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Hindi News मध्य प्रदेशगुमनाम लेटर के जरिए व्यापम घोटाले में फिर कसा शिकंजा, दो डॉक्टरों को 4 साल की सजा; ऐसे हुआ था खुलासा

गुमनाम लेटर के जरिए व्यापम घोटाले में फिर कसा शिकंजा, दो डॉक्टरों को 4 साल की सजा; ऐसे हुआ था खुलासा

बहुचर्चित व्यापम घोटाले में ग्वालियर की विशेष अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। इस मामले में दो आरोपियों को चार-चार साल की कारावास और 13-13 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

गुमनाम लेटर के जरिए व्यापम घोटाले में फिर कसा शिकंजा, दो डॉक्टरों को 4 साल की सजा; ऐसे हुआ था खुलासा
Abhishek Mishraलाइव हिन्दुस्तान,ग्वालियरThu, 29 Feb 2024 03:01 PM
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मध्य प्रदेश प्री पीजी भर्ती परीक्षा में गड़बड़ियों के लिए बहुचर्चित व्यापम घोटाले में ग्वालियर की विशेष अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। इस मामले में दो आरोपियों को चार-चार साल की कारावास और 13-13 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सबसे रोचक बात ये है कि यह मामला एक गुमनाम पत्र के आधार पर उजागर हुआ था और हैंडराइटिंग की जांच में उसकी पुष्टि हुई।

यह मामला 2009 का है जब मेडिकल में एडमिशन को लेकर व्यापम घोटाले में नित नए खुलासे हो रहे थे। इसी दौरान मुरैना निवासी समाज सेवक मंगू सिंह के नाम से भेजा गया एक पत्र पुलिस और व्यापम जांच से जुड़े अफसरों को मिला। पत्र में लिखा था कि वर्ष 2009 में आयोजित मेडिकल की प्री पीजी परीक्षा के डॉक्टर  आशुतोष शर्मा के स्थान पर सॉल्वर ने परीक्षा दी थी और इस सॉल्वर का बंदोबस्त एक अन्य डॉ पंकज गुप्ता के माध्यम से कराया गया था।हालांकि पुलिस को पत्र लिखने वाला तो नही मिला लेकिन उसने शिकायत की जाँच शुरू कर दी।परीक्षा पास करने के बाद डॉ आशुतोष ने जीआर मेडिकल कॉलेज ग्वालियर में एडमिशन लिया। इस दौरान उंसके द्वारा लिखे गए आवेदन पत्र और ओएमआर सीट से मिलान करने पर राइटिंग भिन्न पाई गई।इसी के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज किया। 

विशेष लोक अभियोजक भारत भूषण शर्मा ने बताया कि 12 अप्रैल 2009 को जबलपुर में आयोजित प्री पीजी परीक्षा में डॉ आशुतोष के स्थान पर सॉल्वर ने परीक्षा दी थी। सॉल्वर का इंतजाम डॉ पंकज ने सुरेंद्र वर्मा के जरिये  किया था। इस काम के एवज में डॉ आशुतोष ने कुल 15 लाख रुपये दिए थे। इसमें से 30 हजार रुपये डॉ पंकज ने कमीशन के खुद रख लिए शेष रकम सुरेंद्र वर्मा को दे दी। लेकिन सुरेंद्र वर्मा के खिलाफ पुलिस साक्ष्य ही नही जुटा सकी जिसके चलते उंसके खिलाफ चालान ही पेश नही हो सका लेकिन डॉ आशुतोष और डॉ पंकज को विशेष न्यायालय सीबीआई  कोर्ट ने दोषी मानते हुए चार-चार साल की कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। सजा सुनाते समय आरोपी डॉ आशुतोष निवासी ग्वालियर कोर्ट में उपस्थित नही था जिसके कारण कोर्ट ने उनके खिलाफ केस दर्ज कर वारंट जारी किया है।

(रिपोर्ट: अमित गौर)

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