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Hindi News मध्य प्रदेशपंडित मिश्रा पर FIR की मांग को लेकर थाने पहुंचे पीठाधीश्वर, बोले- मेरी भावनाएं आहत हुईं

पंडित मिश्रा पर FIR की मांग को लेकर थाने पहुंचे पीठाधीश्वर, बोले- मेरी भावनाएं आहत हुईं

पंडित प्रदीप मिश्रा के दिए गए बयान पर विवाद शुरू हुआ तो गुरु सांदीपनि के वंशज ने पंडित मिश्रा से नाक रगड़ कर माफी मांगने और ऐसा नहीं करने पर उनके आश्रम में आने पर रोक लगाने की चेतावनी दी थी।

पंडित मिश्रा पर FIR की मांग को लेकर थाने पहुंचे पीठाधीश्वर, बोले- मेरी भावनाएं आहत हुईं
Sourabh Jainलाइव हिंदुस्तान,उज्जैनTue, 25 Jun 2024 08:42 PM
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प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा कथा के दौरान दिए गए बयानों को लेकर उनकी मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इस विवाद में अब उज्जैन के संत भी कूद गए हैं। उन्होंने पंडित मिश्रा को नाक रगड़ते हुए माफी मांगने की चेतावनी देते हुए पुलिस को शिकायती आवेदन दिया है, साथ ही FIR दर्ज करने की मांग भी की है।

मंगलवार को मौनी तीर्थ के पीठाधीश्वर और निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर सुमनानन्द गिरी महाराज ने पंडित मिश्रा द्वारा गोस्वामी तुलसीदास को 'गंवार' कहे जाने को लेकर उनके खिलाफ उज्जैन एसपी कलेक्टर और जीवाजीगंज थाने में शिकायती आवेदन देकर FIR दर्ज करने की मांग की है। इस मामले में एक दिन पहले सोमवार को सांदीपनि आश्रम के पंडित रूपम व्यास ने आश्रम में प्रवेश को लेकर प्रतिबंध की बात कही थी।

3 पुलिस थानों में शिकायती आवेदन 

इसी विवाद को लेकर उज्जैन के डॉ. सुमनानन्द गिरि जी महाराज ने मंगलवार को तीन जगह शिकायती आवेदन देकर पंडित मिश्रा पर FIR की मांग की है। अपने आवेदन में उन्होंने लिखा कि कुबेरेश्वरधाम के पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा दिए गए बयान से मेरी नितांत निजी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। अतः उनके विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध कर आवश्यक कार्रवाई करें। पंडित मिश्रा ने एक बयान के माध्यम से श्रीरामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास को 'गंवार' कहा है और इससे मैं अत्यंत व्यथित और अवसाद में हूं।

गंवार कहते वीडियो हुआ था वायरल 

बताया जा रहा है की कुबरेश्वर धाम के पंडित प्रदीप मिश्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। इसमें वह तुलसीदास जी को गंवार कहते नजर आ रहे हैं। वे कह रहे हैं कि 'हमको कुछ नहीं आता, हम तुलसीदास जी की तरह गंवार हैं। इस पर सुमनानन्द गिरि का कहना है कि मिश्रा जी अपने आपको गंवार मानें तो ठीक है। वहां तक बात समझ में आती है लेकिन महान संत तुलसीदास जी से अपनी तुलना करना उन्हें शोभा नहीं देता। गोस्वामी तुलसीदास जी मेरे परम आराध्य हैं और प्रदीप मिश्रा ने मेरी वैचारिक आस्था की हत्या की है। कृपया प्रदीप मिश्रा जी के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए, अन्यथा विवश होकर न्यायालय की शरण लेनी पड़ेगी।

इस बयान पर भी छिड़ा है विवाद 

प्रदीप मिश्रा ने अपने एक अन्य प्रवचन में कहा था- राधा के पति का नाम अनय घोष, उनकी सास का नाम जटिला और ननद का नाम कुटिला था। राधा जी का विवाह छाता में हुआ था। राधा जी बरसाना की नहीं, रावल की रहने वाली थीं। बरसाना में तो राधा जी के पिता की कचहरी थी, जहां वह साल भर में एक बार आती थीं।

पंडित रूपम व्यास ने कहा- प्रवेश पर प्रतिबंध भी लगा सकते हैं

सांदीपनि आश्रम के पुजारी और सांदीपनि जी की 202वीं पीढ़ी के सदस्य रूपम व्यास, पंडित प्रदीप मिश्रा के राधा रानी वाले बयान से बहुत नाराज है। व्यास ने कहा कि प्रेमानंद जी और संतो के पास जाकर पंडित मिश्रा को माफी मांगनी चाहिए। साथ ही प्रदीप मिश्रा को 84 कोस की परिक्रमा करनी चाहिए। शिव पुराण के नाम कई प्रकार के टोने टोटके बता रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि पंडित प्रदीप मिश्रा ने मथुरा जाकर प्रेमानंद महाराज से माफी नहीं मांगी तो वे अपने विद्वत परिषद से बात कर कोर्ट जाएंगे और सांदीपनि आश्रम में पंडित मिश्रा के प्रवेश पर प्रतिबंध भी लगा सकते हैं।

रूपम व्यास ने कहा- पंडित प्रदीप मिश्रा लोगों को बरगलाने का काम करते हैं। उन्हें न शास्त्रों का ज्ञान है, न वो जानते हैं, अपनी पुराण खुद ही लिखते हैं। मिट्टी के शिवलिंग का पूजन शाम को करने की सलाह देते हैं। कई ऑनलाइन पूजन करा दिए। व्यास पीठ से राधा रानी पर अर्नगल बातें बोलीं, कौन से शास्त्र में पढ़ लिया। इनको पता नहीं किस बात का व्यास पीठ का घमंड है। 

पुलिस बोली- जांच के बाद कार्रवाई करेंगे

पुलिस ने बताया कि उज्जैन मौनी तीर्थ आश्रम के सुमनानन्द महाराज ने एक शिकायती आवेदन कथावाचक पंडित मिश्रा के विरुद्ध दिया है जिसमें लिखा है कि पंडित मिश्रा ने राधा रानी और तुलसीदास के बारे में जो कहा है वह गलत है, मामले में जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।  

उज्जैन शहर को भगवान महाकाल और भगवान श्रीकृष्ण की नगरी कहा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन के गुरु सांदीपनि आश्रम में रहकर महर्षि सांदीपनि जी से शिक्षा ग्रहण की थी और 64 दिन में 64 कलाओं का ज्ञान अर्जित किया था। इस दौरान वे उज्जैन में ही रहे थे।

रिपोर्ट विजेन्द्र यादव
 

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