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कोई जनरल कास्ट का गुजरता है तो खड़े हो जाते हैं; SC में पेश किया गया OBC सर्वे

कोई जनरल कास्ट का गुजरता है तो खड़े हो जाते हैं; SC में पेश किया गया OBC सर्वे

संक्षेप:

सर्वे में शामिल 56 फीसदी ओबीसी वर्ग के लोगों ने बताया कि जब उच्च जाति का कोई व्यक्ति उनके घर से गुजरता है तो वे बैठे नहीं रह सकते। वे सम्मान देने के लिए खड़े हो जाते हैं। यह सर्वे महू स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय की ओर से किया गया है।

Oct 14, 2025 01:29 pm ISTSurya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मध्य प्रदेश सरकार ने ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में एक सर्वे का जिक्र किया। इस सर्वे के हवाले से मध्य प्रदेश सरकार ने कहा कि राज्य में 10 हजार शहरी और ग्रामीण परिवारों का सर्वे किया गया। इस सर्वे में शामिल 56 फीसदी ओबीसी वर्ग के लोगों ने बताया कि जब उच्च जाति का कोई व्यक्ति उनके घर से गुजरता है तो वे बैठे नहीं रह सकते। वे सम्मान देने के लिए खड़े हो जाते हैं। यह सर्वे महू स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय की ओर से किया गया है। राज्य सरकार की ओर से ओबीसी आरक्षण 27 फीसदी तक बढ़ाने को सही ठहराने की दलील देते हुए इस सर्वे को पेश किया गया है।

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इस सर्वे को 2023 में किया गया था। सर्वे में शामिल 3,797 परिवारों ने यह भी कहा कि छुआछूत अब भी उनके गांवों में मौजूद है। इसके अलावा जाति के आधार पर मोहल्ले भी बंटे हुए हैं। इसके अलावा 3,238 परिवारों का कहना है कि उनके घर में आकर कोई ब्राह्यण पूजा-पाठ नहीं कराता। इसका कारण जाति ही होता है। इसके अलावा 57 फीसदी यानी करीब 6 हजार लोगों का कहना था कि उनकी जाति के लोगों को मंदिर में पुजारी नहीं बनाया जा सकता। उन्हें किसी मठ या आश्रम का प्रमुख नहीं बनाया जाता। इसके अलावा करीब 50 फीसदी लोगों का कहना था कि उनके परिवार के सदस्यों को धार्मिक शिक्षा देने वाले संस्थानों में एंट्री नहीं दी जाती।

एक मजेदार बात यह भी रही कि मध्य प्रदेश सरकार ने अदालत में ओबीसी आरक्षण को लेकर जो एफिडेविट दिया है, उसमें प्राचीन भारत को जातिविहीन बताया गया है। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि वैदिक काल में भेदभाव नहीं था, लेकिन कालांतर में चीजें बदल गईं। भारत में ही एक वर्ग का जाति के आधार पर भेदभाव हुआ। किसान और पेशेवर जातियों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती चली गई। यही आज ओबीसी वर्ग का हिस्सा हैं। इस दलील के साथ ही राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27 फीसदी करने का प्रस्ताव रखा है। अब तक सूबे में 14 फीसदी ओबीसी कोटा ही मिलता है।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि ओबीसी वर्ग भेदभाव का शिकार रहा है। इसके अलावा सरकार का कहना है कि राज्य में ओबीसी वर्ग को शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 35 फीसदी कोटा मिलना चाहिए। वहीं ओबीसी महिलाओं को लाडली बहना और लाडली बेटी जैसी स्कीमों में 50 पर्सेंट कोटा मिलना चाहिए।

Surya Prakash

लेखक के बारे में

Surya Prakash
दुनियादारी में रुचि पत्रकारिता की ओर खींच लाई। समकालीन राजनीति पर लिखने के अलावा सामरिक मामलों, रणनीतिक संचार और सभ्यतागत प्रश्नों के अध्ययन में रुचि रखते हैं। करियर की शुरुआत प्रिंट माध्यम से करते हुए बीते करीब एक दशक से डिजिटल मीडिया में हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में नेशनल, इंटरनेशनल डेस्क के इंचार्ज हैं। और पढ़ें
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