आप अदालत को यह निर्देश नहीं दे सकते कि उसे क्या करना चाहिए; भाजपा विधायक से जुड़े केस पर बोला सुप्रीम कोर्ट

Sourabh Jain भाषा, नई दिल्ली
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प्रधान न्यायाधीश ने एक मौके पर यह भी कहा कि याचिका राजनीतिक लाभ की चाह से प्रेरित प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि अगर कथित काम वास्तव में हुआ है, तो उचित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार इसका निपटारा किया जाना चाहिए।

आप अदालत को यह निर्देश नहीं दे सकते कि उसे क्या करना चाहिए; भाजपा विधायक से जुड़े केस पर बोला सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक 'व्हिसलब्लोअर' को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय का रुख करने की अनुमति दी ताकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक विधायक के खिलाफ जारी स्वतः संज्ञान आपराधिक अवमानना ​​कार्यवाही में सुनवाई का अनुरोध किया जा सके। विधायक पर उच्च न्यायालय के एक मौजूदा न्यायाधीश से संपर्क का प्रयास करने का आरोप है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता आशुतोष दीक्षित (जिनका प्रतिनिधित्व देवदत्त कामत कर रहे थे) को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दी और उन्हें लंबित अवमानना ​​कार्यवाही में सहायता के लिए उच्च न्यायालय का रुख करने की स्वतंत्रता प्रदान की।

विधायक पाठक पर है अवैध खनन का आरोप

यह मामला दीक्षित द्वारा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में दायर एक याचिका से जुड़ा है, जिसमें भाजपा विधायक संजय सत्येंद्र पाठक से कथित तौर पर जुड़ी तीन कंपनियों पर अवैध व अत्यधिक खनन का आरोप लगाया गया है।

उच्च न्यायालय के जस्टिस विशाल मिश्रा ने याचिका पर सुनवाई के दौरान यह कहते हुए स्वयं को मामले से अलग कर लिया था कि विधायक ने कथित तौर पर उनसे संपर्क करने का प्रयास किया था।

जज बोले- रिट याचिका पर सुनवाई का इच्छुक नहीं

जस्टिस मिश्रा ने मामले की सुनवाई से अलग होने के आदेश में कहा कि विधायक द्वारा चर्चा शुरू करने के कथित प्रयास के बाद वह 'रिट याचिका' पर सुनवाई करने के इच्छुक नहीं हैं। इसके बाद, दीक्षित ने विधायक के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध करते हुए एक नई याचिका दायर की।

उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने तीन अप्रैल को मामले पर संज्ञान लिया और दीक्षित की याचिका का निपटारा करते हुए स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना ​​कार्यवाही शुरू की।

हाई कोर्ट के आदेश को दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

हालांकि, दीक्षित ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए दलील दी कि उनकी याचिका का निपटारा मामले की जांच का अनुरोध सहित अतिरिक्त राहत पर विचार किए बिना किया गया था।

दीक्षित की ओर से पेश हुए कामत ने कहा कि एक मौजूदा विधायक द्वारा न्यायाधीश से संपर्क करने का कथित आचरण गंभीर कार्रवाई का पात्र है। उन्होंने यह चिंता जताई कि अगर विधायक माफी मांग लेते हैं तो अवमानना ​​की कार्यवाही कमजोर पड़ सकती है। हालांकि, पीठ ने पाया कि उच्च न्यायालय पहले ही इस मामले का संज्ञान ले चुका है।

राजनीतिक बयानबाजी को लेकर दी चेवातनी

प्रधान न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान न्यायालय में राजनीतिक बयानबाजी के खिलाफ चेतावनी देते हुए इस बात पर जोर दिया कि याचिकाकर्ता अदालतों को कार्यवाही करने का अधिकार नहीं दे सकते। उन्होंने कहा, 'राजनीतिक बयानबाजी न करें। हम इसे पसंद नहीं करते। आप अदालत को यह निर्देश नहीं दे सकते कि उसे क्या करना चाहिए।'

प्रधान न्यायाधीश ने एक मौके पर यह भी कहा कि याचिका राजनीतिक लाभ की चाह से प्रेरित प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि अगर कथित घटना वास्तव में हुई है, तो उचित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार इसका निपटारा किया जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'अगर किसी ने यह कृत्य किया है, तो उसे दंडित किया जाना चाहिए।'

Sourabh Jain

लेखक के बारे में

Sourabh Jain

सौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।


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सौरभ ने बैचलर ऑफ कॉमर्स की डिग्री लेने के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पोस्ट ग्रेजुएशन का कोर्स किया। इस क्षेत्र में साल 2009 से सक्रिय होने के बाद सौरभ ने पहले टीवी के क्षेत्र में अलग-अलग डेस्क पर कार्य अनुभव लिया, इस दौरान उन्होंने टिकर डेस्क से शुरुआत करने के बाद न्यूज डेस्क में कॉपी राइटिंग का अनुभव हासिल किया, इस दौरान क्षेत्रीय विषयों से लेकर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर खबरें लिखीं। इसके बाद उन्हें बॉलीवुड और हेल्प-लाइन डेस्क में भी काम करने का मौका मिला। हेल्प लाइन डेस्क में काम करने के दौरान उन्हें स्वास्थ्य, करियर और आम लोगों से जुड़े कई विषयों को जानने व समझने का मौका मिला।

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