
MP में तंट्या मामा की प्रतिमा पर बवाल, दो इंजीनियर सस्पेंड, 45 दिन में लगेगी नई मूर्ति
खरगोन में क्रांतिकारी तंट्या मामा की प्रतिमा निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद सरकार ने दो इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया है। 10 लाख के बजट में फाइबर की सस्ती मूर्ति लगाने पर अब नया टेंडर जारी हुआ है।
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में आदिवासी क्रांतिकारी तंट्या मामा की प्रतिमा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जहां इस प्रतिमा के लिए 10 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे, वहीं ठेकेदार ने बहुत सस्ती फाइबर (FRP) की मूर्ति लगा दी। इस अनियमितता के आरोपों के बाद सरकार ने तुरंत कार्रवाई की है।
कौन थे तंट्या मामा?
तंट्या भील, जिन्हें तंट्या मामा के नाम से जाना जाता है, 19वीं सदी के प्रसिद्ध आदिवासी योद्धा थे। ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष करने वाले इस बहादुर को 'भारतीय रॉबिन हुड' भी कहा जाता है। आदिवासी समुदाय में उनकी बहुत इज्जत है। खरगोन के तंट्या मामा भील तिराहा (बिस्तान नाका चौराहा) पर उनकी प्रतिमा स्थापित की गई थी।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
खरगोन नगर निकाय के बीजेपी पार्षदों ने अतिरिक्त कलेक्टर रेखा राठौर को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि 10 लाख रुपये की मंजूरी कांस्य या पत्थर की प्रतिमा के लिए थी, लेकिन ठेकेदार ने मात्र 75 हजार से 1 लाख रुपये की फाइबर मूर्ति लगा दी। पार्षदों ने ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर और उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
दो इंजीनियर सस्पेंड
शहरी प्रशासन एवं विकास विभाग ने शुक्रवार को सहायक अभियंता मनीष महाजन और उप-अभियंता जितेंद्र मेढा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। कमिश्नर संकेत भोंडवे के आदेश में कहा गया है कि दोनों अधिकारियों ने गंभीर लापरवाही बरती और कर्तव्य में चूक की, जो सेवा नियमों का उल्लंघन है।
45 दिनों में लगेगी नई प्रतिमा
विवाद बढ़ने के बाद नगर निकाय ने फैसला लिया है कि अब धातु की नई प्रतिमा लगाई जाएगी। इसके लिए नया ई-टेंडर जारी हो चुका है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अगले 45 दिनों के अंदर यह नई मूर्ति स्थापित कर दी जाएगी।
कांग्रेस ने की सख्त कार्रवाई की मांग
जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि नायक ने इस घटना को आदिवासी समुदाय की भावनाओं पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि यह तंट्या मामा की विरासत का अपमान है। सभी जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।





