटी इनकंबेंसी थी। ऐसा प्रतीत होता है कि मध्य प्रदेश बीजेपी में जो कुछ भी गलत हुआ,  उसका खामियाजा शिवराज को भुगतना पड़ रहा है।'
  
शिवराज बनाम कमलनाथ
चुनावी मैदान में कई और मुद्दों के साथ मतदाता कमलनाथ की 15 और शिवराज के 45 महीनों की तुलना भी कर रहे हैं। कुछ वोटर कमलनाथ सरकार में खामियां गिनाते हैं। वह कहते हैं कि यह प्रभावी नहीं थी और भ्रष्टाचार हुआ। दूसरे कहते हैं कि मार्च 2020 में जब शिवराज ने सत्ता संभाली उसके बाद भी कोई बदलाव नहीं आया। खुद को बीजेपी का वोटर बताने वाले सागर बडटुमा गांव के किसान सचिन सिंह ठाकुर कहते हैं, 'कमलनाथ ने 100 यूनिट मुफ्त बिजली दी, वृद्धा अवस्था पेंशन को दोगुना कर दिया और 50 हजार रुपए तक के कृषि लोन माफ किए।' गांव के चौपाल पर उनके ही सामने बैठे रामपाल प्रजापति ने तुरंत यह कहा कि कमलनाथ सरकार में भ्रष्टाचार अधिक था। वह कहते हैं कि स्कूल टीचर बेटी के ट्रांसफर के लिए उन्हें पैसे देने पड़े। कुछ अन्य लोगों ने शिवराज सरकार की उपलब्धियों का जिक्र किया। खास तौर पर लाडली बहना योजना का जिक्र अधिकतर महिलाएं करती हैं।

पन्ना जिले के आदिवासी गांव मांकी में 70 साल की राम कली कमलनाथ सरकार को वृद्धा पेंशन में वृद्धि का श्रेय देती हैं और साथ में यह भी शिकायत करती हैं कि उन्हें लाडली बहना योजना का फायदा नहीं मिला है। वह कहती हैं, 'कम उम्र और स्वस्थ महिलाओं को 1250 रुपए मिल रहे हैं और मुझे केवल 600। क्या यह सही है।' हालांकि, चौपाल में बैठे गांव के कई लोगों ने सड़क और 5 साल पहले बिजली देने के लिए शिवराज सरकार की तारीफ की। 50 साल के धीर आदिवासी ने कहा, 'हमें जल जीवन मिशन के तहत नल से पानी मिल रहा है। हालांकि, यह पानी नियमित नहीं आता है।' बीदेपी नेता प्रचार के दौरान मतदाताओं से कहते हैं कि कमलनाथ ने 2018 में जीतने के बाद वादे नहीं निफाए और 2023 में जीतने पर भी ऐसा ही करेंगे। 

वहीं, कांग्रेस कमलनाथ की अगुआई में आक्रामक प्रचार अभियान में जुटी है और मतदाताओं को 'कमलनाथ का भरोसा' देते हुए कह रहा है कि उन्होंने 2018 में जीत के बाद अधिकतर वादे निभाए और 2023 में भी ऐसा ही करेंगे। कांग्रेस प्रवक्ता संदीप सबलोक ने कहा, 'किया है, करके दिखाएंगे। कमलनाथ ने दिखाया कि कांग्रेस जो कहती है वह करती है। हमारे चुनावी वादे इस बार गेमचेंजर हैं।' हालांकि, कांग्रेस के एक अन्य नेता ने भोपाल में कहा कि पार्टी सत्ता विरोधी लहर पर ज्यादा भरोसा कर रही है और जमीन पर प्रचार कुछ कमजोर है। 

स्थानीय मुद्दे
छह संभागों में बंटे मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार से लेकर किसानों की हालत तक कई मुद्दे हैं। ग्वालियर-चंबल (30 सीटें) क्षेत्र में जाति के मुद्दे अहम हैं। बुंदेलखंड (26 सीटें) में राजनीतिक विपक्षियों पर पुलिसिया कार्रवाई जैसे मुद्दे भी हावी हैं तो मालवा निमाड़ ( 66 सीटें) में सांप्रदायिक तनाव और हिंदुत्व की राजनीति प्रमुख दिख रही है। विंध्य (30 सीटें) और महाकौशल (38 सीटें ) में विकास की कमी और इन्फ्रास्ट्रक्चर का अभाव अहम मुद्दा है। 

(रंजन और श्रुति तोमर के इनपुट के साथ)