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Hindi News मध्य प्रदेश28 हफ्ते का गर्भ हटाना चाह रही थी रेप पीड़िता, सिंगल बेंच का इनकार; डबल बेंच ने क्या सुनाया फैसला?

28 हफ्ते का गर्भ हटाना चाह रही थी रेप पीड़िता, सिंगल बेंच का इनकार; डबल बेंच ने क्या सुनाया फैसला?

वह नाबालिग है। दुष्कर्म की शिकार है। पेट में 28 महीने का गर्भ है। वह बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती है। जब हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने इजाजत नहीं दो तो वह अपनी गुहार लेकर मुख्य न्यायाधीश के पास पहुंची।

28 हफ्ते का गर्भ हटाना चाह रही थी रेप पीड़िता, सिंगल बेंच का इनकार; डबल बेंच ने क्या सुनाया फैसला?
Subodh Mishraलाइव हिन्दुस्तान,जबलपुरSat, 11 May 2024 05:37 PM
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भोपाल की एक 17 साल की नाबालिग किशोरी के साथ रेप हुआ था। इससे वह गर्भवती हो गई थी। लेकिन, रेप पीड़िता बच्चे को जन्म देने को तैयार नहीं थी। उसने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर कर गर्भपात कराने की अनुमति मांगी। हाई कोर्ट की एकलपीठ ने गर्भ की अवधि ज्यादा हो जाने के कारण युवती को गर्भपात की अनुमति देने से इनकार कर दिया। लड़की के पेट में पल रहा गर्भ 28 हफ्ते का हो चुका है। किशोरी को जब एकलपीठ से राहत नहीं मिली तो उसने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रिव्यु पिटीशन दायर कर गर्भपात की अनुमति मांगी।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच ने भोपाल की रेप पीड़ित नाबालिग किशोरी को 28 हफ्ते के गर्भ को गिराने की अनुमति दे दी। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली डबल बेंच ने अपने आदेश में लिखा है कि अगर लड़की खुद इस बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती तो ऐसी स्थिति में उसे गर्भपात की अनुमति दी जा सकती है। बेंच ने इसके लिए राज्य सरकार से उसे सुविधा मुहैया करवाने को भी कहा। दरअसल, भोपाल की 17 साल की नाबालिग किशोरी के साथ रेप हुआ था। इससे वह गर्भवती हो गई थी। वह बच्चे को जन्म देने के लिए तैयार नहीं थी। उसने याचिका दायर करके मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से गर्भपात कराने की अनुमति मांगी।
इस मामले पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रवि मलिमथ और जस्टिस विशाल मिश्रा की खंडपीठ ने कहा कि दुष्कर्म के बाद अगर लड़की बच्चे को जन्म देना नहीं चाहती तो उसके स्वास्थ्य और उसके भविष्य को देखते हुए ऐसी अनुमति दी जा सकती है।

इससे पूर्व में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की एकलपीठ ने गर्भ की अवधि ज्यादा हो जाने के कारण युवती को गर्भपात कराने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। किशोरी को जब एकलपीठ से राहत नहीं मिली तो उसने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रिव्यु पिटीशन दायर कर गर्भपात की अनुमति मांगी। रेप पीड़िता की ओर से एडवोकेट प्रियंका तिवारी ने अपनी दलील में कहा कि लड़की की उम्र अभी सिर्फ 17 साल है। ऐसी स्थिति में अगर वह बच्चे को जन्म देती है तो उसके जीवन के लिए ठीक नहीं है। वहीं बच्चे के जन्म के बाद परिस्थितियां और खराब हो जाएंगी। बच्चे का पालन पोषण कौन करेगा, इसलिए उसे गर्भपात की अनुमति दी जाए। सुनवाई के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमथ और न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की खंडपीठ ने रेप पीड़िता किशोरी को गर्भपात की अनुमति दे दी।