राम मंदिर चंदा चोरी का जिक्र कर दिग्विजय सिंह ने क्यों अचानक लिया ज्ञानेश कुमार का नाम
अयोध्या में राम मंदिर में कथित तौर पर हुए चंदा चोरी का मामले पर राजनीति तेज हो गई है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अचानक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साध दिया है।

अयोध्या के राम मंदिर में चंदा और दान की कथित चोरी के मामले को लेकर विपक्ष हमलावर है। चंपत राय समेत ट्रस्ट से जुड़े कई पदाधिकारियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम भी उछालने की कोशिश की है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस ट्रस्ट में सदस्य होने पर हैरानी जताई।
मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम और दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने भोपाल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राम मंदिर में कथित चंदा चोरी को लेकर पत्रकारों के सवालों के जवाब में ज्ञानेश कुमार का नाम लिया। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, 'राम मंदिर के मामले में हम सब लोग जिन्होंने चंदा दिया है, वे आश्चर्यचकित हैं कि किस प्रकार का भ्रष्टाचार वहां चला हुआ है। वहां यह भी देख रहे हैं हम लोग कि उस ट्रस्ट में ज्ञानेश कुमार भी सदस्य हैं, जो चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं वो अब भी ट्रस्ट के सदस्य हैं यह भी अजीब बात है।'
गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पिछले कई महीनों से विपक्षी पार्टियों के निशाने पर हैं। खासकर एसआईआर जैसे मुद्दों को लेकर विपक्षी नेता उन पर सरकार को फायदा पहुंचाने का आरोप लगा रहे हैं। अब दिग्विजय सिंह ने अचानक ट्रस्ट के सदस्य होने के नेता ज्ञानेश कुमार का नाम लेकर सबको चौंका दिया है।
एसआईटी कर रही है जांच
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बुधवार को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और प्रशासक गोपाल राव से पूछताछ की है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि जांच टीम ने दान राशि की गिनती करने और ट्रस्ट का रिकॉर्ड रखने वाले लोगों से भी पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, राय और राव दोनों से दान की राशि, मंदिर के अंदर की व्यवस्थाओं और उससे जुड़े लोगों के बारे में पूछताछ की गई।
कैसे सामने आया मामला
उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दान राशि की चोरी और वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों की जांच के लिए ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। सरकार के अनुसार, ट्रस्ट ने तथ्यों का पता लगाने और राम मंदिर की छवि खराब करने के प्रयासों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। मामला सात जून को सामने आया था, जब अखिलेश यादव ने खबरों का हवाला देते हुए दावा किया था कि राम मंदिर को दान के रूप में मिले करोड़ों रुपये गायब हैं। उन्होंने अदालत से इस मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया था।
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Sudhir Jhaसुधीर झा | वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम लीड
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