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Hindi News मध्य प्रदेश19 चुनावों जमानत जब्त, 20वीं बार मैदान में 'इंदौरी धरतीपकड़', MP की इस सीट से भरा पर्चा

19 चुनावों जमानत जब्त, 20वीं बार मैदान में 'इंदौरी धरतीपकड़', MP की इस सीट से भरा पर्चा

परमानंद तोलानी इंदौरी धरतीपकड़ के नाम से मशहूर हैं। पिछले 35 साल में 19 चुनाव लड़ चुके हैं। इन सभी चुनावों में तोलानी की जमानत जब्त हो चुकी है। परमानंद तोलानी फिर से चुनावी मैदान में हैं।

19 चुनावों जमानत जब्त, 20वीं बार मैदान में 'इंदौरी धरतीपकड़', MP की इस सीट से भरा पर्चा
Mohammad Azamभाषा,इंदौरThu, 18 Apr 2024 06:47 PM
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परमानंद तोलानी इंदौरी धरतीपकड़ के नाम से मशहूर हैं। पिछले 35 साल में 19 चुनाव लड़ चुके हैं। इन सभी चुनावों में तोलानी की जमानत जब्त हो चुकी है। आगामी लोकसभा चुनावों में परमानंद तोलानी एकबार फिर से चुनावी मैदान में हैं। ‘इंदौरी धरतीपकड़’ के नाम से पहचाने जाने वाले परमानंद तोलानी (63) ने इंदौर सीट पर 13 मई को होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए गुरुवार को पर्चा भरा है। इसके साथ ही वह एक बार फिर चुनावी दौड़ में शामिल हो गए। तोलानी पेशे से रीयल एस्टेट कारोबारी हैं। उन्होंने इंदौर लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया। उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि मैं 20वीं बार चुनाव लड़ने जा रहा हूं। गुजरे 35 साल के दौरान हुए अलग-अलग चुनावों में लगातार 19 बार मेरी जमानत जब्त हो चुकी है। आइये जानते हैं परमानंद तोलानी के बारे में विस्तार से।

तोलानी ने दावा किया कि वह आठ बार लोकसभा चुनाव और आठ बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं तथा तीन बार महापौर पद के लिए नगरीय निकाय चुनावों में भी किस्मत आजमा चुके हैं। उन्होंने बताया कि वह एक बार अपनी पत्नी लक्ष्मी तोलानी को भी नगर निकाय चुनाव में उतार चुके हैं क्योंकि तब महापौर का पद महिला उम्मीदवार के लिए आरक्षित कर दिया गया था।

63 साल के तोलानी ने कहा कि चुनावों में हर बार जमानत जब्त होने से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मुझे इंदौर के मतदाताओं पर पूरा भरोसा है। वे आज नहीं, तो कल मुझे चुनाव जरूर जिताएंगे। तोलानी के मुताबिक, वह चुनाव लड़ने की अपनी खानदानी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि शहर में एक प्रिंटिंग प्रेस चलाने वाले उनके पिता मेठाराम तोलानी ने अपने जीवनकाल में 30 साल तक लगातार अलग-अलग चुनाव लड़े थे। तोलानी ने बताया कि वर्ष 1988 में उनके पिता के निधन के बाद 1989 से उन्होंने खुद चुनाव लड़ना शुरू कर दिया था।

 

इनपुट: विजेंद्र यादव

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