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Hindi News मध्य प्रदेशकूनो नेशनल पार्क में एक और चीते 'सूरज' की मौत, 4 दिन में 2 और अब तक 8 की गई जान

कूनो नेशनल पार्क में एक और चीते 'सूरज' की मौत, 4 दिन में 2 और अब तक 8 की गई जान

Cheetah Project of India: कूनो नेशनल पार्क में एक और चीते की मौत हो गई है। इसका नाम सूरज था। इस नर चीते को इसे साउथ अफ्रीका से लाया गया था। इसे 25 जून को बड़े बाड़े से जंगल में छोड़ा गया था।

कूनो नेशनल पार्क में एक और चीते 'सूरज' की मौत, 4 दिन में 2 और अब तक 8 की गई जान
Krishna Singhलाइव हिंदुस्तान,कूनोFri, 14 Jul 2023 04:12 PM
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कूनो नेशनल पार्क से एक फिर भी परेशान करने वाली खबर सामने आई है। कूनो नेशनल पार्क में एक और चीते की मौत हो गई है। बताया जाता है कि सूरज नाम के नर चीते की शुक्रवार को मौत हो गई। इसे साउथ अफ्रीका से लाया गया था। अब यह जंगल में मृत पाया गया है। इसे 25 जून को बड़े बाड़े से जंगल में छोड़ा गया था। इस खबर से पिछले सात सितंबर में जोर शोर से शुरू की गई चीतों को बसाने की परियोजना को तगड़ा झटका लगा है। इसके साथ ही मार्च से अब तक कूनो नेशनल पार्क में कुल आठ चीतों की मौत हो चुकी है। इसमें नामीबियाई चीता 'ज्वाला' से पैदा हुए तीन शावक भी शामिल हैं। 

अधिकारियों का कहना है कि अभी सूरज की मौत की वजहों का पता नहीं चल सका है। डॉक्टरों की एक टीम जांच में जुटी है। बताया जाता है कि जैसे ही नर चीते सूरज के मरने की खबर वन विभाग के अधिकारियों को लगी पूरे महकमे में हड़कंप मच गया। मृत नर चीता सूरज का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही स्पष्ट होगा कि चीते सूरज की मौत क्यों हुई। कूनो में लगातार हो रही चीतों की मौत के बारे में वन विभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। हर बार प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगते रहे हैं, जिसे नजरअंदाज कर दिया जाता है।

अभी बीते मंगलवार को ही कूनो में नर चीता तेजस की मौत हो गई थी। एक वन अधिकारी ने बताया कि तेजस की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि वह आंतरिक रूप से कमजोर हो गया था। मादा चीता के साथ हिंसक लड़ाई के बाद उबर नहीं पाया। नर चीते तेजस को इसी साल फरवरी में दक्षिण अफ्रीका से श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में लाया गया था। केएनपी में अब तक आठ चीतों की मौतों के बाद चीतों को संभालने के तौर तरीकों पर सवाल उठ रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों ने चीतों की देखभाल में अधिक अनुभवी पशु चिकित्सकों और अधिकारियों की मदद लेने का सुझाव दिया है।

देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के पूर्व डीन एवं वरिष्ठ प्रोफेसर वाईवी झाला का कहना है कि इस परियोजना में चीतें की मौत की आशंका थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि सभी मौतें सुरक्षित बाड़े में हुई हैं। आशंका यह जताई गई थी कि सुरक्षित बाड़े से निकलने के बाद चीतों की जान पर जोखिम पैदा हो सकता है। बीते दिनों हुई चीता तेजस की मौत आपसी लड़ाई का नतीजा थी। मादा चीता ने उस पर हमला किया और उसे मार डाला। चौंकाने वाली बात यह कि मादा चीता अभी शिकार करना सीख रही है। यह ऐसी घटना है, जिसके बारे में सारे अनुमान फेल हो गए। 

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