क्या मध्य प्रदेश में जरूरत से ज्यादा बाघ हो गए हैं, क्यों बढ़ रही संख्या? पैदा होंगी कई समस्याएं!

लाइव हिन्दुस्तान, भोपाल
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देश में बाघों की संख्या बढ़ना लंबे समय तक एक बड़ी सफलता मानी जाती रही है, लेकिन अब यही सफलता नए सवाल खड़े कर रही है। मध्य प्रदेश, जिसे ‘टाइगर स्टेट’ कहा जाता है, आज एक अलग तरह की चुनौती का सामना कर रहा है- क्या यहां बाघों की संख्या जरूरत से ज्यादा हो गई है?

क्या मध्य प्रदेश में जरूरत से ज्यादा बाघ हो गए हैं, क्यों बढ़ रही संख्या? पैदा होंगी कई समस्याएं!

देश में बाघों की संख्या बढ़ना लंबे समय तक एक बड़ी सफलता मानी जाती रही है, लेकिन अब यही सफलता नए सवाल खड़े कर रही है। मध्य प्रदेश, जिसे ‘टाइगर स्टेट’ कहा जाता है, आज एक अलग तरह की चुनौती का सामना कर रहा है- क्या यहां बाघों की संख्या जरूरत से ज्यादा हो गई है?

MP में बाघों की आबादी में 155% का उछाल

आंकड़ों के मुताबिक, 2014 से 2022 के बीच देश में बाघों की संख्या में करीब 65% की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन मध्य प्रदेश में यह बढ़ोतरी कहीं ज्यादा तेज रही। यहां बाघों की संख्या 308 से बढ़कर 785 तक पहुंच गई, यानी करीब 155% का उछाल। अब यह आंकड़ा 1000 के करीब पहुंचने की बात कही जा रही है।

क्या जंगल इन बाघों को संभालने में सक्षम हैं?

इसी तेजी से बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने विशेषज्ञों से यह आकलन कराने का फैसला किया है कि राज्य के जंगल आखिर कितने बाघों को संभाल सकते हैं। सवाल सिर्फ संख्या का नहीं है, बल्कि इस बात का है कि क्या जंगलों में इतनी क्षमता है कि वे इन बाघों को सुरक्षित और संतुलित तरीके से रख सकें।

आखिर क्यों तेजी से बढ़ी बाघों की संख्या?

  • विशेषज्ञों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ने के पीछे कई अहम कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है ‘बेहतर संरक्षण और निगरानी’। 2004 में सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों के पूरी तरह खत्म हो जाने के बाद देशभर में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के तहत बड़े स्तर पर सुधार किए गए। इसके बाद शिकार (Poaching) पर सख्ती बढ़ी और जंगलों में निगरानी मजबूत हुई।
  • दूसरी बड़ी वजह है शिकार (prey base) की उपलब्धता। जंगलों में हिरण, सांभर, नीलगाय जैसे जानवरों की संख्या बढ़ी, जिससे बाघों को पर्याप्त भोजन मिलने लगा। आसान भाषा में समझें तो जितना ज्यादा खाना, उतनी ज्यादा बाघों की संख्या टिक सकती है और बढ़ सकती है।
  • तीसरा कारण है जंगलों में प्रबंधन सुधार- जैसे पानी के स्रोत बनाना, घायल बाघों का इलाज, और बेहतर वन प्रबंधन। इन कदमों से बाघों की मृत्यु दर कम हुई और उनकी जीवित रहने की संभावना बढ़ गई।
  • इसके अलावा, एक चौंकाने वाला फैक्टर भी सामने आया है- पालतू मवेशियों की बढ़ती संख्या। कई इलाकों में बाघ अब गाय-भैंस जैसे जानवरों का शिकार करने लगे हैं, जिससे उन्हें आसानी से भोजन मिल जाता है। इससे भी उनकी संख्या बढ़ने में मदद मिली है।

मानव बाघ संघर्ष

बाघ बढ़े तो टकराव भी बढ़ा, इंसान और जानवर आमने-सामने

बाघों की संख्या बढ़ने के साथ एक और समस्या तेजी से सामने आई है- “इंसान और बाघ के बीच टकराव”। आंकड़े बताते हैं कि देश में बाघों के हमलों में मारे जाने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ी है। 2014 से 2019 के बीच जहां 224 लोगों की जान गई, वहीं 2020 से 2025 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 418 हो गया।

प्राकृतिक कॉरिडोर नष्ट होने से बढ़ा संघर्ष

विशेषज्ञों के मुताबिक, इसका सबसे बड़ा कारण है जंगलों के बीच प्राकृतिक कॉरिडोर का खत्म होना। सड़क, रेल, खनन और बड़े प्रोजेक्ट्स की वजह से जंगल आपस में कट गए हैं। ऐसे में जब बाघों की संख्या बढ़ती है, तो वे नए इलाके खोजने के लिए बाहर निकलते हैं। लेकिन रास्ते बंद होने की वजह से वे गांवों और इंसानी बस्तियों की ओर बढ़ जाते हैं।

टाइगर स्टेट या टाइगर संकट

पालतू मवेशियों को निशाना बना रहे बाघ

एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है- बाघों के भोजन में अब जंगली जानवरों के साथ-साथ पालतू मवेशियों की हिस्सेदारी बढ़ती जा रही है। कई रिसर्च में पाया गया है कि बाघों के शिकार में गाय-भैंस और अन्य घरेलू पशु बड़ी संख्या में शामिल हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि जंगलों के बाहर मवेशियों की मौजूदगी बाघों को आसान शिकार देती है। वहीं, कई बार लोग बूढ़े या अनुपयोगी पशुओं को जंगलों के पास छोड़ देते हैं, जिससे बाघों को भोजन आसानी से मिल जाता है। इससे एक तरफ बाघों की संख्या बढ़ती है, तो दूसरी तरफ इंसान-बाघ संघर्ष भी तेज होता है।

सिर्फ बाघों की संख्या बढ़ना ही काफी नहीं

मध्य प्रदेश में बाघों की बढ़ती संख्या एक बड़ी सफलता जरूर है, लेकिन अब यह सफलता एक नए मोड़ पर खड़ी है। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि बाघ कितने हैं, बल्कि यह है कि क्या हम उनके लिए पर्याप्त जगह और संसाधन उपलब्ध करा पा रहे हैं या नहीं। अगर नहीं, तो आने वाले समय में यह ‘टाइगर स्टोरी’ एक बड़े संकट में बदल सकती है। इसलिए अब सरकार को इन तीन बातों पर ध्यान देने की जरूरत है।

  • जंगलों के बीच कनेक्टिविटी बहाल करना।
  • शिकार के लिए जंगली जानवरों की संख्या बढ़ाना।
  • इंसानों के साथ टकराव को कम करना जरूरी है।

Ratan Gupta

लेखक के बारे में

Ratan Gupta

रतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।


रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।


लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।


रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।


इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।

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