प्रशासन किसी डफर को ना भेजे, किस बात की सेलरी ले रहे, HC ने इंजीनियर को क्यों लगाई फटकार?

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने भोपाल से आए एग्जीक्यूटिव इंजीनियर की जमकर क्लास लगाई। सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल किया कि आपको विभाग से किस बात की तनख्वाह मिलती है? पढ़ें यह रिपोर्ट...

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प्रशासन किसी डफर को ना भेजे, किस बात की सेलरी ले रहे, HC ने इंजीनियर को क्यों लगाई फटकार?
Krishna Singh लाइव हिन्दुस्तान , ग्वालियर
Wed, 28 Feb 2024 5:02 PM

वर्षों पहले शहर के पेयजल स्तर को बढ़ाने के लिए स्वर्णरेखा नदी को पुनर्जीवित करने के प्रोजेक्ट में लापरवाही को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। अदालत ने भोपाल से आए एग्जीक्यूटिव इंजीनियर की जमकर क्लास लगाई। सुनवाई के दौरान इंजीनियर को डफर जैसे शब्द सुनने पड़े। अदालत ने यह भी सवाल किया कि आपको विभाग से किस बात की तनख्वाह मिलती है?

गौरतलब कि स्वर्णरेखा नदी को पुनर्जीवित करने के लिए कई प्रोजेक्ट चलाए गए। भारी भरकम रकम खर्च होने के बावजूद अब तक इस नदी का सही ढंग से प्रयोग नहीं हो पा रहा है। यह अभी भी नाले में तब्दील है। इसको लेकर हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच कई बार नगरीय प्रशासन को फटकार लगा चुकी है। स्वर्णरेखा पर चल रहे प्रोजेक्ट को लेकर एक बार फिर सुनवाई हुई।

लगभग 45 मिनट चली सुनवाई में अदालत ने नगरी प्रशासन विभाग भोपाल से आए एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को जमकर फटकार लगाई। एग्जीक्यूटिव इंजीनियर राकेश रावत प्रोजेक्ट को एक्सप्लेन करने के लिए आए थे। लेकिन वह सवालों के जवाब नहीं दे पाए। इसको लेकर जस्टिस रोहित आर्य ने नाराजगी व्यक्त की।

सुनवाई के दौरान जस्टिस आर्य ने कहा कि मिस्टर आप भोपाल से आए हो इसके लिए आपको टीए डीए भी मिला है। आप केवल टाइप किए हुए एफिडेविट को लेकर ही चले आए हो। इसके अंदर क्या लिखा है आपने इसे पढ़ने की जरूरत भी नहीं समझी। क्या आपको इसे पढ़ना नहीं चाहिए था। क्या आप अनपढ़ हैं। अपर आयुक्त विजय राज को हटाकर आपको आईओसी बनाया गया है।

जस्टिस आर्य ने कहा- मुझे लगता है किसी लायक समझा होगा तभी आपको आईओसी बनाया गया होगा, लेकिन आप भी पुराने अधिकारियों की तरह ही हैं। प्रोजेक्ट को समझा भी नहीं पा रहे हैं। भोपाल जाकर सब कुछ भूल गए हैं। आपको विभाग से किस बात की तनख्वाह मिलती है। बाबू गिरी या पोस्टमैन की तनख्वाह ले रहे हैं। सारा काम बाबू के आधार पर चल रहा है। फिर कोर्ट से डांट भी सुनते हो। प्रशासन को बोलिए कि किसी डफर को ना भेजे।

रिपोर्ट- अमित गौर

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