
केन-बेतवा परियोजना के बांध का काम बंद, महिलाओं ने कर्मचारियों को खदेड़ा
केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत ढोंढन गांव में बन रहे बांध को लेकर ग्रामीण महिलाओं का विरोध अब उग्र रूप ले चुका है। मुआवजा नहीं मिलने से नाराज महिलाओं ने लाठी-डंडों के साथ मौके पर पहुंचकर बांध निर्माण कार्य पूरी तरह बंद करा दिया है।
केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत ढोंढन गांव में बांध निर्माण का काम महिलाओं के कड़े विरोध के कारण पिछले 5 दिनों से ठप है। उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिलने से नाराज महिलाएं लाठी-डंडे लेकर निर्माण स्थल पर डटी हैं। उन्होंने कंपनी के कर्मचारियों को खदेड़ दिया। महिलाएं मुंह पर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। उनकी मांग है कि प्रति परिवार 50 लाख रुपये, 5 एकड़ जमीन और क्षेत्र का दोबारा सर्वे कराया जाए। अधिकारियों के साथ घंटों चली बातचीत के बावजूद अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है।
कर्मचारियों को भगाया
मिली जानकारी के अनुसार, महिलाओं ने निर्माण कार्य में लगी एलसीसी कंपनी के कर्मचारियों को मौके से भगा दिया जिससे पिछले 5 दिनों से बांध का काम पूरी तरह बंद है। बड़ी संख्या में महिलाएं डूब क्षेत्र में धरने पर बैठी हैं। वे किसी भी हाल में काम दोबारा शुरू नहीं होने देने की चेतावनी दे रही हैं।
प्रशासन पर आरोप
महिलाओं का आरोप है कि जिला प्रशासन और प्रोजेक्ट के अधिकारी बिना पूरा मुआवजा और पुनर्वास दिए जबरन गांव खाली करा रहे हैं। प्रभावित परिवारों को अब तक न तो पूरी आर्थिक मदद मिली है और ना ही रहने की कोई ठोस योजना बताई गई है। धरने पर बैठी महिलाओं का कहना है कि वे पीढ़ियों से इसी जमीन पर खेती और मजदूरी करके अपना गुजारा कर रही हैं।
कम मुआवजा का आरोप
महिलाओं का कहना है कि बांध बनने से उनके घर, खेत, कुएं और आजीविका के साधन पूरी तरह डूब जाएंगे लेकिन सरकार की ओर से तय किया गया मुआवजा बहुत कम है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन की एक टीम मौके पर पहुंची जिसमें एडीएम मिलिंद कुमार नागदेवे, एडिशनल एसपी आदित्य पाटले और राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
हाथों में डंडे लेकर खड़ी रहीं
अधिकारियों और आंदोलन करने वाली महिलाओं के बीच लगभग तीन घंटे तक बातचीत हुई लेकिन किसी भी बात पर सहमति नहीं बन पाई। महिलाएं अपनी मांगों पर अड़ी रहीं इसलिए प्रशासनिक टीम को बिना किसी नतीजे के वापस जाना पड़ा। बातचीत के समय महिलाएं अधिकारियों के सामने हाथों में डंडे लेकर खड़ी रहीं और उन्होंने साफ कह दिया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी तब तक वे काम आगे नहीं बढ़ने देंगी।
5 दिनों से काम बंद
आलम यह है कि विरोध प्रदर्शन के कारण बीते 5 दिनों से काम पूरी तरह बंद है। महिलाओं का कहना है कि जब तक सरकार कोई ठोस निर्णय नहीं लेती तब तक काम बंद रहेगा। इस बारे में एडीएम मिलिंद कुमार नागदेवे ने बताया कि ग्रामीणों ने कुछ मांगें रखी हैं जिन पर चर्चा हुई है। प्रदर्शनकारियों से लिखित आवेदन ले लिया गया है। काम रोकने का फैसला ग्रामीणों का अपना है लेकिन सरकारी परियोजना का काम इस तरह रोकना सही नहीं है।
13 गांव प्रभावित
केन-बेतवा लिंक परियोजना से छतरपुर जिले के लगभग 13 गांव प्रभावित हो रहे हैं जिनमें ढोंढन, खरयानी, पलकोंहा और सुखबाहा जैसे गांव शामिल हैं। इन गांवों में रहने वाले बहुत से आदिवासी और दलित परिवार पूरी तरह खेती और जंगल पर निर्भर हैं। धरने पर बैठी महिलाएं मांग कर रही हैं कि हर प्रभावित परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा और 5 एकड़ खेती की जमीन दी जाए और पूरे इलाके का दोबारा सर्वे कराया जाए।
रिपोर्ट- जयप्रकाश

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Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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