राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद अलर्ट हुई MP सरकार, मंदिरों के चढ़ावे और दान के लिए खास तैयारी
राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर कथित चोरी के मामले के बाद मध्य प्रदेश सरकार अलर्ट हो गई है। राज्य के प्रसिद्ध मंदिरों में चढ़ावे और दान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खास तैयारी की जा रही है जिससे भक्तों की आस्था के साथ किसी तरह का कोई खिलवाड़ न हो।

देश के श्री राम मंदिर अयोध्या में दान चढ़ावे में चोरी के कथित आरोपो के बाद अब मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध मंदिरों में चढ़ावा और दान राशि को लेकर हाईटेक करने की तैयारी की जा रही है। एमपी के उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर और खंडवा श्री ओंकारेश्वर मंदिर में यह व्यवस्था शुरू होने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की जा रही है, जो देश के प्रमुख मंदिरों में लागू व्यवस्था का अध्ययन करेगी।
मध्य प्रदेश सरकार अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दान राशि और चढ़ावे को लेकर हाल ही में उपजे विवाद के बाद सतर्क हो गई है। श्रद्धालुओं की आस्था और उनके चढ़ावे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मप्र सरकार प्रदेश के प्रमुख देवस्थानों की प्रबंधन व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने जा रही है, मंदिर प्रशासन अब वीआईपी दर्शन, महाप्रसाद और सामान्य दान के लिए अलग-अलग (सेपरेट) अकाउंटिंग सिस्टम विकसित कर रहा है। हर श्रेणी के साथ आए हुए दान का स्वतंत्र हिसाब रखा जाएगा ताकि यह स्पष्ट रहे कि कौन सी राशि कहां खर्च हुई।
महाकालेश्वर मंदिर में कैसे होती है काउंटिंग?
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भेंट पेटियों से निकलने वाले कैश को पारदर्शी कांच के कमरों में सीसीटीवी कैमरों के सीधे पहरे के बीच गिना जाता है, जिसे बैंक कर्मचारी सीधे मुख्य खाते में जमा करते हैं। वहीं ओंकारेश्वर में भी दान पेटियां खोलने की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाती है। अब इस व्यवस्था को और अधिक कड़ा किया जा रहा है। हालांकि महाकालेश्वर मंदिर में पहले से ही दान को लेकर ऑनलाइन किया जा चुका है। वहीं दूसरी ओर चढ़ावा को लेकर मंदिर समिति द्वारा भक्तों को रसीद दी जाती है। समय-समय पर मंदिर समिति द्वारा आय के स्रोतों की जानकारी भी दी जाती है वही मंदिर समिति साल भर में इसका ऑडिट भी करती है जिसकी सूचना मीडिया को भी दी जाती है।
क्यूआर कोड के जरिए अनिवार्य रूप से डिजिटल दान
मिली जानकारी के अनुसार धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व, संस्कृति और पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा है कि उज्जैन के महाकाल और खंडवा के ओंकारेश्वर मंदिर समेत प्रदेश के सभी बड़े मंदिरों में क्यूआर (QR) कोड के जरिए अनिवार्य रूप से डिजिटल दान सिस्टम को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की जा रही है, जो देश के प्रमुख मंदिरों में लागू व्यवस्था का अध्ययन करेगी। लोधी ने कहा कि धर्म स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं के अटूट विश्वास की रक्षा करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। जल्द ही लाइव निगरानी और वीडियोग्राफी प्रस्तावित व्यवस्था के तहत नकद लेनदेन को काफी हद तक कम किया जाएगा।
पारदर्शी मॉडल तैयार होगा
मप्र सरकार की विशेषज्ञ समिति देश के उन प्रतिष्ठित और वीआईपी मंदिरों का दौरा करेगी जहां का प्रबंधन आधुनिक और बेदाग है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही मध्य प्रदेश के मंदिरों के लिए एक कस्टमाइज्ड पारदर्शी प्रबंधन मॉडल तैयार होगा, पारदर्शिता को एक पायदान और ऊपर ले जाने के लिए मंदिर प्रशासन अब वीआईपी दर्शन, महाप्रसाद और सामान्य दान के लिए अलग-अलग (सेपरेट) अकाउंटिंग सिस्टम विकसित कर रहा है हर श्रेणी के साथ आए हुए दान का स्वतंत्र हिसाब रखा जाएगा ताकि यह स्पष्ट रहे कि कौन सी राशि कहां खर्च हुई और यह भी पता चले कि इस चढ़ावे ओर दान से भक्तों के लिए मुक्त भोजनशाला के साथ मंदिर निर्माण और समाज सेवा के प्रकल्प चलाए जाते हैं। इस नई व्यवस्था से यह पूरा हिसाब किताब सार्वजनिक रहेगा जिससे गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी।
महाकाल मंदिर के वरिष्ठ पुजारी क्या बोले?
महाकाल मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि महाकाल मंदिर में पहले से ही हाईटेक व्यवस्था चालू है जहां पर श्रद्धालु ऑनलाइन दान राशि भेंट करता है वही भगवान को चढ़ाने वाले वस्त्र चांदी के आभूषण या और कोई आभूषण चढ़ने के पहले मंदिर से रसीद कटाई जाती है और चढ़ने के बाद मंदिर के कोठार में जमा कर दिया जाता है वहीं दूसरी ओर यहां पर सारी व्यवस्था ऑनलाइन और पारदर्शी है।
जनसंपर्क अधिकारी ने मौजूदा व्यवस्था बताई
महाकाल मंदिर के जनसंपर्क अधिकारी आशीष फलवादिया ने बताया कि महाकाल मंदिर समिति समय-समय पर महाकाल मंदिर में आय और व्यय का पूरा ऑडिट कराती है, वैसे दान पेटियों को सीसीटीवी और मंदिर समिति के अधिकारियों के सामने खोला जाता है और उन्हीं के सामने सारी राशियों की गिनती की जाती है इसके पश्चात बैंक के अधिकारी को जमा करने के लिए दे दिया जाता है जिसकी वाकायदा रिसिप्ट ली जाती है।


