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किसी की हुई मौत तो कभी सड़क पर ही हुआ बच्चे का जन्म, MP में रास्ता बंद करने से कैद हुए दलित

आपको बता दें कि सिसोलर गांव छतरपुर मुख्यालय से लगभग 120 किलोमीटर दूर यूपी बॉर्डर से लगा हुआ गांव है। जिसकी जनसंख्या लगभग 1500 के आसपास है। जिसमें 1200 वोटर हैं। गांव में ज्यादातर दलित रहते हैं।

किसी की हुई मौत तो कभी सड़क पर ही हुआ बच्चे का जन्म, MP में रास्ता बंद करने से कैद हुए दलित
Nishant Nandanलाइव हिन्दुस्तान,छतरपुरThu, 30 Nov 2023 11:47 AM
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देश को आजाद हुए 76 वर्ष हो चुके हैं लेकिन मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड के कई जगहों पर दलितों की स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है। छतरपुर जिले के सिसोलर गांव में रहने वाले दलितों का आरोप है की उनपर आम रास्ते से निकलने पर रोक लगा दी गई है। यही वजह कि गांव में रहने वाले कुछ दबंगों ने सरकारी सड़क पर बड़े-बड़े फाटक लगा दिए हैं और रात में इन्हे पूरी तरह से बंद कर दिया जाता है। गांव में रहने वाले दलितों का आरोप है कि वह उनके घर के सामने से न निकलें इसलिए ऐसा किया गया है। फाटक खुलवाने के लिए गांव के दलित कई बार थानेदार एवं तहसीलदार को आवेदन दे चुके हैं लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ है।

सिसोलर गांव छतरपुर मुख्यालय से लगभग 120 किलोमीटर दूर यूपी बॉर्डर से लगा हुआ गांव है। जिसकी जनसंख्या लगभग 1500 के आसपास है। जिसमें 1200 वोटर हैं। गांव में ज्यादातर दलित रहते हैं। यह गांव लवकुशनगर अनुविभाग के अंर्तगत आता है। आम रास्ता बंद होने से हालत यह है कि अब तक किसी की जान जा चुकी है तो वही गांव की महिला अस्पताल तक ना पहुंच सकी और सड़क पर ही बच्चे को जन्म तक दे दिया। 

समय पर नहीं पहुंचे अस्पताल तो हो गई मौत

गांव में रहने राजेंद्र अहिरवार बताते हैं कि दो फरवरी को उनके चाचा को दिल का दौरा पड़ा था। हम लोगों ने बांदा जिला अस्पताल ले जाने के लिए एक प्राइवेट वाहन कर लिया था। चूंकि फाटक लगा होने के कारण हम समय पर चाचा जी को अस्पताल नहीं ले जाए पाए और उनकी मौत हो गई। घर से जहां गाड़ी खड़ी थी उसकी दूरी 500 मीटर थी फिर भी हम वहां नही पहुंच पाए क्योंकि गेट बंद था और गाड़ी नहीं आ पाई।

गांव में ही रहने वाले फूलचंद्र अहिरवार का कहना है कि जिस व्यक्ति की हार्ट अटैक से मौत हुई है वह उनके भाई थे। उनकी अचानक तबियत बिगड़ी और हम उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए प्राइवेट वाहन लेकर आए। लेकिन फाटक बंद था। गाड़ी दरवाजे तक नहीं आ सकी। काफी देर बाद उन्हें अस्पताल ले जाया जा सका। यहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर ने कहा कि अगर आधे घण्टे पहले आ जाते तो उन्हें शायद हम बचा पाते।

सड़क पर बेटी को दिया जन्म

गांव में रहने वाली 25 साल की दलित राजबाई अहिरवार का कहना है कि दो नवंबर की सुबह 9 बजे उसे प्रसव पीड़ा हुई थी। परिवार के लोगों ने अस्पताल जाने के लिए जननी एक्सप्रेस बुलाई लेकिन वह दरवाजे तक नही आ सकी। जिस वजह से गांव की सड़क पर ही मेरी बेटी का जन्म हो गया। फिलहाल राजबाई और उसकी बेटी गुड्डी दोनों स्वस्थ हैं लेकिन राजबाई चाहती है सड़क का फाटक खुले ताकि किसी और के साथ इस तरह की घटना न हो।

मामले में लवकुशनगर एसडीएम देवेंद्र चौधरी का कहना है, 'गांव में फाटक लगे हैं। इस बात की जानकारी है हमे। लेकिन दलितों को रास्ते से नहीं निकलने दिया जा रहा है इस बात की शिकायत नही आई है। काफी समय से ही उस गांव में फाटक लगे हुए हैं लेकिन गांव के लोग शिकायत कर रहे हैं तो फाटक हटवाए जाएंगे।' गांव के अंदर पहुंचने के लिए मुख्य रूप से दो ही रास्ते हैं। और इन दोनों आम रास्ते में लोहे के बड़े-बड़े फाटक लगे हुए हैं। जिन दबंगों ने यह फाटक लगवाए हैं वह जब चाहे उन्हे बंद कर देते हैं। दलितों का आरोप है कि फाटक लगे होने की वजह से उन्हें बहुत परेशानी उठानी पड़ रही है। इसको लेकर वह कई बार शिकायत भी कर चुके हैं।

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