टेप के बजाए नवजात का अंगूठा काटकर अलग कर दिया, सरकारी अस्पातल में नर्स की घोर लापरवाही

Jan 08, 2026 01:14 pm ISTSubodh Kumar Mishra लाइव हिन्दुस्तान, इंदौर
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इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज से एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। न्यू चेस्ट वार्ड में भर्ती डेढ़ माह के एक मासूम बच्चे का अंगूठा नर्स की लापरवाही से कटकर नीचे गिर गया। घटना के बाद बच्चे को तत्काल सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल भेजा गया।

टेप के बजाए नवजात का अंगूठा काटकर अलग कर दिया, सरकारी अस्पातल में नर्स की घोर लापरवाही

सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज के बड़े-बड़े दावों के बीच इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज से एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। न्यू चेस्ट वार्ड में भर्ती डेढ़ माह के एक मासूम बच्चे का अंगूठा नर्स की लापरवाही से कटकर नीचे गिर गया। घटना के बाद बच्चे को तत्काल सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल भेजा गया, जहां सर्जरी कर अंगूठा जोड़ा गया।

घटना बुधवार सुबह की बताई जा रही है, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि यूनिट के डॉक्टरों ने इस गंभीर लापरवाही की जानकारी अस्पताल अधीक्षक तक को नहीं दी। मामले को अंदर ही अंदर दबाने की कोशिश भी की गई, जिससे पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

कैसे हुआ हादसा

बच्चे की मां अंजु ने बताया कि वह बेटमा के बजरंगपुरा गांव की निवासी है। उसका बेटा निमोनिया से पीड़ित था, जिस कारण उसे एमजीएम मेडिकल कॉलेज के न्यू चेस्ट वार्ड में भर्ती कराया गया था। बच्चे के हाथ में रात से सूजन थी। सुबह दो बार नर्स को बुलाने के बावजूद वह नहीं आई। तीसरी बार जब नर्स पहुंची तो इंट्राकेथ बदलने के दौरान सुई निकालते समय बच्चे का हाथ पकड़ा और टेप काटने के लिए कैंची चलाई, जो सीधे बच्चे के अंगूठे पर लग गई। इससे अंगूठा कटकर जमीन पर गिर गया।

घटना के बाद वार्ड में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में बच्चे को सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने तत्काल सर्जरी कर अंगूठे को जोड़ने की कोशिश की। फिलहाल बच्चे की हालत स्थिर बताई जा रही है।

मोबाइल में व्यस्त रहती हैं नर्सें

परिजनों का आरोप है कि न्यू चेस्ट वार्ड में नर्सें अक्सर मोबाइल चलाने में व्यस्त रहती हैं। जब इलाज से संबंधित सवाल किए जाते हैं तो टालमटोल कर दिया जाता है। स्वजनों का कहना है कि यदि समय पर ध्यान दिया जाता, तो यह दर्दनाक हादसा टल सकता था। परिजनों ने बताया कि बच्चे का जन्म एमटीएच अस्पताल में सामान्य डिलिवरी से हुआ था। उसे घर ले जाया गया, लेकिन निमोनिया के कारण 24 दिसंबर को फिर से एमजीएम मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराना पड़ा।

अस्पताल प्रबंधन की सफाई

न्यू चेस्ट वार्ड के प्रभारी डॉ. निर्भय मेहता ने बताया कि बच्चा 24 दिसंबर को भर्ती हुआ था। सुबह इंट्राकेथ बदलने के दौरान उसके हाथ में चोट लग गई थी। उसे सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया, जहां अब बच्चा स्वस्थ है। हालांकि, इस बयान के बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि इतनी गंभीर लापरवाही के बाद भी नर्स के खिलाफ तत्काल क्या कार्रवाई की गई और अधीक्षक को घटना की जानकारी क्यों नहीं दी गई।

सिस्टम पर बड़ा सवाल

एक ओर सरकारी अस्पताल गरीब और जरूरतमंदों के लिए जीवनरेखा माने जाते हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसी घटनाएं पूरे स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर देती हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मामले में दोषी नर्स पर क्या कार्रवाई होती है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

रिपोर्टः हेमंत

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

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शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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