एमपी में 4 महीने की बच्ची की कुपोषण से मौत, जुड़वां भाई की हालत नाजुक; सिस्टम पर उठे सवाल
यह मामला न सिर्फ परिवार की लापरवाही बल्कि स्वास्थ्य तंत्र की खामियों को भी उजागर करता है। मृत बच्ची सुप्रियंशी (उर्फ प्रियंशी) और उसका भाई नैतिक का जन्म 21 दिसंबर 2025 को मजगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुआ था।

मध्य प्रदेश के सतना जिले से कुपोषण की एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां चार महीने की एक बच्ची की मौत हो गई, जबकि उसका जुड़वां भाई जिंदगी के लिए जूझ रहा है। यह मामला न सिर्फ परिवार की लापरवाही बल्कि स्वास्थ्य तंत्र की खामियों को भी उजागर करता है। मृत बच्ची सुप्रियंशी (उर्फ प्रियंशी) और उसका भाई नैतिक का जन्म 21 दिसंबर 2025 को मजगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुआ था।
जन्म के समय से बच्चों का वजन था कम
जन्म के समय ही दोनों का वजन कम था, करीब 2 किलो के आसपास। चार महीने की उम्र में जहां बच्चों का वजन 4-5 किलो होना चाहिए, वहीं सुप्रियंशी का वजन महज 2.86 किलो और नैतिक का 2.93 किलो था। डॉक्टरों ने उन्हें गंभीर कुपोषण (Severe Acute Malnutrition) की श्रेणी में रखा।
झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराता रहा परिवार
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों बच्चे करीब 15 दिनों से बुखार, दस्त और उल्टी से पीड़ित थे, लेकिन परिवार ने सरकारी अस्पताल की बजाय गांव के एक झोलाछाप डॉक्टर से इलाज कराया। हालत बिगड़ने पर 21 अप्रैल को बच्चों को अस्पताल लाया गया, जहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान सुप्रियंशी की हालत बिगड़ती गई और उसे रीवा रेफर करने से पहले ही उसकी मौत हो गई। नैतिक की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है।
आशा वर्कर ने बताई परिवार की लापरवाही
जांच में सामने आया कि मां की शारीरिक कमजोरी के कारण बच्चों को स्तनपान नहीं मिल सका और उन्हें गाय-भैंस का दूध पिलाया गया, जिसे डॉक्टर खतरनाक मानते हैं। वहीं, परिवार का आरोप है कि आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं ने नियमित निगरानी नहीं की, जिससे समय पर मदद नहीं मिल सकी।
सिस्टम पर उठे सवाल, जांच के आदेश जारी
मामले ने प्रशासनिक लापरवाही को भी उजागर किया है। कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए, जिसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सुपरवाइजर और एएनएम की भूमिका में लापरवाही पाई गई। संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए हैं और अवैध चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।
एमपी में 10 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित हैं
यह घटना अकेली नहीं है। पिछले छह महीनों में जिले में कुपोषण से बच्चों की मौत के कई मामले सामने आ चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में 10 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित हैं, जिनमें बड़ी संख्या गंभीर श्रेणी में आती है। यह घटना एक बार फिर राज्य के पोषण और स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
लेखक के बारे में
Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।
रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
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