मम्मी-पापा दोबारा NEET देने की हिम्मत नहीं... पेपर लीक से दुखी 18 साल की आकांक्षा ने फांसी लगाई

Gaurav Kala लाइव हिन्दुस्तान, भोपाल
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एमपी के मऊगंज की रहने वाली 18 साल की आकांक्षा ने नीट पेपर लीक से दुखी होकर आत्महत्या कर दी। वह डॉक्टर बनने का सपना देख रही थी। उसने सुसाइड नोट में लिखा- सॉरी मम्मी-पापा नीट देने की हिम्मत नहीं बची।

मम्मी-पापा दोबारा NEET देने की हिम्मत नहीं... पेपर लीक से दुखी 18 साल की आकांक्षा ने फांसी लगाई

सॉरी! मम्मी-पापा मुझमें दोबारा नीट एग्जाम देने की हिम्मत नहीं बची… मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में रहने वाली18 साल की आकांक्षा चतुर्वेदी ने पेपर लीक से दुखी होकर आत्महत्या कर दी। परिवारजनों के अनुसार, आकांक्षा डॉक्टर बनना चाहती थी। उसकी मौत ने परिवार ही नहीं पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। परिवार का आरोप है कि पेपर लीक की खबरों के बाद वह गहरे सदमे में चली गई थी। खाना-पीना तक छोड़ दिया था। आखिरी नोट में आकांक्षा ने लिखा कि उसमें दोबारा नीट परीक्षा देने की हिम्मत नहीं बची।

जानकारी के अनुसार, आकांक्षा नागपुर में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थी। 20 मई को वह अपने कमरे में फंदे से लटकी मिली। घटना के कुछ दिन बाद परिवार को उसके हाथों से लिखा एक पत्र मिला, जिसमें उसने अपने माता-पिता से माफी मांगी थी।

सुसाइड नोट में लिखा- दोबारा नीट एग्जाम की हिम्मत नहीं

सुसाइड नोट में आकांक्षा ने लिखा कि उसके माता-पिता को भरोसा था कि वह पढ़-लिखकर डॉक्टर बनेगी, लेकिन अब उसमें दोबारा नीट परीक्षा देने की हिम्मत नहीं बची है। उसने लिखा कि पहले प्रयास में उसके अच्छे अंक आने की उम्मीद थी, लेकिन अब उसे अपने भविष्य को लेकर भरोसा नहीं रहा। उसने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा कि वह सब कुछ बर्बाद कर चुकी है।

आकांक्षा के पिता किसान

आकांक्षा मऊगंज जिले के मगनिया गांव की रहने वाली थी। उसके पिता कृष्ण कुमार चौबे एक किसान हैं। परिवार के लोगों के मुताबिक बेटी की पढ़ाई का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने काफी आर्थिक संघर्ष किया। खेती के साथ-साथ वह नागपुर में खाना बनाने का काम भी करते थे ताकि बेटी की कोचिंग और रहने का खर्च उठा सकें।

बेटी की पढ़ाई के लिए लाखों का कर्जा लिया

परिजनों का कहना है कि आकांक्षा की पढ़ाई के लिए परिवार ने किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए करीब तीन लाख रुपये का कर्ज लिया था। इसके अलावा रिश्तेदारों से भी आर्थिक मदद ली गई थी। आकांक्षा के चाचा जगदीश प्रसाद चतुर्वेदी ने बताया कि परीक्षा देने के बाद वह काफी खुश थी। उसने परिवार को बताया था कि उसके 650 से ज्यादा अंक आ सकते हैं। सभी को उम्मीद थी कि इस बार उसका मेडिकल कॉलेज में चयन हो जाएगा।

पेपर लीक से दुखी खाना-पीना छोड़ा

परिवार का कहना है कि परीक्षा के बाद जब पेपर लीक और अनियमितताओं की खबरें सामने आने लगीं तो आकांक्षा मानसिक रूप से परेशान रहने लगी। उसने ठीक से खाना-पीना छोड़ दिया था और लोगों से बातचीत भी कम कर दी थी। परिवार को अंदाजा नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेगी।

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