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Hindi News मध्य प्रदेशइंदौर कोर्ट ने रेप और गर्भपात के आरोपी को किया रिहा, एक कॉन्ट्रैक्ट बना बड़ी वजह; क्या है मामला

इंदौर कोर्ट ने रेप और गर्भपात के आरोपी को किया रिहा, एक कॉन्ट्रैक्ट बना बड़ी वजह; क्या है मामला

इंदौर की एक कोर्ट ने 34 साल के एक व्यक्ति को 'लिव-इन' पार्टनर का रेप, जबरन गर्भपात और जान से मारने की धमकी देने के आरोपों से बरी कर दिया है। इसमें दोनों का कॉन्ट्रैक्ट बड़ी वजह बना।

इंदौर कोर्ट ने रेप और गर्भपात के आरोपी को किया रिहा, एक कॉन्ट्रैक्ट बना बड़ी वजह; क्या है मामला
Sneha Baluniभाषा,इंदौरWed, 08 May 2024 02:22 PM
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मध्य प्रदेश में इंदौर की जिला अदालत ने 34 साल के एक व्यक्ति को 'लिव-इन' पार्टनर का रेप, जबरन गर्भपात और जान से मारने की धमकी देने के आरोपों से बरी कर दिया है। अभियोजन पक्ष के एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। खास बात यह है कि दोषमुक्ति में एक कॉन्ट्रैक्ट विवाहित व्यक्ति का मददगार साबित हुआ जिसमें 29 साल की महिला ने इस बात पर सहमति जताई थी कि वह सात दिन उसके साथ और सात दिन अपनी पत्नी के साथ बारी-बारी से रहेगा।

अधिकारी ने बताया कि महिला ने इस व्यक्ति के खिलाफ शहर के भंवरकुआं पुलिस थाने में 27 जुलाई 2021 को केस दर्ज कराया था कि उसने शादी का झांसा देकर उसके साथ बार-बार बलात्कार किया, जबरन गोलियां खिलाकर उसका गर्भपात कराया और उसे जान से मारने की धमकी भी दी। अपर सत्र न्यायाधीश जयदीप सिंह ने तथ्यों और सबूतों पर गौर करने के बाद इस व्यक्ति को भारतीय दंड विधान की धारा 376 (दो) (एन) (महिला से बार-बार बलात्कार), धारा 313 (स्त्री की सहमति के बिना उसका गर्भपात कराना) और धारा 506 (धमकाना) के आरोपों से 25 अप्रैल को बरी कर दिया।

अदालत ने अपने फैसले में हाइलाइट किया कि केस दर्ज कराने वाली महिला ने इस व्यक्ति के साथ 15 जून 2021 को बाकायदा कॉन्ट्रैक्ट किया था जिसमें साफ लिखा गया था कि आरोपी पहले से शादीशुदा है और वह एक हफ्ते उसके साथ और एक हफ्ते अपनी पत्नी के साथ बारी-बारी से रहेगा। कॉन्ट्रैक्ट में यह भी लिखा गया था कि महिला और आरोपी व्यक्ति के बीच पिछले दो साल से प्रेम संबंध हैं।

अपर सत्र न्यायाधीश ने कहा कि इस अनुबंध से स्पष्ट है कि 'लिव-इन' संबंध (किसी जोड़े का बिना शादी के साथ रहना) में रहने के दौरान महिला और आरोपी ने आपसी सहमति से शारीरिक रिश्ते बनाए थे। शख्स पहले से शादीशुदा होने के कारण उसके साथ विवाह करने की स्थिति में नहीं था। अदालत ने व्यक्ति को आरोपों से बरी करते हुए कहा, ‘ऐसी स्थिति में इस व्यक्ति को बलात्कार और जबरन गर्भपात का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। जहां तक (शिकायतकर्ता महिला को) जान से मारने की धमकी दिए जाने का संबंध है, इस सिलसिले में रिकॉर्ड पर विश्वसनीय सबूत विद्यमान नहीं हैं।’ महिला के दर्ज कराए गए मामले में व्यक्ति को 15 अगस्त 2021 को गिरफ्तार किया गया था और दो मार्च 2022 को जमानत पर रिहा होने से पहले वह 200 दिन तक न्यायिक हिरासत के तहत जेल में रहा था।