10 महीने बाद जेल से निकली सोनम रघुवंशी, पिता ने भरी मुचलके की रकम; किन वजहों से जमानत
राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी 10 महीने बाद जेल से बाहर आ गई। इसकी सबसे बड़ी वजह बनी शिलांग पुलिस की लचर और सवालों के घेरे में आई जांच। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि पुलिस की कार्यवाही में गंभीर खामियां थीं।

राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी 10 महीने बाद जेल से बाहर आ गई। इसकी सबसे बड़ी वजह बनी शिलांग पुलिस की लचर और सवालों के घेरे में आई जांच। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि पुलिस की कार्यवाही में गंभीर खामियां थीं। कहीं धाराओं में गड़बड़ी तो कहीं गिरफ्तारी प्रक्रिया में लापरवाही।
बाहर आई पर पूरी तरह खामोश
जेल से बाहर निकलते वक्त सोनम बिल्कुल शांत और गुमसुम नजर आई। मीडिया के सवालों पर उसने एक शब्द तक नहीं कहा और सीधे अपने पिता के साथ वहां से चली गई। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि वही पिता, जिन्होंने पहले सोनम से नाता तोड़ लिया था, अब उसकी जमानत के लिए शिलांग पहुंचे। उन्होंने 50000 रुपए का मुचलका भरा और एक होटल संचालक को भी जमानती बनाया। जेल से बाहर आने के बाद सोनम उनके साथ अज्ञात स्थान पर चली गई।
केस पहले ही पड़ चुका था कमजोर
इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए कुछ आरोपियों के खिलाफ सबूत नहीं मिलने पर अदालत उन्हें बरी कर चुकी है। इससे केस की नींव पहले ही डगमगाने लगी थी और अब मुख्य आरोपी की जमानत ने इसे और कमजोर कर दिया है।
जमानत की बड़ी वजह
सोनम रघुवंशी की जमानत में एक अहम पहलू उसकी लंबी न्यायिक हिरासत भी रही। बचाव पक्ष ने अदालत के सामने दलील दी कि सोनम 9 जून 2025 से लगातार जेल में बंद है और 10 महीने से ज्यादा समय सलाखों के पीछे गुजार चुकी है, जबकि केस की सुनवाई बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रही है।
केवल 4 गवाहों के ही बयान दर्ज
वकील ने बताया कि 5 सितंबर 2025 को चार्जशीट दाखिल हुई थी और 28 अक्टूबर 2025 को आरोप तय किए गए, लेकिन इसके बाद भी मामले में खास प्रगति नहीं हुई। 90 गवाहों की सूची में अब तक केवल 4 गवाहों के ही बयान दर्ज हो सके हैं। आखिरी गवाह 3 फरवरी 2026 को पेश हुआ था, जिसके बाद से सुनवाई में कोई खास हलचल नहीं दिखी।
साक्ष्य पहले से ही कोर्ट की निगरानी में
वहीं, मेघालय पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए आशंका जताई कि आरोपी बाहर आने पर सबूतों से छेड़छाड़ कर सकती है या गवाहों को प्रभावित कर सकती है। इस पर बचाव पक्ष ने जवाब दिया कि ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिससे इन आशंकाओं को सही ठहराया जा सके। सभी साक्ष्य पहले से ही कोर्ट की निगरानी में हैं, इसलिए उनसे छेड़छाड़ की संभावना नहीं के बराबर है।
कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि सोनम इंदौर की स्थायी निवासी है और एक प्रतिष्ठित कारोबारी परिवार से जुड़ी है, जिसका व्यापार कई राज्यों में फैला हुआ है। उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, इसलिए फरार होने की आशंका भी नहीं बनती। साथ ही, महिला होने के आधार पर जमानत में नरमी बरतने का अनुरोध भी अदालत से किया गया।
अब भी जेल में बंद हैं ये आरोपी
• राज कुशवाह – सोनम का कथित प्रेमी, हत्या की साजिश और पूरी प्लानिंग का मुख्य किरदार
• विशाल चौहान – हमले में शामिल होने और फरार होने में मदद का आरोप
• आकाश राजपूत – घटना स्थल पर मौजूद रहकर हत्या में सहयोग का आरोप
• आनंद कुर्मी – शव ठिकाने लगाने में शामिल होने का आरोप
रिपोर्टः हेमंत
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
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