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MP में 2 डिप्टी CM बने तो किसका पलड़ा भारी, रेस में आदिवासी महिला भी शामिल

MP CM Updates: कहा जा रहा है कि अगर भारतीय जनता पार्टी दो डिप्टी सीएम वाला फॉर्मूला अपनाती है, तो आदिवासी चेहरा और महिला होने के चलते मंडला विधायक संपतिया उइके भी दावेदार हो सकती हैं।

MP में 2 डिप्टी CM बने तो किसका पलड़ा भारी, रेस में आदिवासी महिला भी शामिल
Nisarg Dixitलाइव हिन्दुस्तान,भोपालMon, 11 Dec 2023 10:58 AM
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मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री कौन होगा? इस सवाल का जवाब सोमवार शाम तक मिलने की उम्मीद है। हालांकि, अब तक चेहरे पर स्थिति साफ नहीं हो सकी है, लेकिन 7 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले राज्य में उप मुख्यमंत्रियों के फॉर्मूले से भी इनकार नहीं किया जा सकता। अब अगर भारतीय जनता पार्टी राज्य में डिप्टी सीएम तैनात करती है, तो इनमें एक आदिवासी चेहरा भी हो सकता है।

जैसा कद वैसा पद
संभावनएं जताई जा रही हैं कि भाजपा विधानसभा चुनाव 2023 में मैदान में उतरे 7 बड़े नामों में से किसी एक को डिप्टी सीएम बना सकती है। इन नामों में कैलाश विजयवर्गीय, राकेश सिंह, प्रहलाद पटेल, रीति पाठक, नरेंद्र सिंह तोमर का नाम शामिल हो सकता है। दरअसल, केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते और सांसद गणेश सिंह को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा सीएम पद की रेस में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का नाम भी चर्चा में है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कहा जा रहा है कि पार्टी इन विजेताओं में से किसी एक को कद के हिसाब से पद दे सकती है। इसके अलावा दूसरे डिप्टी सीएम के तौर पर महिला विधायक या आदिवासी चेहरा चुना जा सकता है।

मंडला विधायक भी रेस में शामिल?
एमपी की मंडला सीट से इस बार संपतिया उइके ने जीत दर्ज की है। अब कहा जा रहा है कि अगर भाजपा दो डिप्टी सीएम वाला फॉर्मूला अपनाती है, तो आदिवासी चेहरा और महिला होने के चलते उइके भी दावेदार हो सकती हैं। हालांकि, उनके नाम को लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।

2013 में चुनाव लड़ने उतरी उइके को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन 2017 में अनिल माधव दवे के निधन के बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया था। इसके अलावा वह सरपंच और भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य भी रह चुकी हैं।

BJP के लिए आदिवासी चेहरा जरूरी क्यों
230 में से 163 सीटों पर भाजपा की बंपर जीत में आदिवासी वोटर्स का भी बड़ा योगदान नजर आता है। इस बार भाजपा ने आरक्षित 47 में से 24 सीटें अपने नाम की हैं। आंकड़े बताते हैं कि 2018 की तुलना में 2023 में भाजपा ने 8 सीटें ज्यादा जीती हैं। साथ ही कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनावों में भाजपा को इस वर्ग से खासी उम्मीदें हैं।

जानकारों का कहना है कि 2018 में भाजपा की हार की एक वजह आदिवासी वर्ग की नजरंदाजी भी थी। हालांकि, इस बार आदिवासी वोटर भाजपा के साथ नजर आए। अब लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले ही मिली जीत के बाद भाजपा को इस जनाधार को बरकरार रखना भी चुनौती है। पार्टी ने 2024 में राज्य की 29 सीटों पर जीत का लक्ष्य रखा है। 

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