
इंदौर के अस्पताल में नवजात बच्ची के हाथ की चारों अंगुलियां कुतर गए थे चूहे, एक संगठन का दावा
संक्षेप: इंदौर के सरकार एमवायएच अस्पताल प्रशासन पर झूठ बोलकर गुमराह करने का आरोप लगाते हुए जनजातीय समुदाय के एक संगठन ने दावा किया कि अस्पताल के आईसीयू में भर्ती नवजात बच्ची के हाथ की चारों अंगुलियां चूहे कुतर गए थे।
जनजातीय समुदाय के एक संगठन ने सोमवार को इंदौर के सरकारी महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय (एमवायएच) के प्रशासन पर नवजात बच्ची की कथित लापरवाही के चलते मौत के मामले में झूठ बोलकर गुमराह करने का आरोप लगाया है। संगठन ने कहा कि अस्पताल के आईसीयू में भर्ती एक नवजात बच्ची के हाथ की चारों अंगुलियां चूहे कुतर गए थे।

अधिकारियों ने बताया कि 31 अगस्त और एक सितंबर की दरम्यानी रात एमवायएच के आईसीयू में चूहों ने अलग-अलग जन्मजात विकृतियों से जूझ रही 2 नवजात बच्चियों को नुकसान पहुंचाया जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी। एक बच्ची का परिवार देवास जिले में रहता है जबकि दूसरी बच्ची का परिवार धार जिले का निवासी है।
जयस के राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकेश मुजाल्दा ने दावा किया कि धार जिले के जनजातीय समुदाय के देवराम की नवजात बेटी को जन्मजात विकृतियों के चलते एमवायएच के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। चूहों के हमले के बाद उसकी मौत हो गई थी। बच्ची के शव को पोस्टमॉर्टम के बाद इसे प्लास्टिक की थैली में पैक करके शनिवार देर शाम को परिजनों सौंपा गया था।
जयस के राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकेश मुजाल्दा ने कहा कि अंतिम संस्कार से पहले जब लाश से पैकिंग हटाई गई तो परिजनों का शोक और आक्रोश यह देखकर बढ़ गया कि नवजात बच्ची के एक हाथ की कथित तौर पर चारों अंगुलियां चूहे कुतर चुके थे।
मुजाल्दा ने आरोप लगाया कि एमवायएच प्रशासन ने शुरुआत में इस बच्ची के बारे में झूठ बोलकर गुमराह किया था कि चूहों के काटने से उसकी अंगुलियों में मामूली जख्म हुए हैं। घोर लापरवाही के आरोपों के कारण आलोचना से घिरा एमवायएच प्रशासन लगातार दावा कर रहा है कि दोनों नवजात बच्चियों की मौत का चूहों के काटने से कोई लेना-देना नहीं है।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अलग-अलग जन्मजात विकृतियों और गंभीर स्वास्थ्य परेशानियों के कारण बच्चियों ने दम तोड़ा। जयस अध्यक्ष मुजाल्दा ने दावा किया कि चूहों के कुतरने से दोनों नवजात बच्चियों के शरीर में व्यापक रूप से संक्रमण फैल गया और सेप्टिसीमिया (रक्त संक्रमण) की जटिलता के कारण उनकी मौत हो गई।
जयस अध्यक्ष मुजाल्दा ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामले में जिलाधिकारी को विशेषज्ञ चिकित्सकों का दल गठित करके दोनों शिशुओं की मृत्यु का ऑडिट (डेथ ऑडिट) कराना चाहिए। बता दें कि एमवायएच, शहर के शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध है।
जयस अध्यक्ष मुजाल्दा ने इस महाविद्यालय के डीन (अधिष्ठाता) और एमवायएच के अधीक्षक जैसे शीर्ष अधिकारियों को सस्पेंड करके उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग दोहराई और चेतावनी दी कि यह मांग पूरी नहीं किए जाने पर आदिवासी समुदाय बड़ा आंदोलन छेड़ेगा।
चूहों के हमले से दोनों नवजात बच्चियों को आईं चोटों को लेकर गुमराह किए जाने के आरोपों को महाविद्यालय के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने खारिज किया। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की तीन सदस्यों वाली समिति ने एक नवजात बच्ची के शव का पोस्टमॉर्टम किया है। इससे सारी स्थिति पहले ही साफ हो चुकी है।
महाविद्यालय के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि घटना के बाद एमवायएच की प्रशासकीय व्यवस्था में बदलाव के साथ ही साफ-सफाई, कीट नियंत्रण और सुरक्षा को लेकर ‘बड़े सुधार’ किए जा रहे हैं ताकि घटना की पुनरावृत्ति न हो सके। बता दें कि इस मामले में एमवायएच प्रशासन अब तक छह अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर चुका है। इसमें निलंबन और पद से हटाए जाने के कदम शामिल हैं।





