MP में भी समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी; CM ने दिए मसौदा बनाने के निर्देश, मंत्रियों को सौंपा खास काम
पिछले शुक्रवार को असम में चुनाव प्रचार के दौरान एक जनसभा में बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी पूरे देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने के भाजपा के वादे को फिर दोहराया था, साथ ही यह भी वादा किया कि आदिवासियों को इसके दायरे से बाहर रखा जाएगा।

उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब भाजपा शासित एक अन्य राज्य मध्य प्रदेश में भी समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार की इच्छा इस साल के अंत तक राज्य में इसे लागू करने की है और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसके लिए राज्य के गृह विभाग को मसौदा तैयार करने का निर्देश भी दे दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और अधिकारियों को इस दिशा में सक्रिय होने और इस मामले पर सुझाव देने को कहा।
इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने साल के अंत तक यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि सीएम यादव ने मंगलवार को राज्य के गृह विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 2026 के आखिर तक UCC कानून पारित करने की प्रक्रिया शुरू करें। उन्होंने बताया कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि मध्य प्रदेश भी अब इस दिशा में आगे बढ़े। इससे पहले अगस्त 2024 में यादव ने कहा था कि उनकी सरकार UCC को लागू करने के लिए किसी तरह की कोई जल्दबाजी में नहीं है, क्योंकि हर राज्य के हालात अलग-अलग होते हैं।
सीएम ने विभाग और मंत्रियों को सौंपा अलग-अलग काम
इस बारे में जानकारी देते हुए एक अधिकारी ने कहा कि, 'सीएम ने जहां एक तरफ गृह विभाग को इसे लेकर एक मसौदा तैयार करने का निर्देश दिया है, जबकि मंत्रियों से कहा गया है कि वे उत्तराखंड और गुजरात में UCC लागू करते समय सामने आई चुनौतियों का अध्ययन करें।' जिसके बाद उम्मीद की जा रही है कि विभाग द्वारा UCC विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। इससे पहले उत्तराखंड और गुजरात जैसे भाजपा शासित राज्यों में UCC कानून का मसौदा सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजन देसाई की अगुवाई में किया गया था।
उधर एक मंत्री ने बताया कि उत्तराखंड और गुजरात की तरह ही, मध्य प्रदेश में भी आदिवासियों को UCC के दायरे से बाहर रखा जाएगा। राज्य में यूसीसी लागू करने को लेकर पहली चर्चा दिसंबर 2022 में तब शुरू हुई थी, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसकी संभावनाओं को जांचने के लिए एक समिति बनाने की घोषणा की थी, लेकिन वह योजना कभी पूरी नहीं हो पाई।
केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा था- पूरे देश में लागू होगा UCC
पिछले शुक्रवार को असम में चुनाव प्रचार के दौरान एक जनसभा में बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी पूरे देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने के भाजपा के वादे को फिर दोहराया था, साथ ही यह भी वादा किया कि आदिवासियों को इसके दायरे से बाहर रखा जाएगा। इससे पहले फरवरी 2024 में, उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बना जिसने UCC कानून पारित किया। पिछले महीने गुजरात ने भी इसी राह पर चलते हुए यह कानून पारित कर दिया। बता दें कि देश में यूसीसी को लागू करने का मुद्दा, भाजपा की उन तीन प्रमुख वादों में से है, जो पार्टी की स्थापना के समय से ही वह लोगों से करती आई है। दो अन्य मुद्दे राम मंदिर का निर्माण और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का मुद्दा था, जिसे पार्टी पूरा कर चुकी है।
कांग्रेस प्रवक्ता बोले- यह असल मुद्दों से ध्यान हटाने की साजिश
मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने इस मध्य भारतीय राज्य में UCC (समान नागरिक संहिता) लागू करने के लिए उठाए गए इस कदम का स्वागत किया, और इसे मौजूदा तथा आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि 'यह कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होना चाहिए, जिसमें जाति या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव न हो।' वहीं विपक्षी दल कांग्रेस के प्रवक्ता KK मिश्रा ने इस कदम को ध्यान भटकाने की एक चाल बताया। उन्होंने कहा कि 'राज्य की सत्ताधारी पार्टी ने यह कदम किसान, आम आदमी और युवाओं की बेरोजगारी जैसे अनगिनत असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए उठाया है।' उन्होंने कहा कि, 'यह भाजपा की पुरानी चाल है और लोग अब उन पर विश्वास नहीं करते।'
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