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Hindi News मध्य प्रदेशकमलनाथ की BJP में एंट्री से विपक्षी खेमे में भगदड़ मचने का अंदेशा, डैमेज कंट्रोल में जुटी कांग्रेस

कमलनाथ की BJP में एंट्री से विपक्षी खेमे में भगदड़ मचने का अंदेशा, डैमेज कंट्रोल में जुटी कांग्रेस

कमलनाथ के भाजपा में जाने की अटकलों ने कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया है। मध्य प्रदेश के बड़े कांग्रेस नेता डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। ये नेता विधायकों से संपर्क साध रहे हैं। पढ़ें यह रिपोर्ट...

कमलनाथ की BJP में एंट्री से विपक्षी खेमे में भगदड़ मचने का अंदेशा, डैमेज कंट्रोल में जुटी कांग्रेस
Krishna Singhलाइव हिन्दुस्तान,भोपालSun, 18 Feb 2024 04:25 PM
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मध्य प्रदेश के कद्दावर कांग्रेस नेता कमलनाथ के भाजपा में जाने की अटकलों ने कांग्रेस को डैमेज कंट्रोल के मोड में ला दिया है। सूत्रों की मानें तो पार्टी नेता विधायकों से संपर्क साधने में जुट गए हैं। सबसे बड़ा खतरा यह कि लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले यह कहीं नेताओं के बड़े पलायन में ना तब्दील हो जाए। सूत्रों ने बताया कि मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रमुख जीतू पटवारी, विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार एवं अन्य शीर्ष नेता विधायकों से एक-एक करके बात कर रहे हैं। 

एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश के जो कांग्रेस नेता डैमेज कंट्रोल की कोशिशों में जुटे हैं, उनकी नजरें कमलनाथ और उनके बेटे एवं सांसद नकुलनाथ के करीबी माने जाने वाले विधायकों, पूर्व विधायकों और कांग्रेस पदाधिकारियों पर हैं। माना जा रहा है कि विधायकों के एक बड़े समूह के पाला बदलने से मध्य प्रदेश में कांग्रेस कमजोर होगी। यही नहीं यदि बड़ी संख्या में टूट होती है तो दल-बदलुओं को दल-बदल विरोधी कानून से भी बचाया जा सकेगा।

मौजूदा वक्त में चर्चा में जिन नेताओं के नाम हैं, उनमें पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, सुखदेव पांसे, विधायक सतीश सिंह सिकरवार, संजय उइके, नीलेश उइके, सोहन वाल्मिकी, विजय चौरे, कमलेश शाह और लखन घनगोरिया शामिल हैं। पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद सज्जन सिंह वर्मा ने कहा है कि कमलनाथ ने अभी तक भाजपा में शामिल होने का फैसला नहीं किया है, लेकिन इतना साफ है कि यदि वह कोई बड़ा कदम उठाते हैं तो वह अनुभवी नेता का अनुसरण करेंगे।

पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा का कहना है कि राजनीति में केवल तीन चीजें मायने रखती हैं - मान, सम्मान और स्वाभिमान... जब इन्हें ठेस पहुंचती है, तो एक नेता बड़े फैसले लेने के लिए बाध्य होता है। फिलहाल जो खबरें सामने आ रही हैं केवल अटकलें हैं। यदि एक कद्दावर नेता जिसने अपने जीवन के 40 साल कांग्रेस को समर्पित कर दिए हैं, उसे वह सम्मान नहीं मिलता जिसके वह हकदार है, तो वह बड़े फैसले लेने के लिए बाध्य है। हम चार दशकों से उनके अनुयायी हैं और उनका अनुसरण करते रहेंगे।

सज्जन सिंह वर्मा और पांसे उन विधायकों में से हैं जो इस समय कमलनाथ के साथ दिल्ली में हैं। यदि कमलनाथ भाजपा में जाते हैं तो कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका होगा। दरअसल, भाजपा पिछले लोकसभा चुनावों में अपने शानदार प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश कर रही है। वह ज्यादा ताकत के साथ चुनावी समर में उतरने की योजना पर काम कर रही है। गौर करने वाली बात यह कि अटकलों का कमलनाथ ने खंडन नहीं किया है। खबरों के मुताबिक, बीजेपी नेतृत्व कई हफ्तों से कमलनाथ के संपर्क में है।

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