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Hindi News मध्य प्रदेशछिंदवाड़ा खोने के बाद अब अमरवाड़ा पर नजर, कमल नाथ ने लगाया आदिवासी चेहरे पर दांव 

छिंदवाड़ा खोने के बाद अब अमरवाड़ा पर नजर, कमल नाथ ने लगाया आदिवासी चेहरे पर दांव 

लोकसभा चुनाव में छिंदवाड़ा में अपना गढ़ खोने के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमल नाथ ने अमरवाड़ा विस सीट पर होने जा रहे उपचुनाव को लेकर एड़ी-चोटी की जोर लगा दी है। उन्होंने आदिवासी चेहरे पर दांव खेला है।

छिंदवाड़ा खोने के बाद अब अमरवाड़ा पर नजर, कमल नाथ ने लगाया आदिवासी चेहरे पर दांव 
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Subodh Mishraलाइव हिन्दुस्तान,छिंदवाड़ाFri, 21 Jun 2024 06:14 PM
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लोकसभा चुनाव में छिंदवाड़ा में अपना गढ़ बरकरार रखने में नाकाम रहने के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमल नाथ ने इस संसदीय सीट के अंतर्गत आने वाले अमरवाड़ा विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव को लेकर एड़ी-चोटी की जोर लगा दी है। 

कमल नाथ और उनके बेटे नकुल नाथ ने 10 जुलाई को होने जा रहे अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित अमरवाड़ा विधानसभा उपचुनाव में आदिवासी चेहरा धीरन शाह इनवाती पर दांव लगाया है। यह चुनाव इस मायने में काफी अहम है कि क्या कमल नाथ परिवार छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर हार के बाद वापसी करेगा। छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर कमल नाथ ने 1980 से सात बार प्रतिनिधित्व किया। उनके बेटे नकुल नाथ ने भी 2019 में यहां से जीत दर्ज की, लेकिन इस बार भाजपा के बंटी विवेक साहू से हार गए। 

इस साल फरवरी में कमल नाथ और नकुल नाथ के भाजपा में जाने की अफवाहों के बीच छिंदवाड़ा सहित आसपास के कई कांग्रेस नेता भाजपा में शामिल हो गए। नाथ खेमे को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब तीन बार के अमरवाड़ा विधायक कमलेश शाह भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में चले गए। अमरवाड़ा को शाह परिवार का गढ़ माना जाता है। शाह इस सीट से लगातार तीन बार विधायक चुने गए हैं। उनके परिवार के सदस्य पहले भी विधायक रह चुके हैं। वह एक मजबूत आदिवासी चेहरा माने जाते हैं। भाजपा ने कमलेश शाह को मैदान में उतारा है।

अपने पूर्व सहयोगी का मुकाबला करने के लिए कमल नाथ और कांग्रेस को एक आदिवासी चेहरे की तलाश थी। उन्हें इनवाती के रूप में एक योग्य व्यक्ति मिला, जो छिंदवाड़ा में एक लोकप्रिय आदिवासी हिंदू मंदिर आंचलकुंड धाम के प्रमुख सुखराम दादा के पुत्र हैं। द इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, सहकारी बैंक के पूर्व कर्मचारी इनवाती ने बताया कि अमरवाड़ा के लोगों ने कमलेश शाह पर बहुत भरोसा किया। वह अनुभवी थे और लोगों के लिए काम करते थे। लेकिन, अब उन्होंने लोगों के जनादेश के साथ विश्वासघात किया है। इसलिए यह चुनाव लड़ना मेरा धार्मिक कर्तव्य है।

कहा जाता है कि आंचलकुंड धाम की स्थापना करीब 200 साल पहले हुई थी। इस स्थान पर प्रमुख हिंदू त्योहार मनाए जाते हैं। नेताओं ने अपने अभियानों में आंचलकुंड धाम के सांस्कृतिक महत्व का उपयोग किया है। 1980 में अपनी पहली चुनावी यात्रा शुरू करने से पहले कमल नाथ ने इस स्थल का दौरा किया था।

पिछले साल विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आदिवासियों के पूजनीय स्थल आंचल कुंड दादा दरबार का दौरा किया था। उस समय भाजपा ने क्षेत्र के आदिवासी धार्मिक नेताओं के साथ भी बैठकें कीं, जिनके बारे में कहा जाता है कि उनका स्थानीय आबादी के बीच काफी प्रभाव है।

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) ने 27 वर्षीय देवीराम भलावी को उपचुनाव के लिए मैदान में उतारा है। जीजीपी ने 2003 में यह सीट जीती थी। तब से पार्टी यह सीट नहीं जीत पाई है, लेकिन इसने हर चुनाव को त्रिकोणीय मुकाबले में बदला है। 

भाजपा को कमलेश शाह की जीत का भरोसा है। भाजपा के एक पदाधिकारी ने कहा, "हमने सामाजिक संगठनों के साथ बैठकें करना शुरू कर दिया है। लोगों से घर-घर संपर्क कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गरीबों के लिए किए जा रहे कल्याण कार्यों के बारे में जानकारी दी जा रही है।"