
इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले में NHRC ने लिया स्वतः संज्ञान, दो हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को इंदौर में दूषित पानी के मुद्दे पर स्थिति की समीक्षा करने और राहत उपायों में तालमेल बिठाने के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक की। उन्होंने लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के भी निर्देश दिए।
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई कई लोगों की मौत और 1,400 से ज्यादा लोगों के प्रभावित होने के बाद अब इस मामले का संज्ञान राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने भी ले लिया है। इस मामले में मानवाधिकार संस्था ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो हफ़्ते के अंदर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस बारे में एक बयान जारी करते हुए NHRC ने कहा कि, 'प्रभावित इलाके के लोग पिछले कई वक्त से दूषित पानी सप्लाई होने की शिकायत कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।'
पाइपलाइन में लीकेज से पानी हुआ था दूषित
उधर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने गुरुवार को संवाददाताओं को बताया कि भागीरथपुरा क्षेत्र में पाइपलाइन में लीकेज के कारण पेयजल दूषित हुआ था। उन्होंने कहा कि शहर के एक चिकित्सा महाविद्यालय की प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है।
अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास पेयजल आपूर्ति की मुख्य पाइपलाइन में उस जगह लीकेज मिला, जिसके ऊपर एक शौचालय बना हुआ है। अधिकारियों का दावा है कि इस लीकेज के कारण ही पेयजल दूषित हुआ।
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि गुरुवार को भागीरथपुरा में 1,714 घरों के सर्वेक्षण के दौरान 8,571 लोगों की जांच की गई। अधिकारी के मुताबिक, इनमें से 338 लोगों में उल्टी-दस्त के हल्के लक्षण मिलने पर उन्हें उनके घरों में प्राथमिक उपचार दिया गया।
सीएम ने अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के साथ की बैठक
इससे पहले, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को इंदौर के दूषित पानी के मुद्दे पर स्थिति की समीक्षा करने और राहत उपायों में तालमेल बिठाने के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक की। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे, शहरी विकास और आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव, संभागीय आयुक्त सुदाम खाड़े, जिला कलेक्टर शिवम वर्मा और इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार मौजूद थे।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता और सभी प्रभावित लोगों को मुफ्त इलाज देने की घोषणा की है। इससे पहले, यादव ने घटना पर दुख जताया, मृतकों को श्रद्धांजलि दी और इलाज करा रहे लोगों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के भी निर्देश दिए।
उधर प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री व विधायक कैलाश विजयवर्गीय ने इस घटना में अबतक 8 लोगों की मौत की पुष्टि की है। साथ ही बताया कि 1400 लोग बीमार हैं, 200 अस्पताल में भर्ती हैं और सिर्फ एक मरीज वेंटिलेटर पर है।
31 दिसंबर 2025 को स्थानीय मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, इलाके में पीने के पानी की आपूर्ति करने वाली मुख्य पाइपलाइन एक सार्वजनिक शौचालय के नीचे से गुजरती है। मुख्य लाइन में लीकेज के कारण सीवेज का पानी भी पीने के पानी में मिल गया। इसके अलावा इलाके में पेयजल वितरण से जुड़ी पाइप लाइनें भी टूटी हुई पाई गईं, जिसके कारण दूषित पानी घरों तक पहुंच रहा था।





