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Hindi News मध्य प्रदेश60 साल की साध्वी, 700 KM की दूरी, और मोटरसाइकिल से ही अयोध्या के लिए हो गईं रवाना

60 साल की साध्वी, 700 KM की दूरी, और मोटरसाइकिल से ही अयोध्या के लिए हो गईं रवाना

मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर से साध्वी शिरोमणि को अयोध्या में बन रहे श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने का निमंत्रण मिला है।

60 साल की साध्वी, 700 KM की दूरी, और मोटरसाइकिल से ही अयोध्या के लिए हो गईं रवाना
Aditi Sharmaलाइव हिन्दुस्तान,जबलपुरSat, 13 Jan 2024 05:10 PM
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अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाले राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए देश में गजब का उत्साह है। हर कोई इस पल का बेसब्री से इंतजार कर रहा है और अपने-अपने तरीके से खुशी मनाता नजर आ रहा है। इसी कड़ी में अब मध्य प्रदेश की एक साध्वी अयोध्या के इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निकल पड़ी हैं।  जबलपुर की साध्वी शिरोमणि संस्कारधानी से रवाना हुई हैं। हैरानी की बात तो यह है कि जबलपुर से अयोध्या तक का सफर वे ट्रेन, बस या किसी लग्जरी गाड़ी से नहीं बल्कि मोटरसाइकिल से कर रही हैं। इसके लिए उन्होंने एक मोटरसाइकिल को चुना और जबलपुर से नर्मदा जल लेकर अयोध्या के लिए निकल पड़ी हैं। 

करीब 650 से 700 किलोमीटर का सफर जबलपुर से शुरू करने वाली 60 साल की साध्वी शिरोमणि ने नर्मदा तट गौरीघाट पर विधि विधान से पूजाअर्चना की, इसके बाद मां नर्मदा का जल लेकर वे अयोध्या के लिए निकल पड़ीं हैं। साध्वी शिरोमणि इस यात्रा के दौरान रास्ते में पड़ने वाले विभिन्न तीर्थ स्थलों का भ्रमण करते हुए 20 जनवरी को पहुचेंगी। और सरयू नदी में मां नर्मदा का जल से पूजन कर श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होंगी।

मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर से साध्वी शिरोमणि को अयोध्या में बन रहे श्री राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। ऐसे में साध्वी रामलला के दर्शन करने अपनी एक शिष्या अंजलि के साथ इस यात्रा पर मोटर साइकिल से निकल पड़ीं हैं। इसके पहले उन्होंने जबलपुर के नर्मदा तट गौरीघाट में पूजा अर्चना की।  इस  दौरान बड़ी तादाद में शहर के साधु संतों और धर्म प्रेमी लोगों ने पहुंचकर 60 साल की उम्र में मोटरसाइकिल से यात्रा करने वाली साध्वी शिरोमणि के इस प्रयास की सराहना की और उनके सफल सफर की शुभकामनाएं दी।

 बताया जाता है की साध्वी को पहले जयश्री के नाम से जाना जाता था लेकिन साध्वी ऋतंभरा की प्रेरणा से उन्हें साध्वी शिरोमणि का नाम मिला है। इस दौरान उनका जीवन ही बदल गया और उन्होंने मोह माया त्याग कर वैराग्य ले लिया। इसके पहले भी वह कई यात्राएं बाइक है। उन्होंने कहा है कि नर्मदा दर्शन के दौरान जब वे मां नर्मदा को प्रणाम कर रही थीं तभी उन्हें मां का आदेश हुआ कि यहां का जल लेकर सरयू नदी में समर्पित किया जाए, इसी से प्रेरित होकर वे जबलपुर से अयोध्या की यात्रा कर रही हैं। अपने इस सफर के दौरान वे रास्ते में पड़ने वाले कई मठ, मंदिरों और धामों के भी दर्शन करेंगी।

60 साल की उम्र में जबलपुर से अयोध्या का सफर मोटरसाइकिल से तय करने वाली साध्वी शिरोमणि का कहना है कि केवल जल ही अविरल और निर्मल नहीं होना चाहिए बल्कि मनुष्य का मन और चित्त भी अविरल और निर्मल हो इसके लिए विशेष प्रयास होने चाहिए और इसी मकसद को लेकर वे अपनी इस यात्रा को शुरू कर रहीं हैं। जानकारी अनुसार 32 वर्षो तक वृंदावन में रही साध्वी बाद में वापस जबलपुर आ गई थी और गोरी घाट पर रहकर हिन्दू समाज को जाग्रत करने के कार्य में लगी हुई है।

रिपोर्ट विजेन्द्र यादव

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