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Hindi News मध्य प्रदेशमजदूरी करके पढ़ाई, मां बेचती है अंडा; MP में विधायक बने 'गरीब' की गजब कहानी

मजदूरी करके पढ़ाई, मां बेचती है अंडा; MP में विधायक बने 'गरीब' की गजब कहानी

मध्य प्रदेश में चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे 230 विधायकों में 205 करोड़पति हैं। एक विधायक तो 223 करोड़ रुपए की संपत्ति का मालिक है। इस बीच झोपड़ी में रहने वाला शख्स भी विधायक बन गया है।

मजदूरी करके पढ़ाई, मां बेचती है अंडा; MP में विधायक बने 'गरीब' की गजब कहानी
Sudhir Jhaलाइव हिन्दुस्तान,भोपालThu, 07 Dec 2023 12:30 PM
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मध्य प्रदेश में चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे 230 विधायकों में 205 करोड़पति हैं। एक विधायक तो 223 करोड़ रुपए की संपत्ति का मालिक है, जबकि नवनिर्वाचित विधायकों की औसत संपत्ति 11.77 करोड़ रुपए है। अमीरों की इस 'रेस' में एक ऐसे गरीब ने भी जीत हासिल की है जो अब भी मिट्टी के घर में रहता है। पर्चा दाखिल करने के लिए उसने 300 किलोमीटर की दूरी बाइक से तय की, क्योंकि चार पहिए का किराया नहीं चुका सकता था। मजदूरी और टिफिन डिलिवरी करके पढ़ाई करने वाले कमलेश्वर डोडियार रतलाम जिले की सैलाना सीट से विधायक चुने गए हैं। 
 
33 साल के आदिवासी युवक कमलेश्वर ने अनुसूचित जानजाति के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा। वह भारतीय आदिवासी पार्टी (BAP) के टिकट पर चुनाव लड़ा। इस पार्टी का गठन इसी साल सितंबर में हुआ था। कमलेश्वर डोडियार ने दो दिग्गज नेताओं को मात दी। उनके सामने चुनाव लड़े कांग्रेस के हर्ष विजय गहलोत दूसरे स्थान पर रहे और कमलेश्वर से 4618 वोट से हार गए। भाजपा प्रत्याशी यहां तीसरे स्थान पर रहे। 

कमलेश्वर डोडियार एक बेहद गरीब परिवार से आते हैं। सैलाना के राधा कुआ गांव के रहने वाले दोदियार का घर अब भी कच्चा है जो बरसात में टपकता है। उनकी मां गांव में अंडे बेचती हैं। बेटे को पढ़ाने के लिए वह राजस्थान और गुजरात में मजदूरी भी कर चुकी हैं। खुद कमलेश्वर ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए बहुत संघर्ष किया है। बीए की डिग्री लेने के लिए कमलेश्वर ने खुद भी मजदूरी करके पैसे जुटाए। बाद में वह पढ़ाई के लिए दिल्ली गए। राजधानी में रहकर एलएलबी करने वाले कमलेश्वर ने वहां अपना खर्चा जुटाने को टिफिन डिलिवरी का काम किया। 

कमलेश्वर कहते हैं कि पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने उनकी बहुत मदद की, जिन्होंने भूखे पेट रहकर उनके लिए कैंपेन किया। पर्चा दाखिल करने के लिए बाइक पर जाने की बात के सवाल पर कह कते हैं कि उनके पास कोई कार नहीं या किराये पर लेने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे, इसलिए बाइक से ही गए। कमलेश्वर कहते हैं कि वह गरीबों और वंचितों के लिए काम करेंगे। 

समाज सेवा करके हुए लोकप्रिय
दिल्ली से पढ़ाई करके गांव लौटने के बाद कमलेश्वर काफी समय से समाज सेवा में जुटे थे। वह 2018 में भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े थे। हार का सामना करने के बाद भी उनका हौसला नहीं टूटा और वह 2019 में लोकसभा चुनाव में भी उतरे। यहां भी असफल रहने के बाद उन्होंने दूसरे प्रयास में विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करके सबको चौंका दिया। 

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