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Hindi News मध्य प्रदेशपुनर्वास की मांग कर रही मेधा पाटकर का समर्थन, किसान नेता ने दी देश भर में प्रदर्शन की चेतावनी

पुनर्वास की मांग कर रही मेधा पाटकर का समर्थन, किसान नेता ने दी देश भर में प्रदर्शन की चेतावनी

गुजरात में नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित हुए लोगों के पुनर्वास की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर आंदोलन कर रही है। उन्हें कई राज्यों के लोगों ने समर्थन दिया है।

पुनर्वास की मांग कर रही मेधा पाटकर का समर्थन, किसान नेता ने दी देश भर में प्रदर्शन की चेतावनी
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Subodh Mishraपीटीआई,धारThu, 20 Jun 2024 04:20 PM
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गुजरात में नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित लोगों के पुनर्वास की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर आंदोलन कर रही है। उन्हें कई राज्यों के लोगों ने समर्थन दिया है। ये लोग गुजरात में नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित लोगों के पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।

विस्थापितों के पुनर्वास के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के कार्यान्वयन को लेकर नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर पिछले छह दिनों से जिला मुख्यालय से लगभग 125 किलोमीटर दूर चिखल्दा गांव की खेड़ा बस्ती में आंदोलन कर रहीं हैं।गुजरात में नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित लोगों के पुनर्वास की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर मध्य प्रदेश में आंदोलन कर रही है। उनके आंदोलन को कई राज्यों के लोगों और एक किसान संगठन ने समर्थन किया है।

पाटकर के आंदोलन का समर्थन करने के लिए ओडिशा के कार्यकर्ता प्रफुल्ल सामंतारा और महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के अन्य लोग और पूर्व विधायक और संयुक्त किसान मोर्चा के नेता डॉ सुनीलम बुधवार को खेड़ा बस्ती पहुंचे।

सुनीलम ने संवाददाताओं से कहा कि वे हम पाटकर को समर्थन देने और उनके साथ मुद्दों पर चर्चा करने के लिए यहां आए हैं। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि अगर पुनर्वास की मांगें जल्द ही पूरी नहीं की गईं तो वे पूरे देश में यह आंदोलन करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में मध्य प्रदेश के सरदार सरोवर परियोजना के विस्थापितों को आर्थिक मुआवजा देने का आदेश दिया था।

सुनीलम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुनर्वास पर दिए गए फैसलों को जल्द लागू किया जाना चाहिए। इसमें यह भी प्रावधान है कि मुख्यमंत्री (प्रभावित राज्यों के) मिलेंगे और स्थिति को समझेंगे। साथ ही यह भी देखेंगे कि जलाशयों को कितना भरने की जरूरत है। उन्होंने मांग की कि परियोजना से प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए राज्य और केंद्र सरकार जल्द ही लोगों के साथ बैठक आयोजित करें।