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1 नवंबर, 2020|10:30|IST

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मध्य प्रदेश विधानसभा उपचुनाव के लिए प्रचार थमा, 28 सीटों पर 12 मंत्रियों सहित कुल 355 उम्मीदवार मैदान में

shivraj and kamalnath

मध्य प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों के लिए तीन नवंबर को होने वाले उपचुनाव के लिए रविवार शाम चुनाव प्रचार थम गया। इन 28 सीटों पर 12 मंत्रियों सहित कुल 355 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार हालांकि, इन सीटों पर मायावती के नेतृत्व वाली बसपा एवं कुछ अन्य छोटे राजनीतिक दलों के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं, लेकिन अधिकांश सीटों पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस एवं भाजपा के बीच ही होने की उम्मीद है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की दो-तीन सीटों पर भाजपा, कांग्रेस एवं बसपा के बीच त्रिकोंणीय मुकाबला हो सकता है।

मध्य प्रदेश के इतिहास में पहली बार इतनी ज्यादा विधानसभा सीटों पर एक साथ उपचुनाव हो रहे हैं। ये उपचुनाव तय करेंगे कि 10 नवबंर को इनके परिणाम आने के बाद कौन सी पार्टी प्रदेश में सत्ता में रहेगी - सत्तारूढ़ भाजपा या मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस। जिन 28 सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उनमें से 25 सीटें कांग्रेस विधायकों के इस्तीफा देकर भाजपा में आने से खाली हुई हैं, जबकि दो सीटें कांग्रेस के विधायकों के निधन से और एक सीट भाजपा विधायक के निधन से रिक्त है।

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प्रदेश विधानसभा की कुल 230 सीटों में से वर्तमान में भाजपा के 107 विधायक हैं, जबकि काग्रेस के 87, चार निर्दलीय, दो बसपा एवं एक सपा का विधायक है। बाकी 29 सीटें रिक्त हैं, जिनमें से दमोह विधानसभा को छोड़कर 28 सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। दमोह सीट पर उपचुनाव की तिथि घोषित होने के बाद कांग्रेस विधायक राहुल सिंह लोधी ने विधायकी एवं कांग्रेस से इस्तीफा दिया है और भाजपा में शामिल हुए हैं।

उपचुनाव के बाद सदन में विधायकों की संख्या वर्तमान 202 से बढ़कर 229 हो जाएगी। इसलिए भाजपा को बहुमत के 115 के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए इस उपचुनाव में मात्र आठ सीटों को जीतने की जरूरत है, जबकि कांग्रेस को पूरी 28 सीटें जीतनी होंगी। भाजपा ने उन सभी 25 लोगों को अपना प्रत्याशी बनाया है, जो कांग्रेस विधायकी पद से इस्तीफा देर भाजपा में शामिल हुए हैं। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन प्रदेश की सत्तारूढ़ भाजपा, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस एवं बसपा के आला नेताओं ने अपनी-अपनी पार्टी के लिए वोट मांगने के लिए आज और उग्र चुनाव प्रचार किया।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर एवं प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भाजपा प्रत्याशियों के लिए वोट मांगे, जबकि मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट एवं अन्य पार्टी नेताओं ने कांग्रेस के उम्मीदवारों को जिताने की लोगों से अपील की।

इस चुनाव प्रचार के दौरान मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने एक रैली में प्रदेश की मंत्री एवं भाजपा उम्मीदवार इमरती देवी को 'आइटम कहने के साथ-साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ 'माफिया और मिलावट खोर शब्दों का इस्तेमाल भी किया था। इस पर चुनाव आयोग ने प्रचार के दौरान आदर्श आचार संहिता का बार-बार उल्लंघन को लेकर कमलनाथ का 'स्टार प्रचारक का दर्जा शुक्रवार को रद्द भी किया था।

इस चुनाव प्रचार में 'टिकाऊ-बिकाऊ का मुद्दा छाये रहने के साथ-साथ किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा भी खूब उछाला गया। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के 22 विधायकों के त्यागपत्र देकर भाजपा में शामिल होने के कारण प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई थी, जिसके कारण कमलनाथ ने 20 मार्च को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। फिर 23 मार्च को शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार बनी।

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  • Web Title:MP By election 2020: Campaigning for Madhya Pradesh Assembly by-election ends 355 candidates including 12 ministers in 28 seats in fight