'आपके तार पुलवामा हमले से जुड़े हैं', MP में बुजुर्ग पति-पत्नी से 1.15 करोड़ की ठगी
इंदौर शहर के हीरानगर थाना क्षेत्र में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगों ने करोड़ों की ठगी को अंजाम दिया है। साइबर अपराधियों ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर रिटायर्ड बुजुर्ग दंपती को आतंकी हमलों और संगीन अपराधों में फंसाने का डर दिखाया और करीब 1 करोड़ 15 लाख रुपये ठग लिए।
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के हीरानगर थाना क्षेत्र में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगों द्वारा अंजाम दी गई करोड़ों की ठगी ने एक बार फिर पुलिस और आम लोगों को सतर्क कर दिया है। साइबर अपराधियों ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर सेवानिवृत्त बुजुर्ग दंपती को आतंकी हमलों और संगीन अपराधों में फंसाने का डर दिखाया और करीब 1 करोड़ 15 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने दंपती को 15 दिनों तक वीडियो कॉल पर कथित ‘निगरानी’ में रखकर उनकी जीवन भर की जमा पूंजी हड़प ली।
घटना बजरंग नगर निवासी विजय शंकर सक्सेना, जो बीएसएनएल से रिटायर्ड कर्मचारी हैं, और उनकी पत्नी सुमनलता सक्सेना के साथ हुई। आरोपियों ने खाकी वर्दी पहनकर वीडियो कॉल किया और खुद को एटीएस अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उन्होंने अफजल खान नामक आतंकवादी को गिरफ्तार किया है, जिसने पहलगाम और पुलवामा आतंकी हमलों समेत बच्चों से दुष्कर्म जैसे मामलों में दंपती का नाम लिया है। ठगों ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर के एक बैंक खाते में आतंकियों की मदद के बदले दंपती को 70 लाख रुपये का कमीशन मिला है, जिसके चलते वे गंभीर जांच के दायरे में हैं।
ATS अधिकारी बन 15 दिन तक रखा ‘डिजिटल अरेस्ट’
पीड़िता सुमनलता के मुताबिक 15 नवंबर से शुरू हुआ ठगी का यह सिलसिला करीब 15 दिनों तक चलता रहा। आरोपियों ने खुद को एटीएस पुणे का इंस्पेक्टर चंद्रभान सिंह और बाद में जांच अधिकारी प्रदीप लाल बताकर लगातार वीडियो कॉल पर दंपती को बैठाए रखा। उन्हें सख्त निर्देश दिए गए कि वे किसी से संपर्क नहीं करेंगे, वरना तत्काल गिरफ्तारी कर ली जाएगी। इसी दौरान ठगों ने बैंक खातों, संपत्ति और रिश्तेदारों तक की पूरी जानकारी हासिल कर ली।
एफडी तुड़वाकर खातों में डलवाए पैसे
‘खातों के सत्यापन’ और केस से बचाने का झांसा देकर अपराधियों ने दंपती पर दबाव बनाया कि वे अपनी एफडी तुड़वाकर रकम उनके बताए खातों में जमा करें। भयभीत दंपती विजय नगर स्थित राज्य सहकारी बैंक मर्यादित पहुंचे और दो अलग-अलग ट्रांजैक्शन में 49.70 लाख और 65.30 लाख रुपये एनईएफटी के माध्यम से ट्रांसफर कर दिए। ठगों ने उन्हें बैंक कर्मचारियों से झूठ बोलने तक की स्क्रिप्ट दे दी थी कि पैसा बेटियों की मदद के लिए भेजा जा रहा है।
तबीयत बिगड़ी तो खुला करोड़ों की ठगी का राज
इतनी बड़ी रकम गंवाने के बाद विजय शंकर सक्सेना की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। पत्नी सुमनलता की घबराहट देखकर दामाद मनीष गौड़ ने जब पूछताछ की, तब पूरे डिजिटल अरेस्ट गिरोह की साजिश सामने आई। इसके बाद पीड़ित परिवार ने साइबर हेल्पलाइन 1930 और क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई। हीरानगर थाना प्रभारी सुशील पटेल के अनुसार अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है और बैंक खातों व डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है। रिपोर्ट --हेमंत
लेखक के बारे में
Aditi Sharmaअदिति शर्मा
अदिति शर्मा डिजिटल मीडिया की एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें लाइव हिंदुस्तान, TV9 भारतवर्ष और न्यूज नेशन जैसे संस्थानों में 9 वर्षों का अनुभव है। BCA और MMC की शैक्षणिक पृष्ठभूमि के साथ, वे तकनीक और पत्रकारिता के मूल्यों का सटीक संतुलन बनाती हैं। उनकी विशेषज्ञता राजनीति, अपराध और शोध-आधारित लेखन में है, जहां वे सकारात्मक प्रभाव डालने वाली विश्वसनीय पत्रकारिता को प्राथमिकता देती हैं।
विस्तृत बायो
डिजिटल मीडिया के इस दौर में, अदिति शर्मा पिछले 9 सालों से सूचनाओं को खबरों में और खबरों को अटूट विश्वसनीयता में बदलने का काम कर रही हैं। वर्तमान में 'लाइव हिंदुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत रहते हुए, उनकी पत्रकारिता का मुख्य आधार रफ्तार के साथ गहरी सटीकता बनाए रखना रहा है। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि तकनीकी और मीडिया शिक्षा का एक संतुलित मेल है। उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से BCA किया है। इसके बाद उन्होंने इंडिया टुडे मीडिया इंस्टीट्यूट (ITMI) से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की, जिसने उनके पत्रकारिता कौशल को निखारा।
अदिति के करियर का एक बड़ा हिस्सा TV9 भारतवर्ष, न्यूज नेशन और इंडिया टुडे जैसे देश के प्रतिष्ठित न्यूज रूम्स के साथ बीता है। इस दौरान उन्होंने न केवल पॉलिटिक्स, क्राइम और स्टेट न्यूज जैसी 'हार्ड-कोर' खबरों को कवर किया, बल्कि फीचर राइटिंग, ओपिनियन आर्टिकल्स और रिसर्च-आधारित गहन लेखन के जरिए खबरों की तह तक जाने का सफल प्रयास किया है।
उनके लिए पत्रकारिता केवल सूचना देना नहीं, बल्कि मल्टीमीडिया का एक संपूर्ण अनुभव है। एंकरिंग से लेकर वीडियो प्रोडक्शन और 'कैलेंडर जर्नलिज्म' से लेकर 'फैक्ट चेक' तक, उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता के हर अनिवार्य पहलू को जिया है। सोशल मीडिया की नब्ज पहचानना और कंटेंट को लाखों लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना उनकी सबसे बड़ी पेशेवर ताकत है।
तथ्यों के प्रति उनकी ईमानदारी और 'मीडिया लॉ एंड एथिक्स' के दायरे में रहकर जनता की आवाज उठाना ही उनकी पत्रकारिता का असली उद्देश्य है। वे नई तकनीक और पत्रकारिता के पुराने मूल्यों के बीच एक ऐसा संतुलन बनाने में विश्वास रखती हैं, जिससे समाज को न केवल सही जानकारी मिले, बल्कि उस पर लोगों का भरोसा भी बना रहे। उनका हमेशा यह प्रयास रहता है कि उनकी खबरों से समाज में एक सकारात्मक बदलाव आए।
और पढ़ें


