कैसे संत हैं, सास जैसा मुंह फुला देते हैं; ‘लिपिस्टिक और मेकअप’ पर हर्षा रिछारिया क्या बोलीं

लाइव हिन्दुस्तान, उज्जैन
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महाकुंभ वायरल गर्ल हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद गिरि ने संतों और आश्रम व्यवस्था पर सवाल उठाने थे। अब विरोध होने पर उन्होंने कहा है कि ऐसे कैसे संत हैं, जो सास बन जाते हैं। हर बात पर मुंह फुला देते हैं।

मॉडल से साध्वी बनी हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद गिरि एक बार फिर चर्चा में हैं। गुरु पूर्णिमा पर उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में उन्होने कुछ संतों और आश्रम व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। कहा था कि कुछ संत चोरी-छिपे ब्यूटी पार्लर की सेवाएं लेते है ओर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं जताते हैं। जिससे उनकी कथनी और करनी पर सवाल खड़े होते हैं। उनके बयान पर संत समाज के एक वर्ग ने आपत्ति जताई थी। अब उनका नया बयान वायरल है। कहा है कि 2 महीने की बच्ची सुरक्षित नहीं तो मैं कैसे रह सकती हूं? यह कोन से संत है जो सास बन जाते हैं... छोटी बात पर मुंह फुला लेते है। में कही भी रहूं कहीं भी घुमूं बुरा लग जाता है।

मॉडल से साध्वी बनी हैं हर्षा रिछारिया

हर्षा रिछारिया गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु महामंडलेश्वर सुमनानंद का सम्मान करने पहुंची और अपने ऊपर हुई टिप्पणी पर अपनी बात रखी। बताया जा रहा है कि साध्वी हर्षानंद के संन्यास लेने के बाद कई संतों ने उन पर मेकअप करने, बाल रंगने और लिपिस्टिक लगाकर प्रवचन देने के आरोप लगाए थे जिस पर उन्होंने अपनी सफाई दी थी। बता दे कि साध्वी हर्षानंद गिरि ने 18 अप्रैल को उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में महामंडलेश्वर सुमनानंद से दीक्षा लेकर संन्यास ग्रहण किया था। दीक्षा के दौरान उन्होंने पिंडदान भी किया था। इसके बाद वे साध्वी के रूप में कई विभिन्न धार्मिक आयोजनों में व्यासपीठ से प्रवचन देती नजर आईं है।

मैनिक्योर-पेडिक्योर करा रहे हैं संत

इस दौरान उन पर कई आरोप भी लगाए गए जिस पर संन्यास लेने के बाद कई संतों ने उन पर मेकअप करने, बाल रंगने और लिपस्टिक लगाकर प्रवचन देने के आरोप लगाए थे। यह भी कहा था कि संन्यास लेने के बावजूद वे अपने माता-पिता के घर जाकर रहती हैं।“ वो कहती हैं कि जिन संतों को मैंने देखा है, वे पार्लर खुद आश्रम में बुला लेते हैं। मैनिक्योर-पेडिक्योर करा रहे हैं। मैं वो सब नहीं कराती हूं, मुझे लगता है कि जब तक मेरा खुद का कोई ठिकाना नहीं होगा, तब तक मेरे पास दो ही विकल्प होंगे या तो मैं गुरु जी के आश्रम में रहूं या तो अपने घर में अपने माता-पिता के साथ जहां मैं ज़्यादा सुरक्षित हूं। मुझे लगता है इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

जिन संतों ने टिप्पणी की है...

हर्षानंद ने कहा की जिन संतों ने टीका-टिप्पणी की है, उनके पास खुद के बड़े-बड़े आश्रम हैं। वे तो वहां रह सकते हैं। आज की डेट में कौन इतना पवित्र है? कौन संत, आप नाम बताएं जो मुझे 100% सिक्योरिटी के साथ अपने आश्रम में रखेंगे। कहें मेरी बेटी के समान है। मेरे जीवन पर्यंत इसे कुछ नहीं होगा'? वो गारंटी ले लें। मैं उनके आश्रम में अपना ठिकाना बना लूंगी।लेकिन मुझे अच्छा लगता है कि हम जहां पर लक्ष्मी जी को पूजते हैं, कृष्ण जी को, नारायण को पूजते हैं, जो इतने सुंदर तरीके से रहते हैं तो उनकी पूजा करने वाला या उनको मानने वाला, वो क्यों नहीं सुंदर रहने का अधिकारी है?"।

सोशल मीडिया पर बयान वायरल

हर्षा रिछारिया उर्फ साध्वी हर्षानंद गिरि ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर उन संतों पर निशाना साधा है जो उनके पहनावे, मेकअप और गृहस्थ जीवन को लेकर लगातार कमेंट्स कर रहे हैं। उन्होंने कहा जिस समाज में 2 महीने की बेटी सुरक्षित नहीं है। हर जगह से रेप, कितने-कितने अपराध होने की सूचना मिलती है, वहां पर मैं कहां रहूं? मुझे बताओ। मैं कहां सुरक्षित हूं? जो संत बोल रहे हैं कि मुझे परिवार के साथ नहीं रहना, वो संत मेरी सुरक्षा की 100% गारंटी ले लें। मैं उनके आश्रम चली जाऊंगी।

कैसे संत हैं...हर बात पर बुरा लग जाता है

साध्वी हर्षा रिछारिया उर्फ साध्वी हर्षानंद गिरि ने कहा कि संतों को कब से छोटी-छोटी बातों का बुरा लगने लगा। मुझे यह नहीं समझ में आता है। उनका गुस्सा पानी के बुलबुलों के समान होता है। संत में तो राग, द्वेष, ईर्ष्या कुछ नहीं होता। संतों में सिर्फ प्यार होता है। वे छोटी से छोटी बातों को हवा में उड़ा देते हैं।यह कौन से संत हैं, जिन्हें मेरी हर बात बुरी लग जाती है? मैं खाऊं,पहनूं, कहीं रहूं या किसी से मिलूं, कहीं घूमूं तो इन्हें बुरा लग जाता है।ये कौन से संत हैं जो संत से ज्यादा मेरी सास बन गए हैं, जो हर बात पर मुंह फुला लेते हैं।

हर्षा रिछारिया का यह बयान गुरुपूर्णिमा पर मीडिया के प्रश्न के जबाब के बाद देर शाम शुक्रवार सोशल मीडिया पर आया है। उन्होंने कहा कि संत में राग द्वेष ईर्ष्या कुछ नही होता पानी के बुलबुले समान होते है। संतो में सिर्फ प्रेम होता है वह बड़ी बड़ी बातें हवा में उड़ा देते है।

रिपोर्ट-विजेन्द्र यादव

Gaurav Kala

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