कांग्रेस के पास 4 ज्यादा, भाजपा के पास 10 कम; फिर क्यों राज्यसभा चुनाव में टाइट-फाइट
मध्य प्रदेश में भाजपा की ओर से तीसरे उम्मीदवार के ऐलान के बाद राज्यसभा चुनाव का मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। भाजपा के पास 10 वोटों की कमी है, लेकिन कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग की आशंका पनप गई है।

मध्य प्रदेश में तीन सीटों के लिए होने जा रहा राज्यसभा का चुनाव बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीसरे उम्मीदवार के नाम का ऐलान करके कांग्रेस को नई परीक्षा में डाल दिया है। मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट की उम्मीदवार के बाद कांग्रेस की प्रत्याशी जयंत नटराजन के लिए टाइट-फाइट हो गई है। भले ही कांग्रेस का अंकगणित कमजोर ना हो पर, जिस तरह नटराजन के नाम पर पार्टी में आंतरिक असंतोष की बात कही जा रही है, उसने देश की सबसे पुरानी पार्टी को एक बार फिर क्रॉस वोटिंग को लेकर सतर्क कर दिया है।
महेश केवट से पहले शनिवार को भाजपा प्रत्याशी तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, चुग और अग्रवाल की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि तीसरी सीट पर अब मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन ने भी सोमवार को ही नामांकन दाखिल किया। दिग्विजय सिंह का कार्यकाल पूरा होने के बाद कांग्रेस ने नटराजन को उम्मीदवार बनाया है।
क्या है राज्यसभा चुनाव का गणित
मध्यप्रदेश की कुल 230 सदस्यीय विधानसभा में प्रभावी वोटों की संख्या 228 है। इसमें भाजपा के 164 और कांग्रेस के 64 विधायक हैं। बीना से विधायक निर्मला सप्रे के मतदान को लेकर स्थिति स्पष्ट ना होने और उनका झुकाव भाजपा की तरफ होने और विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर लगी रोक जैसी तकनीकी वजहों से कांग्रेस का आंकड़ा 62 पर सिमटता दिख रहा है। राज्यसभा की तीन सीटों पर प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए 58 वोटों की जरूरत है, इस हिसाब से कांग्रेस के पास 4 वोट अधिक हैं और यदि भाजपा तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारती तो नटराजन के लिए किसी तरह की चिंता नहीं थी।
भाजपा के पास 10 कम
भाजपा को दो सीटें जीतने के लिए 116 वोट की जरूरत है। कुल 164 में से 116 वोट देने के बाद भाजपा के पास 48 वोट बचेंगे। तीसरी सीट जीतने के लिए उसे 58 वोट चाहिए यानी भाजपा को 10 अतिरिक्त वोटों की जरूरत है।
भाजपा की चाल क्या
जिस तरह हाल के समय में भाजपा ने कुछ राज्यसभा चुनावों में कांग्रेस और अन्य दलों में सेंध लगाई है, उसको देखकते हुए पार्टी चिंता में जरूर है। खासकर जिस तरह हिमाचल प्रदेश में फरवरी 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने उलटफेर किया था उसे कांग्रेस भूली नहीं होगी। दरअसल, भाजपा सूत्रों का कहना है कि उनकी कोशिश अपनी जीत से ज्यादा कांग्रेस की अंतर्कलह को सामने लाना है। राहुल गांधी खेमे की नटराजन को सर्वमान्य उम्मीदवार नहीं माना जा रहा है। ऐसे में यदि कुछ विधायकों ने अपना संतोष जाहिर करने के लिए कॉस वोटिंग की तो नटराजन की राह मुश्किल हो सकती है। वहीं, भाजपा के नेताओं का कहना है कि यदि उन्हें तीसरी सीट नहीं भी मिली तो वह कांग्रेस की फूट को सामने लाने में कामयाब जरूर हो सकते हैं।
(पीटीआई इनपुट के साथ)
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