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Hindi News मध्य प्रदेशमशहूर शायर बशीर बद्र को 46 साल बाद मिली PHD की डिग्री, देखते ही चहक उठे

मशहूर शायर बशीर बद्र को 46 साल बाद मिली PHD की डिग्री, देखते ही चहक उठे

मध्य प्रदेश के मशहूर शायर और पद्मश्री बशीर बद्र को उर्दू का वह शायर माना जाता है, जिसने कामयाबी की बुलंदियों को फतेह कर बहुत लम्बी दूरी तक लोगों की दिलों की धड़कनों को अपनी शायरी में उतारा है।...

मशहूर शायर बशीर बद्र को 46 साल बाद मिली PHD की डिग्री, देखते ही चहक उठे
पेबल टीम,भोपालWed, 06 Jan 2021 01:34 PM
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मध्य प्रदेश के मशहूर शायर और पद्मश्री बशीर बद्र को उर्दू का वह शायर माना जाता है, जिसने कामयाबी की बुलंदियों को फतेह कर बहुत लम्बी दूरी तक लोगों की दिलों की धड़कनों को अपनी शायरी में उतारा है। एक ऐसे शायर जिन्होंने अपनी शायरी 'कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से ये नए मिजाज का शहर है, जरा फ़ासले से मिला करो' से दुनिया को अपना दीवाना बना लिया। 

दरअसल, अपने अलहदा लहजे के लिए प्रसिद्ध बशीर बद्र काफी दिनों से अस्वस्थ हैं और वे अपनी स्मरण शक्ति खो चुके हैं। लेकिन कभी कुछ याद आने पर वे उसे दोहराने लगते हैं। उन्होंने अपनी पत्नी को बताया कि साल 1973 में उन्होंने आजादी के बाद की गजल का तनकीदी मुताला शीर्षक से अपनी थीसिस एएमयू में समिट की थी। पत्नी के काफी प्रयास के बाद, जब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) ने 46 साल बाद डाक से पीएचडी की यह डिग्री भेजी तो डिग्री देखने के बाद वे बच्चे की तरह चहक उठे और डिग्री को सीने से लगा लिया।

उनकी पत्नी राहत बद्र की मानें तो थीसिस समिट करने के बाद वे अध्यापन के क्षेत्र में चले गए। व्यस्तता के चलते उनका इस तरफ ध्यान नहीं गया। हालांकि, वर्ष 1975 में डिग्री वितरण समारोह आयोजित हुआ तो व्यस्तता के चलते से वह इस आयोजन में शामिल नहीं हो सके। बशीर बद्र की डिग्री का ख्याल जब उनकी पत्नी को आया तो उन्होंने कोशिश शुरू की। राहत बद्र ने कहा कि डिग्री को हासिल करने में उनकी काफी मदद एएमयू के पीआरओ राहत अबरार ने की। अब करीब दो-तीन साल की जद्दोजहद के बाद डिग्री मिल गई है।

गौरतलब है कि वर्ष 1969 में बशीर बद्र ने एएमयू से स्नातकोत्तर की उपाधि भी ली थी। शायर बशीर बद्र ने मेरठ कॉलेज के उर्दू विभाग में 12 अगस्त 1974 को बतौर लेक्चरर ज्वाइन कर लिया था। वे यहां वर्ष 1990 तक रहे। वर्ष 1974-1990 का दौर बशीर बद्र के लिए काफी अहम रहा। तब वे शायरी की दुनिया में नए मुक़ाम हासिल कर रहे थे।

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