मेडिकल छात्रा को पूरी रात बंधक बनाकर पीटा, रेप करने की कोशिश; MP के हॉस्टल में डरावनी घटना

Subodh Kumar Mishra लाइव हिन्दुस्तान, भोपाल
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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक डरावनी घटना सामने आई है। मेडिकल छात्रा का पीछा करते हुए एक आदमी हॉस्टल के उसके रूम में घुस गया। उसने रातभर छात्रा को बंधक बनाए रखा और पिटाई की। उसने छात्रा से रेप करने भी कोशिश की। सुबह होते ही आरोपी वहां से भाग निकला। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

मेडिकल छात्रा को पूरी रात बंधक बनाकर पीटा, रेप करने की कोशिश; MP के हॉस्टल में डरावनी घटना

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक डरावनी घटना सामने आई है। मेडिकल छात्रा का पीछा करते हुए एक आदमी हॉस्टल के उसके रूम में घुस गया। उसने रातभर छात्रा को बंधक बनाए रखा और पिटाई की। उसने छात्रा से रेप करने भी कोशिश की। सुबह होते ही आरोपी वहां से भाग निकला। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

जबरदस्ती कमरे में घुसकर दरवाजा बंद कर लिया

एक व्यक्ति पर आरोप है कि उसने एक मेडिकल छात्रा का यौन उत्पीड़न किया और पूरी रात उसे बंधक बनाकर टूटी हुई कुर्सी के पाए से पीटा। पुलिस ने बताया कि वह व्यक्ति दूसरे शहर से छात्रा के हॉस्टल पहुंचा। उसने रविवार देर रात छात्रा को हॉस्टल के गेट पर उसे रोका और बात करने का दबाव बनाया। छात्रा ने बात करने से मना कर दिया और अपने कमरे में चली गई। आरोपी कथित तौर पर उसके पीछे-पीछे गया और जबरदस्ती कमरे में घुसकर दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।

अलग-अलग नंबरों से फोन करता था

छात्रा ने पुलिस को बताया कि वह व्यक्ति पहले किसी दूसरे शहर के कॉलेज से एमबीबीएस कर रहा था। वह उसे जानती थी और वे दोस्त थे। हालांकि, दो साल पहले जब उसे एमडी कोर्स में दाखिला मिल गया तो उसने उस व्यक्ति से बातचीत करना बंद कर दिया। इस दौरान आरोपी उसे अलग-अलग मोबाइल नंबरों से लगातार फोन करता रहा और उससे बात करने के लिए उसे परेशान करता रहा।

बाथरूम में बंद कर तलाशी लिया

पुलिस ने बताया कि हॉस्टल के कमरे में घुसने के बाद आरोपी ने छात्रा का मोबाइल फोन छीन लिया। वह पूछने लगा कि क्या वह किसी और के साथ रिलेशनशिप में है। आरोप है कि उसने छात्रा को बाथरूम में बंद कर दिया और कमरे की तलाशी लेने लगा। उसने छात्रा का मोबाइल फोन खोलने की भी कोशिश की, लेकिन छात्रा ने पासवर्ड बताने से इनकार कर दिया।

जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश

रात के समय आरोपी ने छात्रा के साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की। जब छात्रा ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने उस पर फिर से हमला कर दिया। पुलिस के अनुसार, छात्रा के शरीर पर चोट के निशान साफ दिखाई दे रहे थे। सोमवार सुबह जब आरोपी सो गया तो छात्रा चुपके से अपना फोन लेकर कमरे से बाहर निकलने में कामयाब हो गई। उसने अपने परिवार से संपर्क करके उन्हें अपनी आपबीती सुनाई। जब छात्रा के भाई ने आरोपी को फोन किया तो वह हॉस्टल के कमरे से भाग गया।

छात्रा ने शिकायत दर्ज कराई

सोमवार रात को छात्रा ने पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई। उसकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़, पीछा करने और मारपीट के आरोपों के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी फिलहाल फरार है और उसे ढूंढने के प्रयास जारी हैं।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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