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Hindi News मध्य प्रदेशMP में शराब फैक्ट्री से छुड़ाए गए बच्चों को गायब कर दिया गया, NCPCR अध्यक्ष का बड़ा आरोप

MP में शराब फैक्ट्री से छुड़ाए गए बच्चों को गायब कर दिया गया, NCPCR अध्यक्ष का बड़ा आरोप

एनसीपीसीआर ने शनिवार को मध्य प्रदेश के रायसेन में एक शराब फैक्ट्री पर छापा मारकर 39 बाल मजदूरों को छुड़ाया था। एनसीपीसीआर अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बचाए गए उन बच्चों को गायब कर दिया गया है।

MP में शराब फैक्ट्री से छुड़ाए गए बच्चों को गायब कर दिया गया, NCPCR अध्यक्ष का बड़ा आरोप
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Subodh Mishraएएनआई,भोपालSun, 16 Jun 2024 02:36 PM
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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने शनिवार को मध्य प्रदेश के रायसेन में एक शराब फैक्ट्री पर छापा मारकर 39 बाल मजदूरों को छुड़ाया था। हालांकि, एनसीपीसीआर अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बचाए गए बच्चों को गायब कर दिया गया है। बाल मजदूरों को छुड़ाने के बाद एनसीपीसीआर की टीम ने पाया था कि बच्चों के हाथों पर जलने के निशान थे। ऐसे निशान रसायनों के संपर्क में आने से होते हैं।

एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने बताया कि उन्हें बचपन बचाओ आंदोलन की ओर से शिकायत मिली थी कि शराब फैक्ट्री में बच्चों से काम लिया जाता है। उसके बाद उन्होंने और उनकी टीम ने मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के सेहतगंज स्थित सोम फैक्ट्री पर छापा मारा और बच्चों को बचाकर प्रशासन को सौंप दिया। कानूनगो ने बताया कि उन्हें शिकायत मिली थी कि बच्चों से फैक्ट्री में करीब 15-16 घंटे तक काम कराया जाता है।

घटना के सुर्खियों में आने के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने ऑफिशियल एक्स हैंडल पर कहा कि रायसेन जिले में एक फैक्ट्री पर छापे के दौरान बाल श्रम का मामला संज्ञान में आया है। यह मामला बेहद गंभीर है। इस संबंध में श्रम, उत्पाद शुल्क और पुलिस विभाग के अधिकारियों से विस्तृत जानकारी मांगी गई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि प्रियांक कानूनगो ने रविवार को आरोप लगाया है कि बचाए गए बाल श्रमिक  गायब हो गए हैं। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा कि शनिवार दोपहर को मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में एक छापे के दौरान उन्हें और उनकी टीम को  सोम डिस्टिलरी में शराब निर्माण के काम में लगे 39 लड़के और किशोर मिले, जो देर शाम से गायब हो गए हैं।

कानूनगो ने कहा कि शनिवाक दोपहर 1:30 बजे उन्हें बताया गया कि संबंधित अधिकारियों को वहां भेजा जा रहा है। एसडीएम 5 घंटे बाद पहुंचे, जबकि एडीएम 7 घंटे बाद पहुंचे। दोषियों ने इसका फायदा उठाया। बच्चों को कहां ले जाया गया, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। कानूनगो ने कहा कि इस संबंध में जमानती धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। ऐसे में बच्चों को जो 5-10 लाख रुपये दी जानी चाहिए, वह नहीं दिया जा सकता।

कानूनगो ने हालांकि कहा कि जिस तरह से आधी रात को मुख्यमंत्री ने इस मामले में एक अधिकारी को सस्पेंड किया और उसके खिलाफ कार्रवाई की, उससे बड़ा संदेश गया है। अधिकारी गायब हुए बच्चों की तलाश कर रहे हैं।