सिस्टम फेल, इंसानियत पास: सतना में रामसज्जन मल्लाह ने स्कूल चलाने के लिए दे दिया आधा घर
यहां पिछले 16 सालों यानी कि 2010 से कोई सरकारी स्कूल भवन नहीं है। शहर के उचवा टोला निवासी मे 23 बच्चों का भविष्य एक गरीब रामसज्जन मल्लाह के निजी घर के एक छोटे से कमरे में संवर रहा है। हैरानी की बात यह है कि रामसज्जन ने इसके लिए आज तक सरकार से एक रुपया भी किराया नहीं लिया है।

मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार शिक्षा व्यवस्था को लेकर चाहे जितने भी बड़े-बड़े दावे कर ले,लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर उन दावों की पोल खोल देती है। मध्य प्रदेश के सतना जिले के उचवा टोला से एक ऐसी ही मार्मिक और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यहां पिछले 16 सालों यानी कि 2010 से कोई सरकारी स्कूल भवन नहीं है। शहर के उचवा टोला निवासी मे 23 बच्चों का भविष्य एक गरीब रामसज्जन मल्लाह के निजी घर के एक छोटे से कमरे में संवर रहा है। हैरानी की बात यह है कि रामसज्जन ने इसके लिए आज तक सरकार से एक रुपया भी किराया नहीं लिया है। सिस्टम की बेरुखी और एक आम आदमी के असाधारण जज्बे की यह कहानी हर किसी को सोचने पर मजबूर कर रही है।
आधा घर किया शिक्षा के नाम दान
दरअसल उचवा टोला निवासी रामसज्जन मल्लाह की आर्थिक स्थिति बहुत सामान्य है। उनके पास रहने के लिए मात्र दो छोटे कमरे का मकान है। इसमें एक कमरे मे रामसज्जन, उनकी पत्नी और तीन बेटे कुल 5 लोग गुजर-बसर करते हैं। दूसरे कमरे को उन्होंने शासकीय प्राथमिक शाला के संचालन के लिए दान दे रखा है। यहां कक्षा 1 से 5 तक के 23 छात्र इसी एक कमरे में बैठकर अपना भविष्य संवारते हैं। जब दोपहर में स्कूल की छुट्टी हो जाती है, तब जाकर रामसज्जन का परिवार उस कमरे का अपने निजी उपयोग के लिए इस्तेमाल कर पाता है।
बचपन के दर्द से मिली सीख
आखिर एक गरीब आदमी ने अपनी आधी छत क्यों दान कर दी? इसके पीछे रामसज्जन के बचपन का संघर्ष छिपा है। उन्होंने बताया, जब मैं छोटा था, तो पढ़ने के लिए मुझे यहां से 3 किलोमीटर दूर तिघरा प्राथमिक शाला तक पैदल जाना पड़ता था। बारिश और भीषण गर्मी में मुझे बहुत परेशानी होती थी। रामसज्जन ने उसी वक्त तय कर लिया था कि उनके गांव के वंचित समाज के बच्चों को यह कष्ट नहीं झेलना पड़ेगा। 2010 में जब स्कूल खोलने की बात आई और भवन नहीं था, तो उन्होंने बिना झिझक अपना एक कमरा स्कूल के हवाले कर दिया।
नेताओं के खोखले वादे
अपने गांव में एक पक्का स्कूल भवन बनवाने के लिए रामसज्जन ने किसी तपस्या से कम संघर्ष नहीं किया। 2010 से वे लगातार सांसद, विधायक और मंत्रियों को आवेदन देते रहे। वे तत्कालीन स्कूल शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनिस से मिलने भोपाल तक गए और वहां तीन दिन रुके। तत्कालीन मंत्री ने स्कूल ट्रांसफर का आदेश दिया और 2-4 महीने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा। उस समय के स्थानीय विधायक ने फीता काटकर स्कूल का उद्घाटन भी किया और दावा किया कि 2 महीने में पक्का स्कूल बन जाएगा।आज वह बात 14 साल पुरानी हो चुकी है, लेकिन स्कूल का भवन नसीब नहीं हुआ। रामसज्जन ने बताया मेरा बस एक ही सपना है कि मेरे जीते-जी इस स्कूल का पक्का भवन बन जाए।
बिना बिजली-पंखे के पढ़ रहे 23 नौनिहाल
स्कूल की प्रभारी प्रधानाध्यापक अनीता सिंह और शिक्षिका शैलजा गौतम और अनीता सिंह के कंधों पर इन 23 बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी है। प्रभारी प्रधानाध्यापक अनीता सिंह ने बताया की दूसरे के एक छोटे से कमरे में विद्यालय का संचालन हो रहा हैं। 23 बच्चों को एक ही कमरे में पढ़ाने में काफी समस्या होती है। गर्मी के मौसम में बच्चों का हाल बुरा हो जाता है क्योंकि यहां न तो पंखे हैं और न ही बिजली की व्यवस्था है।
भरे कार्यक्रम में कलेक्टर ने की सराहना
14 साल के लंबे वनवास के बाद अब जाकर प्रशासन की नींद टूटी है। हाल ही में जिला पंचायत सीईओ की टीम ने मौके का मुआयना किया और रामसज्जन के त्याग को देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए है।सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने इस मामले पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा रामसज्जन मल्लाह ने बच्चों के हित में जो किया है, वह सम्मान के योग्य है। प्रशासन ने उनका सम्मान किया है। खुशी की बात यह है कि स्कूल भवन अब सैंक्शन हो गया है। हमारी जिम्मेदारी है कि बच्चों को जल्द उनका अपना भवन मिले।स्थल चयन के लिए टीम गई थी। अगले 10 दिनों के भीतर स्कूल का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
16 साल बाद हकीकत में बदलेगा सपना
उम्मीद है कि जल्द ही उचवा टोला के बच्चों को अपना पक्का स्कूल मिलेगा और रामसज्जन मल्लाह का 16 साल पुराना सपना हकीकत में बदलेगा।
रिपोर्ट - जयदेव विश्वकर्मा
लेखक के बारे में
Mohammad Azamसंक्षिप्त विवरण
मोहम्मद आजम पिछले 3.5 सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में बतौर कंटेंट प्रोडूसर काम कर रहे हैं।
विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव: मोहम्मद आजम पिछले तीन सालों से ज्यादा समय से पत्रकारिता कर रहे हैं। कम समय में आजम ने पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया की बारीकियां सीखी हैं और अब भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्टेट न्यूज टीम में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
आजम ने ग्रेजुएशन तक विज्ञान की पढ़ाई की है, लेकिन राजनीतिक विषयों में रुचि उनको पत्रकारिता की तरफ खींच लाई। आजम ने अपना पोस्ट ग्रेजुएशन देश के अग्रणी संस्थानों में से एक भारतीय जनसंचार संस्थान से पूरा किया। विज्ञान बैकग्राउंड होने के चलते आजम को फैक्ट आधारित पत्रकारिता करने में महारत हासिल है।
राजनीतिक पत्रकारिता में आजम
आजम की देश की राजनीति में काफी रुचि है। आजादी के पहले से लेकर आजादी के बाद की राजनीतिक घटनाओं की कई किताबों का अध्ययन होने के चलते अच्छी समझ है। यही कारण रहा कि आजम ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत राजनीतिक बीट से की। राजनीति के साथ आजम क्राइम और सोशल मीडिया पर वायरल चल रही खबरों में भी अच्छी महारत हासिल है।
पत्रकारिता का उद्देश्य
आजम का मानना है कि पत्रकारिता जनपक्षीय होनी चाहिए। पत्रकारिता के दौरान अपनी भावनाओं को काबू में रखकर तथ्य आधारित पत्रकारिता आजम को जिम्मेदार बनाती है। पत्रकारिता में आजम तथ्य आधारित सूचनाएं पहुंचाने के साथ ही, साहित्यिक लेखन में भी महारत हासिल है।
विशेषज्ञता ( Area of Expertise )
पॉलिटिकल और क्राइम की खबरें
राजनीति से जुड़े लोगों के इंटरव्यू
क्राइम और वायरल खबरें
पॉलिटिकल एक्सप्लेनर



