सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर 1.01 करोड़ का पुरस्कार देगी MP सरकार, CM मोहन यादव ने की घोषणा
मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन के शासक रहे सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर पुरस्कार देने की घोषणा की है। उज्जैन में विक्रमोत्सव 2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए सीएम मोहन यादव ने इसकी घोषणा की। यादव ने कहा कि विक्रमादित्य का शासनकाल स्वर्ण युग के रूप में प्रसिद्ध है।

मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन के शासक रहे सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर पुरस्कार देने की घोषणा की है। उज्जैन में विक्रमोत्सव 2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए सीएम मोहन यादव ने इसकी घोषणा की। यादव ने कहा कि विक्रमादित्य का शासनकाल स्वर्ण युग के रूप में प्रसिद्ध है।
मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन के शासक रहे सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर 1.01 करोड़ रुपए का पुरस्कार देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को उज्जैन के महान शासक की स्मृति में 21 लाख रुपए के राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार और 5-5 लाख रुपए के तीन राज्य स्तरीय पुरस्कारों की भी घोषणा की।
उज्जैन में विक्रमोत्सव में की घोषणा
सीएम यादव ने उज्जैन में विक्रमोत्सव 2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य की गौरवशाली स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने और उनके शौर्य, न्याय तथा प्रजावत्सल आदर्शों को अमर बनाने के लिए उनकी स्मृति में एक करोड़ एक लाख रुपए का सम्राट विक्रमादित्य अंतरराष्ट्रीय अलंकरण सम्मान शुरू किया जाएगा।
सबसे बड़े धार्मिक आयोजन का पुरस्कार
उन्होंने कहा कि यह देश का सबसे प्रतिष्ठित अलंकरण भारत की सांस्कृतिक गरिमा को विश्व मंच पर नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा। यादव ने कहा कि विक्रमोत्सव की ख्याति तेजी से बढ़ रही है और यह प्रसन्नता का विषय है कि विक्रमोत्सव को एशिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन का पुरस्कार मिला। ज्ञात हो कि विक्रमोत्सव-2025 को ईमैक्सम ग्लोबल अवार्ड द्वारा 'लांगस्टैडिंग आईपी ऑफ द इयर' से सम्मानित किया गया है।
विक्रमादित्य का शासनकाल स्वर्ण युग
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष और आने वाले समय में भी विक्रमोत्सव अपनी उत्सवधर्मी सांस्कृतिक पहचान को दुनिया में स्थापित करेगा। यादव ने कहा कि विक्रमादित्य का शासनकाल दुनिया भर में शिक्षा, विज्ञान, ज्योतिष और साहित्य के स्वर्ण युग के रूप में प्रसिद्ध है।
उन्होंने कहा कि विक्रम संवत और भारतीय कैलेंडर हमारी वैज्ञानिक सोच और सांस्कृतिक समृद्धि के गौरवशाली प्रतीक हैं। उज्जैन का सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक आयोजन, विक्रमोत्सव, हमारी परंपराओं को सशक्त करेगा।
उज्जैन पृथ्वी का नाभि स्थल
मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन पृथ्वी का नाभि स्थल कहा जाता है और सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था इसे सनातन के विश्वास का केंद्र भी बनाती है। उन्होंने कहा कि इसी दिव्य परंपरा को अधिक भव्य व्यवस्थित और श्रद्धालु केंद्रित बनाने के लिए सिंहस्थ की तैयारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
शिप्रा नदी में 30 किमी घाटों की व्यवस्था
उन्होंने कहा कि उज्जैन तथा आसपास के क्षेत्रों में विकास के कार्य तेजी से जारी हैं। श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के लिए उज्जैन के आसपास 'फोर लेन' और 'सिक्स लेन' सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। शिप्रा नदी में स्नान के लिए 30 किमी घाटों की व्यवस्था की गई है। इसे निर्मल और अविरल बनाए रखने के लिए व्यवस्थित कार्य योजना प्रगति पर है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


