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छिंदवाड़ा में कांग्रेस के सामने BJP की तगड़ी चुनौती, क्या अपना गढ़ बचा पाएंगे कमलनाथ?

कमलनाथ को उनके ही गढ़ छिंदवाड़ा में भाजपा से कड़ी चुनौती मिल रही है। कमलनाथ के सामने भाजपा के विवेक बंटी साहू ताल ठोंक रहे हैं। क्या बन रहे समीकरण जानने के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट...

छिंदवाड़ा में कांग्रेस के सामने BJP की तगड़ी चुनौती, क्या अपना गढ़ बचा पाएंगे कमलनाथ?
Krishna Singhभाषा,छिंदवाड़ाTue, 14 Nov 2023 03:39 PM
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कमलनाथ कांग्रेस को फिर से सत्ता में लाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं लेकिन भाजपा की ओर से उन्हें उनके ही गढ़ छिंदवाड़ा में कड़ी चुनौती मिल रही है। छिंदवाड़ा में कमलनाथ के सामने भाजपा के विवेक बंटी साहू ताल ठोंक रहे हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में भी दोनों के बीच टक्कर हुई थी। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में कमलनाथ ने 25,837 मतों के अंतर से साहू को पराजित कर दिया था। इस बार साहू हार का बदला लेने की कोशिश में हैं। भाजपा ने अपनी पूरी संगठनात्मक मशीनरी साहूं के लिए उतार दी है। 

कोई कसर नहीं छोड़ रही भाजपा
चुनाव में कमलनाथ को हराने के लिए भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसकी पूरी संभावना है कि कमलनाथ कांग्रेस के जीतने की स्थिति में मुख्यमंत्री बनेंगे। छह महीने पहले भाजपा की जिला इकाई ने एक वाहन पर दूरबीन रखकर अभियान चलाया था। भाजपा ने कहा था कि वह कमलनाथ को ढूंढ़ रही है जो पिछला चुनाव जीतने के बाद छिंदवाड़ा से गायब हो गए हैं। इस अभियान से भाजपा ने साबित करने की चेष्टा की थी कि कमलनाथ जीत के बावजूद अपने निर्वाचन क्षेत्र के लिए काम नहीं कर रहे हैं।

क्या है चुनावी इतिहास?
कई लोग महसूस करते हैं कि भाजपा के इस कदम का लक्ष्य कमलनाथ को छिंदवाड़ा में ही सीमित रखने का है। दरअसल, छिंदवाड़ा में 1957 से अब तक के 16 चुनावों में भाजपा केवल तीन बार चुनाव जीत पाई है जबकि कांग्रेस 13 बार विजयी रही है। दोनों ही प्रत्याशी छिंदवाड़ा के मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए अपने धार्मिक रुझान के बारे में शेखी बघारते हैं। छिंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और दोनों ही निर्वाचन क्षेत्र इसी नाम से जाने जाते हैं।

भक्ति का शक्ति के लिए जमकर इस्तेमाल
साहू छिंदवाड़ा जिले में BJP के युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष हैं। कमलनाथ खुद को 'हनुमान भक्त' के रूप में पेश करते हैं जबकि साहू 'शिवभक्त' के रूप में जाने जाते हैं। कमलनाथ खुद को 'संकटमोचन' हनुमान का भक्त दिखाने का कोई मौका नहीं जाने दे रहे। उन्होंने छिंदवाड़ा में हनुमान की 102 फुट से अधिक ऊंची प्रतिमा लगवाई थी। इसी तरह भाजपा प्रत्याशी साहू भी भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा दिखाने में पीछे नहीं हैं। उन्होंने इस साल छिंदवाड़ा में भगवान शिव की 84 फुट ऊंची प्रतिमा लगवाई थी। 

बाबाओं का भी लगाया दरबार
साहू को अच्छी तरह मालूम है कि इस निर्वाचन क्षेत्र में किस जाति और धर्म के करीब-करीब कितने मतदाता हैं। वह कमलनाथ की तरह पूजा-अर्चना करने के बाद ही अपना चुनाव प्रचार अभियान शुरू करते हैं। चुनाव से पहले वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने बागेश्वर धाम के 27 वर्षीय उपदेशक धीरेंद्र शास्त्री की मेजबानी की थी। शास्त्री अकसर भारत को 'हिंदू राष्ट्र' घोषित करने की पैरवी करते रहे हैं। कमलनाथ ने पंडित प्रदीप मिश्रा की भी छिंदवाड़ा में मेजबानी की थी। मिश्रा खुले तौर पर हिंदू राष्ट्र की स्थापना की वकालत करते हैं।

भाजपा ने उतारी फौज
दिल्ली और भोपाल से भाजपा के चुनावी प्रबंधक अपने प्रत्याशी के पक्ष में लहर का रुख मोड़ने की कोशिश में छिंदवाड़ा में डेरा डाले हुए हैं। इतना ही नही, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गृह प्रदेश गुजरात की भी भाजपा टीम कमलनाथ को उनके ही निर्वाचन क्षेत्र से उखाड़ फेंकने के लिए यहां दिन-रात लगी है। लेकिन कांग्रेस नेता कमलनाथ ऐसी राजनीतिक ताकत रहे हैं जो 1980 से रिकॉर्ड नौ बार छिंदवाड़ा लोकसभा सीट जीत चुके हैं।

गुजरात की टीमें भी उतरीं
अहमदाबाद के उपमहापौर बिपिन रामस्वरूप की टीम के एक सदस्य ने बताया कि शुक्रवार को मतदान हो जाने के बाद ही यह टीम छिंदवाड़ा से जाएगी। भारतीय जनता युवा मोर्चा की गुजरात इकाई के नेता मोहित तेलवानी ने दीपावली की रात कहा कि हम यह सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात जुटे हैं कि इस बार भाजपा कमलनाथ का किला ढहा दे। वहीं कांग्रेस यह कहकर लोगों से वोट मांग रही है कि उनका वोट न केवल छिंदवाड़ा के उज्ज्वल भविष्य के लिए, बल्कि मध्य प्रदेश के लिए भी अहम है।  

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