
30 साल पुरानी पाइपलाइन में दरारें, सीवेज मिले पानी में बैक्टीरिया और वायरस; इंदौर में मौतों की वजहें
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में 30 साल पुरानी पानी की पाइपलाइन में कई दरारें थीं। इस वजह से उसमें सेवीजे का गंदा पानी मिल रहा था। इससे लगभग 50000 लोगों को पानी सप्लाई किया जाता था। पानी के नमूने की जांच में कई बैक्टीरिया और वायरस के मौजूद होने की पुष्टि हुई है।
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में 30 साल पुरानी पानी की पाइपलाइन में कई दरारें थीं। इस वजह से उसमें सेवीजे का गंदा पानी मिल रहा था। इससे लगभग 50000 लोगों को पानी सप्लाई किया जाता था। पानी के नमूने की जांच में कई बैक्टीरिया और वायरस के मौजूद होने की पुष्टि हुई है।
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में पानी के परीक्षणों से पुष्टि हुई है कि इलाके के नल का पानी कई हानिकारक बैक्टीरिया से बुरी तरह दूषित था। अधिकारियों ने बताया कि पानी के नमूनों में ई. कोलाई, साल्मोनेला, विब्रियो कोलेरी के साथ-साथ वायरस, फंगस और प्रोटोजोआ की मौजूदगी पाई गई। इनके कारण संक्रमण हुआ, जिससे प्रभावित लोगों में कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया और सेप्सिस हो गया।
15 लोगों की मौत का दावा
लोगों का दावा है कि पिछले कुछ दिनों में भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण उल्टी-दस्त की बीमारी फैलने से 15 लोगों की मौत हो गई है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है और कहा है कि केवल 4 मौतें हुई हैं।
स्थानीय लोगों ने अधिकारियों पर कई महीनों से इलाके में बदबूदार पानी की बार-बार की शिकायतों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। केंद्र सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण के अनुसार, इंदौर को लगातार कई वर्षों से भारत के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में स्थान मिला है। इसमें 2024-25 के परिणाम भी शामिल हैं।
पीने के पानी में मानव मल मिल रहा था
जांच में पता चला कि प्रदूषण का एक स्रोत भागीरथपुरा पुलिस चौकी के शौचालय से रिसाव था, जिसमें सेप्टिक टैंक नहीं था। अधिकारियों ने 30 साल पुरानी पानी की पाइपलाइन में कई दरारें होने की भी सूचना दी, जिससे लगभग 50000 लोगों को आपूर्ति किए जाने वाले पीने के पानी में मानव मल मिल रहा था।
पानी के परीक्षण में देरी की आलोचना
डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने पानी के परीक्षण में देरी की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इस देरी के कारण ही संभवतः मौतें हुईं। संक्रमणों के उपचार के लिए रोगजनकों की शीघ्र पहचान जरूरी है। इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी माधव प्रसाद हसनी ने कहा कि वरिष्ठ डॉक्टर और जिला प्रशासन के अधिकारी प्रभावित मरीजों के उपचार पर नजर रख रहे हैं।





