महीनेभर बाद भी मासूम लापता, लगी 'मजिस्ट्रेट महादेव' की अदालत; अब नुकसान से होगा दोषी पक्ष का फैसला

Dec 02, 2025 06:17 pm ISTSourabh Jain लाइव हिन्दुस्तान, ग्वालियर, मध्य प्रदेश
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मामले में बच्चे के माता-पिता और उनके रिश्तेदारों ने कसम उठाते हुए कहा कि मासूम रितेश पाल के अपहरण या कोई भी घटना कारित करने या उसमे मदद करने में उनका कोई हाथ नहीं है। लगभग 3 घंटे तक चली मजिस्ट्रेट महादेव की अदालत में छोटी-मोटी नोकझोंक के बाद दोनों पक्षों की दलीलों को सुना गया।

महीनेभर बाद भी मासूम लापता, लगी 'मजिस्ट्रेट महादेव' की अदालत; अब नुकसान से होगा दोषी पक्ष का फैसला

मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक बेहद खास मामला सामने आया है, जहां एक महीने से लापता मासूम की अपहरण मिस्ट्री को सुलझाने की जिम्मेदारी अब मजिस्ट्रेट महादेव को सौपी गई है। मोहनपुर गांव का रहने वाला तीन वर्षीय रितेश पाल बीते एक महीने से गायब है और पुलिस अबतक उसका पता नहीं लगा सकी है। जिसके बाद पुलिस से उम्मीद टूटने के बाद उसके परिजनों ने इलाके के प्रसिद्ध मंदिर 'मजिस्ट्रेट महादेव' की शरण ली।

मामले में सुनवाई के बाद मजिस्ट्रेट महादेव की अदालत के पंचों ने 50 हजार का धरम तय किया। जिसके तहत कसम उठाने वालों के साथ यदि आने वाले 5 दिनों के अंदर 50 हजार कीमत से ज्यादा का कोई भी नुकसान या जनहानि होती है तो उस कसम उठाने वाले और उसके पक्ष को दोषी माना जाएगा।

यह मंदिर महाराजपुरा के गिरगांव में स्थित है और ग्वालियर चंबल अंचल में इन्हें मजिस्ट्रेट महादेव कहा जाता है। मजिस्ट्रेट महादेव के परिसर में बकायदा उनकी अदालत भी लगती है, जहां पर सुनवाई के बाद पंच यह तय करते हैं कि कौन दोषी होगा और किसे न्याय मिलेगा? मजिस्ट्रेट महादेव की अदालत में इस बार 3 साल के मासूम रितेश पाल के अपहरण की अनसुलझी गुत्थी का मामला पहुंचा। इस दौरान सुनवाई के लिए रितेश के पिता पक्ष और माँ पक्ष के लोग भी पहुंचे। जिसके बाद यहां की परंपरा के अनुसार मंदिर के मौजूदा पंचों ने दोनों पक्षो को सुना। इस दौरान लापता बच्चे की मां सपना ने आरोप लगाया कि रितेश के पिता जसवंत पाल ने ही उसका अपहरण या कोई अनहोनी घटना की है, जबकि उसके पिता जसवंत ने मां सपना और उसके भाई सहित अन्य परिवारजनों पर वारदात करने का आरोप लगाया।

नहीं चला मासूम का पता, लगी 'मजिस्ट्रेट महादेव' की अदालत;

दोनों पक्षों के रिश्तेदारों ने उठाई महादेव की धरम

लगभग 3 घंटे तक चली मजिस्ट्रेट महादेव की अदालत में छोटी-मोटी नोकझोंक के बाद दोनों पक्षों की दलीलों को सुना गया। इसके बाद मन्दिर की मान्यताओं के अनुसार मजिस्ट्रेट महादेव के दरबार यानी गर्भगृह में पंचों की मौजूदगी में दोनों पक्षों की पेशी हुई। इस दौरान मासूम रितेश पाल की मां सपना, मामा-मामी के अलावा पिता जसवंत, दादा सहित संदेही रिश्तेदारों ने 'महादेव की धरम' यानी कसम उठाई। दोनों ने कसम उठाते हुए कहा कि मासूम रितेश पाल के अपहरण या कोई भी घटना कारित करने या उसमे मदद करने में उनका कोई हाथ नहीं है। हालांकि दोनों पक्षों के द्वारा कसम लेने से फिलहाल अभी यह साफ नहीं हो सका है कि आखिर रितेश कहां है।

पुलिस नहीं खोज पाई तो पहुंचे मंदिर की शरण

रितेश की मां सपना पाल का कहना है कि महीना भर बीतने के बाद भी पुलिस उनके बच्चे को खोज नही पाई है, ऐसे में पुलिस से उम्मीद खत्म होने के बाद वे मजिस्ट्रेट महादेव की शरण में आए हैं। महादेव के दरबार मे उठाई गई कसम तय करेगी कि कौन लोग रितेश के अपहरण में दोषी या सहयोगी हैं। वहीं रितेश के पिता जसवंत पाल का कहना है की मजिस्ट्रेट महादेव ही अब न्याय करेंगे। दोनों पक्षों ने जो आरोप एक-दूसरे पर लगाया, उसके बाद सभी ने पंचों की मौजूदगी कसम उठाई। यदि किसी ने भी झूठी कसम उठाई तो सजा का फैसला मजिस्ट्रेट महादेव करेंगे।

मासूम के अपहरण पर मजिस्ट्रेट महादेव के यहां लगी अदालत

जिसे 50 हजार का नुकसान होगा वह दोषी

मजिस्ट्रेट महादेव की अदालत में मुख्य पंच अमर सिंह ने कसम उठाने से पहले पंचनामा बनाया, जिस पर दोनों पक्षों के दस्तखत हुए। फिर कसम उठाई गई। अमर सिंह का कहना है कि मजिस्ट्रेट महादेव की अदालत ने 50 हजार का धरम तय किया है। जिसके तहत कसम उठाने वालों के साथ यदि आने वाले 5 दिनों के अंदर 50 हजार कीमत से ज्यादा का कोई भी नुकसान या जनहानि होती है तो उस कसम उठाने वाले और उसके पक्ष को दोषी माना जाएगा।

इस अनसुलझी अपहरण मिस्ट्री के मामले में जांच कर रही IPS अफसर ASP अनु बेनिवाल का कहना है कि रितेश को लेकर विशेष टीम जांच कर रही है और शहर से लेकर जंगल तक में खोजबीन जारी है। सीसीटीवी कैमरे भी खंगाले गए हैं, संदेहियों से सख्ती से पूछताछ भी की गई है। वर्तमान में अभी जांच जारी है, ऐसे में जो भी अपडेट होगा वह जल्द सबके सामने आएगा।

आपको बता दें कि 3 साल का रितेश पाल 1 नवंबर को मोहनपुर गांव में अपने नाना के घर से अचानक लापता हो गया था। इसके बाद लगभग 500 से ज्यादा जवान और अधिकारियों की टीम ने जंगल की खाक छानी, ड्रोन से भी सर्चिंग की गई और हर एंगल से बच्चे को खोजने का प्रयास हुआ, लेकिन एक महीना बीतने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं, वहीं दूसरी ओर अब गिरगांव स्थित मजिस्ट्रेट महादेव की अदालत और उसके फैसले पर रितेश से जुड़े परिजनों रिश्तेदारों ने भरोसा जताया है। ऐसे में देखना होगा कि रितेश की अपहरण मिस्ट्री में कौनसा नया मोड़ देखने मिलता है।

Sourabh Jain

लेखक के बारे में

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