अब भोजशाला में नहीं होगी नमाज; हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने बताई कोर्ट के फैसले की सभी प्रमुख बातें
हिंदू पक्ष के वकील जैन ने बताया कि कोर्ट ने सरकार से मुस्लिम पक्ष को कोई दूसरी जमीन देने पर विचार करने को कहा है। कोर्ट ने हमें पूजा-पाठ करने का अधिकार दिया है और सरकार को इस जगह के इंतजाम की देखरेख करने का निर्देश दिया है।

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला शुक्रवार को आ गया। अपने फैसले में उच्च न्यायालय ने इस पूरे परिसर को वाग्देवी सरस्वती से जुड़ा उनका मंदिर माना है। हाई कोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने यह निर्णय सुनाया। उधर इस बारे में जानकारी देते हुए हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने इसे राम मंदिर के बाद उसी तरह का दूसरा ऐतिहासिक फैसला बताया। उन्होंने कहा कि अपने आदेश में कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 23 साल पुराने आदेश को आंशिक रूप से रद्द कर दिया, जिसके बाद अब भोजशाला परिसर में हर शुक्रवार को होने वाली नमाज नहीं होगी और सिर्फ हिंदू धर्म के लोग ही वहां पूजा पाठ कर सकेंगे। इसके साथ ही जैन ने बताया कि कोर्ट ने सरकार को यहां के मैनेजमेंट की व्यवस्था करने और लंदन के म्यूजियम में रखी देवी सरस्वती की प्रतिमा को भी वहां से लाने के लिए कोशिशें करने के लिए कहा है।
कोर्ट के आदेश की जानकारी देते हुए वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया, 'भोजशाला के केस में माननीय इंदौर उच्च न्यायालय का बहुत ही ऐतिहासिक फैसला आया है। जिसमें इंदौर हाई कोर्ट ने ASI के 7 अप्रैल 2003 के दिए आदेश को आंशिक रूप से रद्द कर दिया है और हिंदू समाज के लोगों को पूजा-पाठ करने का अधिकार दे दिया है। साथ ही कोर्ट ने भोजशाला स्मारक को राजा भोज का बनवाया हुआ देवी सरस्वती का स्कूल माना है।'
'मुस्लिम पक्ष चाहे तो मांग सकता है वैकल्पिक जमीन'
जैन ने आगे कहा कि ‘इसके साथ ही कोर्ट ने देवी सरस्वती की मूर्ति को लंदन के म्यूजियम से वापस लाने की जो हमारी मांग थी, उसे भी मानते हुए केंद्र सरकार से इस बारे में प्रयास करने के लिए कहा है। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी जिले में मस्जिद बनाने के लिए सरकार को जमीन आवंटन की अर्जी दे सकती है, साथ ही इस तरह की अर्जी मिलने पर राज्य सरकार से उस पर कानूनी प्रावधानों के तहत विचार करने को कहा।'
हर शुक्रवार को होने वाली नमाज के आदेश को रद्द किया
हिंदू पक्ष के वकील ने कहा कि 'कोर्ट ने हमें यहां पूजा-पाठ का अधिकार दिया है, साथ ही सरकार से कहा है कि वह यहां के मैनेजमेंट की व्यवस्था करे। साथ ही कोर्ट ने अप्रैल 2003 का ASI का जो आदेश है, जो कि मुस्लिम पक्ष को भोजशाला में हर शुक्रवार को नमाज का आदेश देता है, उसे भी कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया है। जिसके बाद अब वहां पर सिर्फ पूजा होगी, क्योंकि कोर्ट ने उस पूरे परिसर के स्वरूप को हिंदू मंदिर सरस्वती मंदिर का स्वरूप माना है।'
'भोजशाला में अब नहीं होगी नमाज'
जैन ने आगे कहा कि 'आज यहां नमाज का आखिरी दिन था, क्योंकि अब कोर्ट का आदेश आ गया है। कोर्ट ने यह आदेश पूरे भोजशाला परिसर के लिए दिया है। साथ ही कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष रखने वाले कमाल मौला कमालुद्दीन को कहा है कि वह वैकल्पिक जमीन के लिए सरकार को आवेदन दे सकते हैं, साथ ही इस तरह का आवेदन मिलने पर सरकार से विचार करने के लिए कहा है। मूल बात यह है कि इस पूरे परिसर को लेकर कोर्ट ने जो हमारी मांग थी, उसके अनुसार इस पूरे परिसर को हिंदू मंदिर माना है।'
लेखक के बारे में
Sourabh Jainसौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।
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